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​Orangutans News : ओडिशा में मिले पांच ओरंगउटान की होगी घर वापसी? इंडोनेशिया ने शुरू की कोशिश, भारत में जांच जारी

​Orangutans  News : ओडिशा में मिले पांच ओरंगउटान की होगी घर वापसी? इंडोनेशिया ने शुरू की कोशिश, भारत में जांच जारी

डिजिटल डेस्क, लखनऊ । ओडिशा के बालासोर जिले के जंगल में मिले पांच नन्हे ओरंगउटान का मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। इंडोनेशिया सरकार ने पांचों को अपने देश वापस लाने यानी प्रत्यावर्तन की दिशा में पहल शुरू की है। इंडोनेशिया के वानिकी मंत्रालय ने कहा है कि भारत में ओरंगउटान का प्राकृतिक रूप से पाया जाना संभव नहीं है। ऐसे में पांच नन्हे ओरंगउटान का एक साथ मिलना अवैध वन्यजीव व्यापार और अंतरराष्ट्रीय तस्करी की मजबूत आशंका पैदा करता है। हालांकि, तस्करी के जरिए इन्हें भारत लाए जाने की बात अभी जांच का विषय है। इंडोनेशिया के वानिकी मंत्रालय ने 10 सितंबर को जारी आधिकारिक बयान में कहा कि वह भारत के संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। इस समन्वय का उद्देश्य पांचों ओरंगउटान की पहचान, उनके मूल स्थान की पुष्टि और उन्हें उचित प्रक्रिया के तहत इंडोनेशिया वापस लाने की कोशिश करना है।

आठ सितंबर को बालासोर के जंगल में मिले थे पांचों

पांचों ओरंगउटान आठ सितंबर को ओडिशा के बालासोर जिले के भोगराई/उदयपुर क्षेत्र के जलेश्वर इलाके में स्थित जंगल के ब्लॉक में मिले थे। यह क्षेत्र पश्चिम बंगाल की सीमा के करीब है। स्थानीय वन विभाग ने इन्हें सुरक्षित बचाने के बाद भुवनेश्वर के नंदनकानन प्राणी उद्यान पहुंचाया, जहां फिलहाल इनकी देखभाल और निगरानी की जा रही है। इंडोनेशिया के वानिकी मंत्रालय के अनुसार, शुरुआती जानकारी में पांचों की उम्र करीब एक से डेढ़ वर्ष के बीच है और इन्हें स्वस्थ अवस्था में पाया गया था। पांचों को फिलहाल नंदनकानन में रखा गया है।

सुमात्रा के होने की शुरुआती आशंका

इंडोनेशिया के वानिकी मंत्रालय ने कहा है कि पांचों के शारीरिक और आकारिकी संबंधी शुरुआती निरीक्षण में इनके सुमात्रा में पाए जाने वाले ओरंगउटान होने की आशंका सामने आई है। हालांकि, मंत्रालय ने साफ किया है कि यह अभी शुरुआती पहचान है और इसे अंतिम नहीं माना जा सकता। इनकी प्रजाति और आनुवंशिक मूल की पुष्टि अधिकृत वैज्ञानिक संस्थाओं की ओर से डीएनए जांच के जरिए की जाएगी। भारतीय अधिकारियों ने भी डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए सैंपल लेने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की थी, लेकिन नंदनकानन में पांचों के तनाव और नए वातावरण के अभ्यस्त होने की प्रक्रिया को देखते हुए सैंपलिंग को कुछ समय के लिए टाल दिया गया है।

ओडिशा के बालासोर में मिले 5 ओरंगुटान

 

भारत में प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाते ओरंगउटान

ओरंगउटान भारत के मूल वन्यजीव नहीं हैं। इनका प्राकृतिक आवास इंडोनेशिया और मलेशिया में है, खासकर सुमात्रा और बोर्नियो में। यही वजह है कि बालासोर के जंगल में पांचों का मिलना जांच एजेंसियों के लिए गंभीर सवाल बना हुआ है। इंडोनेशिया के वानिकी मंत्रालय ने कहा है कि भारत में पांच नन्हे ओरंगउटान की मौजूदगी से यह मजबूत आशंका पैदा होती है कि वे अवैध वन्यजीव व्यापार और सीमा पार तस्करी के शिकार हो सकते हैं। हालांकि, मंत्रालय ने भी इनके मूल और मामले से जुड़े नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच जारी रहने की बात कही है।

ओडिशा पुलिस और डब्ल्यूसीसीबी कर रहे जांच

पांचों ओरंगउटान के मिलने के बाद ओडिशा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो भी मामले की जांच कर रहे हैं। जांच का मुख्य सवाल यही है कि ये वन्यजीव भारत कैसे पहुंचे और बालासोर के जंगल तक इन्हें कौन लेकर आया। भारतीय एजेंसियां स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने के साथ इस मामले में संभावित वन्यजीव तस्करी नेटवर्क के कोण की भी जांच कर रही हैं।

इंडोनेशिया ने भारत से शुरू किया समन्वय

इंडोनेशिया के वानिकी मंत्रालय ने बताया कि उसने सीआईटीईएस की भारतीय प्रबंधन प्राधिकरण, नई दिल्ली स्थित भारतीय और इंडोनेशियाई दूतावासों, भारत की वैज्ञानिक संस्था बीआरआईएन और कृषि मंत्रालय समेत संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय शुरू किया है। मंत्रालय के अनुसार, पांचों को वापस लाने की प्रक्रिया राष्ट्रीय कानूनों और वन्यजीवों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार से संबंधित सीआईटीईएस के प्रावधानों के तहत आगे बढ़ाई जाएगी। इंडोनेशिया ने वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अपने सहयोगी संगठनों से भी संपर्क किया है। इनमें यायासन एकोसिस्टम लेस्तारी, जारिंगन सत्वा इंडोनेशिया, सेंटर फॉर ओरंगउटान प्रोटेक्शन और फोरम ओरंगउटान इंडोनेशिया शामिल हैं। इन संगठनों ने पांचों ओरंगउटान के प्रत्यावर्तन के बाद उनकी देखभाल और पुनर्वास में सहयोग की तैयारी जताई है।

वापसी हुई तो स्वास्थ्य जांच और पुनर्वास होगा

इंडोनेशिया के अनुसार, यदि पांचों ओरंगउटान को वापस लाने की प्रक्रिया पूरी होती है तो उनके स्वास्थ्य की जांच, क्वारंटीन, आनुवंशिक पहचान और व्यवहार का आकलन किया जाएगा। इसके बाद उनकी जरूरत और स्थिति के अनुसार पुनर्वास की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।यदि वे आवश्यक मानकों को पूरा करते हैं तो उन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़े जाने की दिशा में भी पुनर्वास प्रक्रिया से गुजारा जा सकता है। 

नंदनकानन में फिलहाल निगरानी

फिलहाल पांचों नंदनकानन प्राणी उद्यान में क्वारंटीन और चिकित्सकीय निगरानी में हैं। ओडिशा सरकार ने इन्हें नंदनकानन में रखने के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से अनुमति मांगी है। वहीं, इंडोनेशिया की ओर से इनकी वापसी के लिए भारत के साथ संपर्क किया जा रहा है। इंडोनेशिया के वानिकी मंत्रालय ने कहा है कि पांचों की सुरक्षा और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही, मामले की जांच के जरिए इनके मूल स्थान और संभावित अवैध वन्यजीव व्यापार नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश जारी रहेगी।

ओरंगउटान को खास बनाती हैं उसकी ये खूबियां 

ओरंगउटान फाउंडेशन इंटरनेशनल की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में ओरंगउटान की तीन मान्य प्रजातियां मानी जाती हैं, बोर्नियन, सुमात्रन और तपनुली। इनके नाम का अर्थ है जंगल का इंसान ‘ओरंगउटान’ नाम मलय भाषा के दो शब्दों से बना है। ‘ओरंग’ का अर्थ इंसान और ‘हुतान’ का अर्थ जंगल है। जंगलों का खत्म होना, प्राकृतिक आवास का सिकुड़ना और अवैध वन्यजीव व्यापार ओरंगउटान के लिए बड़े खतरे हैं। तीनों प्रजातियां संरक्षण की गंभीर चुनौती का सामना कर रही हैं। अनुकूल परिस्थितियों में ओरंगउटान करीब 60 साल तक जीवित रह सकते हैं। संरक्षण केंद्रों में स्वस्थ ओरंगउटान इससे लंबी उम्र भी पा सकते हैं।एक बड़े नर ओरंगउटान का वजन करीब 136 किलोग्राम तक पहुंच सकता है। ओरंगउटान अपना अधिकांश समय पेड़ों पर बिताते हैं। उनकी लंबी भुजाएं उन्हें ऊंची शाखाओं तक पहुंचने और पेड़ों के बीच आवाजाही में मदद करती हैं। 

Odisha में मिले 5 Orangutans, Indonesia को बचाने के लिए उड़ीसा सरकार ने नंदनकानन प्राणी उद्यान में उनकी देखभाल करा रही है।

 

पकड़ बेहद मजबूत, 300 से अधिक तरह के फल खाने का शौकीन 

ओरंगउटान मनुष्यों से कई व्यवहारिक समानताएं रखने वाले अत्यंत बुद्धिमान वनमानुष हैं। मांबच्चे का गहरा रिश्ता और पेड़ों पर रहने की उनकी विशेष क्षमता उन्हें दूसरे वनमानुषों से अलग पहचान देती है।हाथों और पैरों की बनावट ऐसी होती है कि वे शाखाओं को मजबूती से पकड़ सकते हैं। पैरों के बड़े अंगूठे भी पकड़ बनाने में मदद करते हैं। मां से गहरा रिश्ता ओरंगउटान का बच्चा शुरुआती वर्षों में मां पर बेहद निर्भर रहता है। वह मां के साथ पेड़ों पर घूमता और भोजन जुटाना सीखता है। ओरंगउटान 300 से अधिक प्रकार के फल खा सकते हैं। इसके अलावा पत्तियां, बीज, छाल और दूसरे वनस्पति पदार्थ भी इनके भोजन का हिस्सा हैं। वयस्क नर ओरंगउटान के चेहरे के दोनों ओर उम्र बढ़ने के साथ बड़े गालपैड विकसित हो सकते हैं। ये उसकी पहचान का प्रमुख हिस्सा होते हैं।

मजबूत भुजाओं और पकड़ के कारण बेहद ताकतवर

मजबूत भुजाओं और पकड़ के कारण ओरंगउटान लंबे समय तक शाखाओं से लटक सकते हैं और पेड़ों की ऊंचाई पर भोजन जुटा सकते हैं। मादा ओरंगउटान आमतौर पर एक समय में एक बच्चे की देखभाल करती है। बच्चे लंबे समय तक मां के साथ रहते हैं। वयस्क नर ओरंगउटान सामान्यतः अकेले रहते हैं,जबकि मादा अपने बच्चों के साथ रहती है। ओएफआई की रिपोर्ट बताती है कि भारत ओरंगउटान का प्राकृतिक आवास नहीं है। बोर्नियन ओरंगउटान बोर्नियो में और सुमात्रन व तपनुली ओरंगउटान इंडोनेशिया के सुमात्रा क्षेत्र में पाए जाते हैं। 

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