
जकार्ता। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता से आनेजाने वाली उड़ान सेवाएं मंगलवार तड़के बहाल कर दी गईं। ज्वालामुखी विस्फोट से निकली राख के कारण हवाई अड्डों को दो दिन तक बंद रखना पड़ा था जिससे करीब 3,000 उड़ानें प्रभावित हुई थीं।
3.41 लाख यात्री प्रभावित
‘Anak Krakatau Volcano’ से लगातार हो रहा विस्फोट, लावा के फव्वारे और तेज धमाकों की आवाज रविवार को बंद हो गई थी। रविवार और सोमवार को हवाई अड्डे बंद रहने से करीब 2,961 उड़ानें प्रभावित हुईं, जिनमें 622 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शामिल थीं। इससे करीब 3,41,000 यात्रियों को परेशानी हुई।
परिवहन मंत्री डूडी पुरवागांधी ने बताया
परिवहन मंत्री डूडी पुरवागांधी ने बताया कि जकार्ता को सेवाएं देने वाले सुकर्णोहट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और हलीम पेरदानकुसुमा हवाई अड्डे, पश्चिम जावा के बांडुंग शहर स्थित हुसैन सास्त्रानेगारा हवाई अड्डे तथा बांतन प्रांत के दो छोटे हवाई अड्डों को आधी रात के कुछ देर बाद फिर खोल दिया गया।
स्थिति में सुधार के बावजूद हालांकि तीन अन्य हवाई अड्डे स्थानीय समयानुसार सुबह 10 बजे तक बंद थे।
दक्षिण सुमात्रा प्रांत के पागर आलम स्थित अतुंग बुंगसू हवाई अड्डे पर सोमवार सुबह ही सामान्य परिचालन बहाल हो गया था।
पुरवागांधी ने एक बयान में कहा, ”हम एहतियाती रुख अपना रहे हैं क्योंकि हवा की दिशा बहुत तेजी से बदल रही है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि ज्वालामुखीय राख अनाक क्राकाटाऊ के आसपास के हवाई अड्डों से दूर चली गई हो।”
अनाक क्राकाटाऊ ज्वालामुखी
अनक क्राकाटोआ इंडोनेशिया में जावा और सुमात्रा के बीच सुंडा स्ट्रेट में एक एक्टिव ज्वालामुखी द्वीप है। इसके नाम का मतलब है “क्राकाटोआ का बच्चा।” जो कि 1883 में क्राकाटोआ के खतरनाक विस्फोट के दशकों बाद, 1927 में समुद्र से निकला था। इसकी लोकेशन सुंडा स्ट्रेट, लगभग जकार्ता और बंदर लैम्पुंग के बीच है। यह एक प्रकार का एक्टिव स्ट्रैटोज्वालामुखी है जिसके ज़बरदस्त विस्फोट से लावा का बहाव, राख का निकलना और ज्वालामुखी से भूस्खलन हो सकता है।
वहीं अगर बात करें 2018 की आपदा की तो ज्वालामुखी के किनारे का एक बड़ा हिस्सा फटने के दौरान समुद्र में गिर गया, जिससे सुनामी आई जिसने इंडोनेशिया के तटीय इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। 400 से ज़्यादा लोग मारे गए। इसीलिए ज्वालामुखी पर लगातार नज़र रखी जा रही है क्योंकि इसकी एक्टिविटी तेज़ी से बदल सकती है।
अब जान लिजिए कि आखिर ज्वालामुखी में विस्फोट क्यों होते हैं।
पृथ्वी के अंदर मैग्मा, गैस और अत्यधिक दबाव जमा होता है। जिससें ज्वालामुखी के नीचे दबाव बढ़ जाता है और पृथ्वी की सतह पर निकलने का रास्ता मिलता है, तो मैग्मा, राख और गैसें तेजी से बाहर निकलती हैं। इसी प्रक्रिया को ज्वालामुखी विस्फोट कहा जाता है।
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