राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आयोजन को लेकर लक्जरी हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में अभूतपूर्व हलचल देखने को मिल रही है. ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका सहित नए सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों, उच्चस्तरीय राजनयिक प्रतिनिधिमंडलों, अंतरराष्ट्रीय मीडिया तंत्र और वैश्विक सुरक्षा दस्तों के दिल्ली आगमन से पहले शहर के तमाम 5स्टार और 5स्टार डीलक्स होटलों में कमरों की 100% ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई है. कमरों की इस तीव्र किल्लत के कारण दिल्लीएनसीआर के प्रमुख लक्जरी होटलों के दैनिक कमरों के किराये में 200% से 500% तक का रिकॉर्ड उछाल आया है.

हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, लुटियंस दिल्ली और इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास स्थित एयरोसिटी हब के अधिकांश प्रमुख होटलों के प्रेसिडेंशियल और वीवीआईपी सूट्स महीनों पहले ही विभिन्न दूतावासों और विदेश मंत्रालयों द्वारा आरक्षित किए जा चुके हैं. सामान्य दिनों में जो लक्जरी रूम्स 15,000 से 25,000 रुपये प्रति रात के भाव पर उपलब्ध होते थे, वे अब 2.5 लाख रुपए प्रति रात तक की दरों पर बुक हो रहे हैं.
एक रात का कितना किराया
ब्रिक्स समिट से पहले राजधानी दिल्ली के लक्जरी होटल में कमरों की भारी कमी और किराए में तेज उछाल देखा जा रहा है. कई प्रमुख होटल में 1213 सितंबर के आयोजन के आसपास कमरे उपलब्ध नहीं हैं या प्रति रात का किराया छह अंक में बताया जा रहा है. होटल बुकिंग मंचों की पड़ताल से पता चला कि नयी दिल्ली के ताज महल और द ओबेरॉय में 1112 सितंबर के लिए कमरे उपलब्ध नहीं हैं, जबकि शहर के ताज पैलेस में 1012 सितंबर के लिए कोई कमरा उपलब्ध नहीं था. द लीला पैलेस, नयी दिल्ली 1012 सितंबर के लिए बुकिंग स्वीकार नहीं कर रहा था. आईटीसी मौर्य, नयी दिल्ली जैसी संपत्तियों में 1013 सितंबर के लिए उपलब्ध कमरों के लिए असाधारण रूप से ऊंचा किराया मांगा जा रहा है, जिसमें रात भर ठहरने की शुरुआती कीमत 2.3 लाख रुपये से अधिक है.
ब्रांडेड होटल के लगभग दोसवा दो लाख कमरे
होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष के बी काचरू ने बताया कि भारत एक निर्णायक मोड़ पर दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रहा है जैसेजैसे देश प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी करने और एक प्रमुख एमआईसीई गंतव्य के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने की तैयारी कर रहा है, दुनिया यह देख रही है कि हम अपने पर्यटन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किस तरह विस्तार करते हैं.
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से कमरों की उपलब्धता पर काफी ध्यान जाएगा और यह स्थिति एक कड़वी सच्चाई को सामने ला रही है कि हमारा आतिथ्य बुनियादी ढांचा हमारी पर्यटन महत्वाकांक्षा के साथ तालमेल नहीं बैठा पाया है. काचरू ने कहा कि भारत में इस समय ब्रांडेड होटल के लगभग दोसवा दो लाख कमरे हैं, जो हमारे आकार तथा आकांक्षा वाले देश के लिए बहुत कम है. कई प्रतिनिधि और अन्य आगंतुक शिखर सम्मेलन से पहले ही पहुंच रहे हैं और अपने प्रवास को बढ़ा रहे हैं, जिससे मध्य दिल्ली में कमरों की उपलब्धता पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है.



