भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर एक्टिव हो गई है. पार्टी जीत की हैट्रिक लगाने की कवायद में जुटी है. साथ ही पार्टी की कोशिश पिछले चुनाव की तुलना में इस बार बेहतर प्रदर्शन करने की भी है. ऐसे में पार्टी ने अब उन बूथों पर गहराई से काम करने का फैसला किया है जहां उसने 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ गया.

उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी अब अपनी स्थिति को बूथ लेवल पर मजबूत करने में तेजी से जुट गई है. पार्टी की रणनीति अपने बूथों को मजबूत करने की है, लेकिन उसमें भी पार्टी उन बूथों पर खास ध्यान देने जा रही है जिनके नतीजे 2022 विधानसभा चुनाव से 2024 लोकसभा चुनाव के बीच बदल गए. बीजेपी सूत्रों के मुताबिक पूरे प्रदेश में करीब 18,900 बूथ ऐसे हैं जिन्हें पार्टी को 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत तो हासिल हुई लेकिन 2024 के संसदीय चुनावों में उसे हार मिली.
महासचिव संतोष का आज से 3 दिन का UP दौरा
बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बी.एल. संतोष आज 11 सितंबर से सूबे के 3 दिन के दौरे पर रहेंगे. इस बीच संतोष लखनऊ और कानपुर 2 क्षेत्रों के महत्वपूर्ण नेताओं के साथ बैठक कर बूथ स्तर पर मजबूती के लिए टिप्स भी देंगे. इसके अलावा पार्टी के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े अगले हफ्ते दोबारा 16 से 22 सितंबर तक से राज्य के 3 क्षेत्रों के 10 जिलों का दौरा करेंगे.
अपनी इस यात्रा के दौरान बी.एल. संतोष उन बूथों की समीक्षा करेंगे जहां पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था और इन बूथों पर फिर से जीत हासिल करने के लिए पार्टी की रणनीति पर चर्चा करेंगे.
2024 के लोकसभा चुनाव में जीती बूथ गंवाई
इन 2 चुनावों के डेटा कंपेयरिंग से पता चलता है कि बीजेपी को सबसे अधिक नुकसान ग्रामीण इलाकों में हुआ था जबकि तुलनात्मक रूप से शहरी क्षेत्रों में कम नुकसान हुआ था. 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को जिन बूथों पर हार का सामना करना पड़ा उनमें से करीब 80% बूथ ग्रामीण इलाकों में पड़ते हैं. प्राप्त आंकड़ों के अध्ययन से पता चलता है कि बीजेपी ने सबसे अधिक बूथ अवध और पूर्वांचल क्षेत्रों में गवाएं थे.
उपलब्ध डेटा के मुताबिक 2022 के विधानसभा चुनावों में, बीजेपी ने अवध बेल्ट की 154 सीटों में से 101 सीटों पर जीत हासिल किए, लेकिन 2024 के संसदीय चुनावों में अवध प्रांत में बीजेपी को अमेठी, फैजाबाद, कन्नौज, सुल्तानपुर और सीतापुर में हजारों की संख्या में पोलिंग बूथों पर हार का सामना करना पड़ा.
पूर्वांचल में बेहद खराब रहा था बीजेपी का प्रदर्शन
इसी तरह 2022 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पूर्वांचल की 102 सीटों में से 53 सीटों पर जीत हासिल की थी. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल के जौनपुर, गाजीपुर, मछलीशहर, चंदौली और प्रयागराज क्षेत्र में पार्टी को बूथ स्तर पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था.
जबकि बीजेपी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रुहेलखंड क्षेत्र में 2022 में 128 विधानसभा सीटों में से 87 सीटें हासिल की थी. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों में मिली जीत के आधार पर पार्टी महज 65 विधानसभा सीटों पर ही आगे रही. यानी 2022 की तुलना में 2024 के लोकसभा चुनाव में 22 सीटों का नुकसान हुआ. यहां भी बूथ स्तर पर नुकसान तो हुआ लेकिन अवध और पूर्वांचल के तुलना में कम बूथों पर हार मिली.
2022 की कामयाबी 2024 में दोहराने से चूक गई BJP
बुंदेलखंड की बात करें तो बीजेपी ने यहां पर 2022 के चुनाव में 19 सीटों में से 14 विधानसभा सीटों पर दर्ज हासिल किया. जबकि 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी में मिले वोटों के आंकड़ों के हिसाब से बीजेपी 19 में से महज 9 सीटों पर आगे रही. यानी 2022 की तुलना में 2024 में करीब 5 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा.
बीजेपी को लेकर 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को बड़ा झटका लगा और उसे पूरे प्रदेश में महज 33 सीटों पर जीत मिली जबकि पार्टी को 2019 लोकसभा चुनाव में 62 सीटें मिली थीं. दूसरी तरफ 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 37 सीटों पर दर्ज हासिल कर सभी को चौंका दिया, जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में उसे महज 5 सीटें ही मिली थीं.
अब जबकि विधानसभा चुनाव को 6 महीने ही रह गए हैं. बीजेपी ने अपने बूथों पर हार का अध्ययन और पुरानी कमियों को खंगालने की कोशिश तेज कर दी है. पार्टी डेटा माइनिंग कर अपने कमजोर बूथों को मजबूती देने के लिए सबसे पहले 2024 चुनाव में नुकसान में रहे करीब 19 हजार बूथों पर काम तेज करेगी.



