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जंगल में जमीन के नीचे छिपाकर रखी थीं 250 जिलेटिन की छड़ें, पुलिस और STF ने बरामद कर टाला बड़ा खतरा.

जंगल में जमीन के नीचे छिपाकर रखी थीं 250 जिलेटिन की छड़ें, पुलिस और STF ने बरामद कर टाला बड़ा खतरा.

जमुई: बिहार के जमुई जिले में पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में बड़ी मात्रा में विस्फोटक बरामद होने से हड़कंप मच गया। चिहरा थाना क्षेत्र के गुहिया जंगल में सुरक्षाबलों ने जमीन के अंदर छिपाकर रखी गईं 250 जिलेटिन की छड़ें बरामद की हैं। शुरुआती जांच में इसे पुराने नक्सली दौर का विस्फोटक डंप बताया जा रहा है।

गुप्त सूचना के आधार पर चलाए गए सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों को यह विस्फोटक मिला। बरामदगी के बाद पूरे इलाके को सुरक्षित कर दिया गया और बम निरोधक दस्ते को मौके पर बुलाया गया।

गुप्त सूचना पर जंगल में चलाया गया सर्च ऑपरेशन

मामला चिहरा थाना क्षेत्र की बरमोरिया पंचायत के गुहिया गांव से लगे घने जंगल का है। पुलिस को सूचना मिली थी कि नक्सली गतिविधियों के दौर में जंगल के सुनसान इलाके में बड़ी मात्रा में विस्फोटक जमीन के नीचे छिपाकर रखा गया था।

सूचना मिलने के बाद चिहरा थानाध्यक्ष रिंकू रजक के नेतृत्व में स्थानीय पुलिस और एसटीएफ की टीम ने जंगल में सघन तलाशी अभियान शुरू किया। जवानों ने संभावित ठिकानों की घेराबंदी कर व्यवस्थित तरीके से इलाके की जांच की।

जमीन के नीचे मिला विस्फोटक का डंप

तलाशी के दौरान सुरक्षाबलों को जमीन के अंदर छिपाकर रखी गईं जिलेटिन की छड़ें मिलीं। जब बरामद विस्फोटक की संख्या सामने आई तो पुलिस अधिकारियों को भी इसकी गंभीरता का अंदाजा हुआ।

सुरक्षाबलों ने तत्काल आसपास के इलाके को सुरक्षित किया और वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी। इसके बाद बरामद विस्फोटकों को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंचा

विस्फोटक मिलने की सूचना के बाद जमुई से बम निरोधक दस्ता भी मौके पर पहुंचा। टीम ने सुरक्षा मानकों के तहत बरामद 250 जिलेटिन की छड़ों को निष्क्रिय करने की कार्रवाई शुरू की।

साथ ही पुलिस ने आसपास के जंगल और पहाड़ी इलाकों में भी तलाशी अभियान तेज कर दिया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं और भी पुराने विस्फोटक या अन्य सामान तो छिपाकर नहीं रखा गया है।

पुराने नक्सली डंप की आशंका

पुलिस के अनुसार, इलाके में नक्सली गतिविधियों का प्रभाव पहले रहा है। इसी वजह से आशंका जताई जा रही है कि बरामद विस्फोटक उसी दौर में जंगल में छिपाकर रखा गया होगा। हालांकि, विस्फोटक को वास्तव में कब और किसने वहां रखा था, इसकी जांच की जा रही है।

थानाध्यक्ष रिंकू रजक के मुताबिक, समय रहते विस्फोटक बरामद होने से संभावित खतरा टल गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जंगल में ऐसे और कितने पुराने ठिकाने या डंप मौजूद हो सकते हैं।

सुरक्षाबलों की ओर से आसपास के जंगली और पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि पुराने नक्सल प्रभावित इलाकों में छिपे विस्फोटक और अन्य संदिग्ध सामान की तलाश का अभियान आगे भी जारी रहेगा।

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