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​कॉपर ने मचाई धूम! 6 महीने में 18% रिटर्न, सोने-चांदी को पछाड़कर कॉपर ने बनाया रिकॉर्ड,Vedanta शेयर पर नजर|

तांबा यानी कॉपर इस समय एक नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, जिसने रिटर्न के मामले में पिछले छह महीने में सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं को भी पीछे छोड़ दिया है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर ने एक नया ऑलटाइम हाई बनाते हुए तीन महीने के फ्यूचर्स ऑफिशियल ट्रेडिंग में 14,703 डॉलर प्रति टन का आंकड़ा छू लिया है। कॉपर की इस शानदार चाल से भारतीय कंपनी वेदांता लिमिटेड और इस सेक्टर से जुड़ी अन्य कंपनियां बेहद उत्साहित नजर आ रही हैं।

​कॉपर ने मचाई धूम! 6 महीने में 18% रिटर्न, सोने-चांदी को पछाड़कर कॉपर ने बनाया रिकॉर्ड,Vedanta शेयर पर नजर|

सोने और चांदी के प्रदर्शन पर नजर डालें तो इस साल मार्च यानी छह महीने पहले, एमसीएक्स पर कॉपर की औसत कीमत प्रति किलोग्राम करीब 1,200 रुपये थी, जो बढ़कर अब लगभग 1,415 रुपये हो गई है। इस तरह तांबे ने महज छह महीने में लगभग 18 प्रतिशत का शानदार रिटर्न दिया है। इसके विपरीत, एमसीएक्स पर 24 कैरेट सोने का भाव छह महीने पहले प्रति 10 ग्राम करीब 1.60 लाख रुपये था, जो अब घटकर लगभग 1.52 लाख रुपये पर आ चुका है, यानी इसमें चार प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। इसी प्रकार, चांदी की कीमत भी इस साल मार्च में प्रति किलो करीब 2.65 लाख रुपये थी, जो गिरकर अब लगभग 2.33 लाख रुपये रह गई है, जिससे इसमें करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आई है।

वेदांता लिमिटेड के लिए यह स्थिति बेहद खास मायने रखती है। कंपनी के कॉपर बिजनेस में पहले से ही उच्च वॉल्यूम मौजूद है, और इसके रॉड जैसे तैयार उत्पादों से आने वाली वैल्यू का बढ़ता हुआ हिस्सा देखा जा रहा है। यह स्थिति वेदांता लिमिटेड को कॉपर की कीमतों में आ रही तेजी के साथ एक सीधा ऑपरेटिंग लिंक प्रदान करती है। वर्तमान में वैश्विक बाजारों में खदान से आपूर्ति में कमी आ रही है, जबकि दूसरी तरफ टैरिफड्रिवन ट्रेड फ्लो, इलेक्ट्रिफिकेशन, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल्स और एआई डेटा सेंटर्स की वजह से इस धातु की मांग में भारी इजाफा हो रहा है।

कॉपर की मांग केवल एक हफ्ते के प्राइस एक्शन तक सीमित नहीं है। वर्ष 2022 में वैश्विक रिफाइंड कॉपर की मांग लगभग 24.8 मिलियन टन थी, और वर्ष 2030 तक इसके 30 मिलियन टन से अधिक होने का अनुमान लगाया गया है। वेदांता लिमिटेड की योजना के अनुसार, वर्ष 2040 तक इसकी मांग में 40 प्रतिशत की वृद्धि हो जाएगी। इस अनुमान के पीछे यह वास्तविकता है कि डेटा सेंटर, रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स सभी में पारंपरिक विकल्पों की तुलना में काफी अधिक कॉपर का उपयोग होता है।

कंपनी से मिली जानकारी के अनुसार, वेदांता लिमिटेड का कॉपर बिजनेस अब केवल कॉपर की कीमत के बजाय इस बात पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है कि वह क्या और कितना बेच सकता है। कंपनी ने आठ वर्षों में पहली बार वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में सबसे अधिक 53,000 टन की बिक्री दर्ज की, जो 3 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ी है। इसी अवधि में कंपनी ने अपने सबसे अधिक रॉड प्रोडक्शन को भी दर्ज किया है। इस दौरान कॉपर का ईबिटडा 8.9 मिलियन डॉलर रहा, जिसकी औसत कीमत 13,329 डॉलर प्रति टन दर्ज की गई।

भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को भारी गिरावट देखने को मिली। सुबह पौने दस बजे बीएसई सेंसेक्स 646 अंक जबकि एनएसई निफ्टी 50 236 अंक नीचे कारोबार कर रहा था, जिसका प्रभाव वेदांता लिमिटेड के शेयर पर भी पड़ना स्वाभाविक था। इस दौरान एनएसई में वेदांता के शेयर 261.10 रुपये के स्तर पर ट्रेड हो रहे थे, जो पिछले दिन के मुकाबले 5.05 रुपये या 1.88 प्रतिशत की गिरावट दर्शाते हैं।

इस बीच मार्केट एक्सपर्ट्स की राय भी सामने आई है। नुवामा ने वेदांता लिमिटेड के शेयर पर ‘बाय’ की रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस 333 रुपये तय किया है। वहीं, एमके ने भी ‘बाय’ की रेटिंग को बरकरार रखते हुए इस शेयर का टारगेट प्राइस 350 रुपये निर्धारित किया है।

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