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भारत का अनोखा गांव: न बिजली, न मोबाइल, साबुन भी नहीं करते इस्तेमाल; ब्रह्म मुहूर्त में जागता है पूरा ग्राम.

भारत का अनोखा गांव: न बिजली, न मोबाइल, साबुन भी नहीं करते इस्तेमाल; ब्रह्म मुहूर्त में जागता है पूरा ग्राम.

श्रीकाकुलम: आज के दौर में मोबाइल फोन, इंटरनेट और बिजली के बिना जीवन की कल्पना करना भी मुश्किल लगता है। लेकिन आंध्र प्रदेश में एक ऐसा गांव होने का दावा किया जाता है, जहां लोग आधुनिक सुविधाओं से दूरी बनाकर बेहद पारंपरिक तरीके से जीवन जीते हैं। इस गांव का नाम कुर्मा ग्रामम बताया जाता है, जो श्रीकाकुलम जिले की एंथकापल्ली पहाड़ियों के बीच स्थित है।

सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट और वीडियो के मुताबिक, यहां रहने वाले लोग प्रकृति के करीब रहना पसंद करते हैं और आधुनिक जीवनशैली से दूरी बनाए हुए हैं। गांव की जीवनशैली इन दिनों सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रही है।

सिर्फ 17 परिवारों का गांव

वायरल जानकारी के अनुसार, कुर्मा ग्रामम करीब 60 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और यहां सिर्फ 17 परिवार रहते हैं। गांव देखने में भले ही सामान्य ग्रामीण इलाके जैसा लगे, लेकिन यहां की जीवनशैली इसे बाकी जगहों से अलग बनाती है।

दावे के मुताबिक, गांव में न बिजली की सुविधा है और न ही लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। शाम के समय रोशनी के लिए पारंपरिक दीयों का इस्तेमाल किया जाता है।

मिट्टी और लकड़ी से बने हैं घर

इस गांव में घरों का निर्माण भी पारंपरिक तरीके से किए जाने की बात कही गई है। वायरल पोस्ट के मुताबिक, यहां मकान सीमेंट और लोहे के ढांचे के बजाय मिट्टी, चूना, लकड़ी और पत्थरों से बनाए जाते हैं।

घरों के फर्श पर गोबर से लिपाई करने की परंपरा भी बताई गई है। खाना पकाने के लिए गैस सिलेंडर के बजाय लकड़ी से जलने वाले मिट्टी के चूल्हों का इस्तेमाल किया जाता है।

साबुन की जगह रीठा और प्राकृतिक चीजें

कुर्मा ग्रामम की सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात को लेकर हो रही है, वह है यहां साबुन का इस्तेमाल न करना। सोशल मीडिया पर साझा जानकारी के अनुसार, ग्रामीण साबुन की जगह रीठा और दूसरी प्राकृतिक वस्तुओं का इस्तेमाल करते हैं।

यह जीवनशैली आधुनिक सुविधाओं से दूर और प्रकृति आधारित जीवन को दर्शाने के तौर पर पेश की जा रही है।

सुबह साढ़े तीन बजे जागता है पूरा गांव

वायरल पोस्ट में गांव की दिनचर्या का भी जिक्र है। इसके मुताबिक, सुबह करीब 3:30 बजे गांव के लोग जाग जाते हैं। इसके बाद ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके सभी लोग एक स्थान पर एकत्र होते हैं।

दीयों की हल्की रोशनी के बीच भजन और ध्यान किया जाता है। बताया जाता है कि गांव में बच्चों की पढ़ाई भी पारंपरिक तरीके से होती है।

बच्चों को गुरुकुल में पढ़ाने का दावा

सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गांव में आधुनिक कॉन्वेंट स्कूल की जगह बच्चों को गुरुकुल पद्धति से शिक्षा दी जाती है। यहां वेद, रामायण और भगवद्गीता के साथ-साथ अंग्रेजी और गणित की बुनियादी शिक्षा दिए जाने का दावा किया गया है।

वायरल जानकारी में यह भी कहा गया है कि इस पहल की शुरुआत 2018 में हुई थी। इसका उद्देश्य लोगों को प्रकृति के करीब रखते हुए अपेक्षाकृत शांत और तनावमुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना बताया गया है।

आधुनिक दौर में पारंपरिक जीवन चर्चा में

मोबाइल और इंटरनेट के दौर में कुर्मा ग्रामम की यह कथित जीवनशैली लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गई है। हालांकि, गांव से जुड़ी कई जानकारियां सोशल मीडिया पोस्ट और वायरल वीडियो के जरिए सामने आई हैं, इसलिए इनके हर दावे की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

फिर भी, प्रकृति के करीब रहने, पारंपरिक घरों में रहने और गुरुकुल आधारित शिक्षा जैसे पहलुओं ने इस गांव को सोशल मीडिया पर खासा चर्चा में ला दिया है।

 

 

 

 

 

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