
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटरों की जांच को लेकर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा उठाए गए गंभीर तकनीकी सवालों पर केन्द्र सरकार की ग्रामीण विद्युतीकरण निगम लिमिटेड ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। परिषद द्वारा 22 अगस्त को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं आरईसी के अध्यक्ष तथा प्रबंध निदेशक के समक्ष प्रस्तुत विस्तृत प्रतिवेदन के बाद आरईसी मुख्यालय ने पूरे मामले को लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय के संज्ञान में लाया है।
इसके बाद आरईसी लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय के मुख्य कार्यक्रम प्रबंधक एस.एस. गुप्ता ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक से परिषद द्वारा उठाए गए पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड एवं संबंधित विद्युत वितरण कंपनियों की विस्तृत टिप्पणियां एवं अभिमत उपलब्ध कराने के लिए रिपोर्ट मांगी है। आरईसी के कार्यालय ने उपभोक्ता परिषद को लिखित जानकारी दी है।
24 स्मार्ट मीटरों की जांच पर उठे सवाल
परिषद ने अपने विस्तृत प्रतिवेदन में कहा था कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन द्वारा गठित उच्च स्तरीय तकनीकी समिति ने विभिन्न कंपनियों के कुल 24 स्मार्ट मीटरों की जांच एमवीवीएनएल, गोमती नगर, लखनऊ स्थित हाईटेक परीक्षण प्रयोगशाला में की थी। समिति ने विभिन्न तकनीकी परीक्षणों के आधार पर सभी 24 स्मार्ट मीटरों को निर्धारित सीमा के भीतर सही पाया था। परिषद ने इस जांच की वैधता पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि संबंधित हाईटेक परीक्षण प्रयोगशाला की मान्यता प्राप्त जांच सीमा में आईएस 16444 के भाग1 एवं भाग2 के अनुसार स्मार्ट मीटरों की जांच शामिल नहीं थी।
आरईसी ने मामले को गंभीरता से लिया
स्मार्ट मीटर परियोजना की वित्त पोषण एजेंसी होने के कारण आरईसी के समक्ष यह मामला उठाया गया था। आरईसी मुख्यालय द्वारा परिषद के प्रतिवेदन को गंभीरता से लेते हुए मामले को लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय को संदर्भित किया गया और अब आरईसी लखनऊ द्वारा यूपीपीसीएल से आधिकारिक रिपोर्ट एवं टिप्पणियां मांगी गई हैं। उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है क्योंकि अब यूपीपीसीएल को स्पष्ट करना होगा कि 24 स्मार्ट मीटरों की जांच के समय संबंधित प्रयोगशाला के पास आईएस 16444 के भाग1 एवं भाग2 के अनुसार स्मार्ट मीटरों की जांच की आवश्यक मान्यता थी अथवा नहीं।
उपभोक्ता परिषद ने उठाए स्मार्ट मीटर जांच पर सवाल
परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा, जो केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग की केंद्रीय सलाहकार समिति के सदस्य भी हैं, ने कहा कि आरईसी के संबंधित कार्यालय द्वारा परिषद को लिखित रूप में इस मामले में की गई कार्रवाई एवं मामले को आगे संदर्भित किए जाने की जानकारी उपलब्ध कराई गई है।
उन्होंने कहा कि परिषद द्वारा 22 अगस्त को आरईसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अध्यक्ष के समक्ष विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया था। परिषद ने अपने प्रतिवेदन में स्मार्ट मीटरों की जांच करने वाली प्रयोगशाला की मान्यता और जांच की तकनीकी वैधता से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य एवं दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। केन्द्र सरकार के केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा भी इस मामले में अपने स्तर से आवश्यक कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब यह मामला केवल यूपीपीसीएल तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि केंद्र स्तर पर संबंधित संस्थाओं के संज्ञान में भी पहुंच चुका है।
IS 16444 के तहत जांच को लेकर विवाद
परिषद ने राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड द्वारा इस वर्ष 10 जून को दिए गए लिखित स्पष्टीकरण का भी हवाला दिया था, जिसमें परिषद के अनुसार उक्त प्रयोगशाला की मान्यता प्राप्त जांच सीमा में आईएस 16444 के भाग1 एवं भाग2 के अनुसार परीक्षण शामिल नहीं होने की बात स्पष्ट की गई थी।
जांच की तकनीकी वैधता की होगी समीक्षा?
संबंधित प्रयोगशाला के पास स्मार्ट मीटरों की उक्त मानक के अनुसार जांच की मान्यता नहीं थी, तो 24 स्मार्ट मीटरों की जांच की तकनीकी वैधता की पुनः समीक्षा किया जाना आवश्यक होगा।
करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं से जुड़े स्मार्ट मीटरों की जांच में पारदर्शिता और निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उपभोक्ता परिषद इस मामले में प्राप्त होने वाली यूपीपीसीएल की रिपोर्ट का अध्ययन करेगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
परिषद ने स्पष्ट किया कि स्मार्ट मीटरों की जांच की विश्वसनीयता से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले को उपभोक्ता हित में हर स्तर पर उठाया जाएगा, ताकि प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता न हो।



