भारतीय कॉर्पोरेट जगत के सबसे शक्तिशाली और 300 अरब डॉलर से अधिक के साम्राज्य ‘टाटा ग्रुप’ की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के शीर्ष नेतृत्व में बड़े फेरबदल की आहट ने दलाल स्ट्रीट और वैश्विक निवेशकों को चौंका दिया है. ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, टाटा संस की शक्तिशाली नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी अपने चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से पद छोड़ने के उनके संभावित विचार पर पुनर्विचार करने का औपचारिक अनुरोध करने जा रही है.

साल 2017 में साइरस मिस्त्री के विवादित निकास के बाद टाटा समूह की कमान संभालने वाले एन. चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल साल 2027 की शुरुआत में समाप्त हो रहा है. हालांकि, चंद्रशेखरन द्वारा एक और कार्यकाल न लेने और नए नेतृत्व को जिम्मेदारी सौंपने के संकेतों ने टाटा बोर्ड को हरकत में ला दिया है.
यह घटनाक्रम ऐसे संवेदनशील मोड़ पर आया है जब टाटा ग्रुप ऐतिहासिक रणनीतिक बदलावों के दौर से गुजर रहा है. एन. चंद्रशेखरन के नेतृत्व में समूह ने न केवल एयर इंडिया की ऐतिहासिक घर वापसी कराई, बल्कि भारत का पहला घरेलू सेमीकंडक्टर प्लांट, गुजरात में बैटरी गीगाफैक्ट्री, और टाटा डिजिटल जैसे भविष्य के मेगाप्रोजेक्ट्स की नींव रखी.
इसके अलावा, हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा टाटा संस की CIC स्टेटस को सरेंडर करने की अर्जी खारिज करने के बाद होल्डिंग कंपनी के शेयर बाजार में अनिवार्य लिस्टिंग का कानूनी काउंटडाउन भी शुरू हो चुका है. ऐसे में शपूरजी पालोनजी की 18.37% हिस्सेदारी और शेयरधारकों के हितों को साधने के लिए बोर्ड चंद्रशेखरन को पद पर बनाए रखना सबसे सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प मान रहा है.
कमेटी एन. चंद्रशेखरन करेगी अनुरोध
टाटा संस के बोर्ड की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमिटी चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के उस फैसले का विरोध करेगी जिसमें उन्होंने फरवरी 2027 में अपना मौजूदा कार्यकाल खत्म होने पर दोबारा नियुक्ति न लेने की बात कही है. कमिटी उनसे इस फैसले पर दोबारा सोचने के लिए कहेगी. इससे इस अहम कमिटी और टाटा संस के सबसे बड़े शेयरहोल्डर ‘टाटा ट्रस्ट्स’ के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है. टाटा ट्रस्ट्स ने पहले ही चंद्रा के फैसले को स्वीकार करते हुए एक बयान जारी किया था. यह मामला 17 सितंबर को होने वाली बोर्ड मीटिंग में उठेगा.
क्योंकि लिस्ट हो सकती है टाटा संस
यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि दो साल से ज्यादा समय तक रेगुलेटरी स्तर पर कोई प्रतिक्रिया न मिलने के बाद, रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने टाटा संस की NBFC लाइसेंस सरेंडर करने की अपील ठुकरा दी और कंपनी को तुरंत लिस्ट होने का निर्देश दिया. टाटा संस की NRC में हरीश मनवानी, अनीता मारंगोली जॉर्ज और वेणु श्रीनिवासन शामिल हैं. मामले से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अब जब कंपनी के लिस्ट होने की संभावना है, तो चंद्रा का चेयरमैन बने रहना और भी जरूरी हो गया है. इससे पब्लिक कंपनी बनने के दौर में ग्रुप में स्थिरता और निरंतरता बनी रहेगी. बोर्ड की NRC डायरेक्टर्स और अहम अधिकारियों के चयन और उनके वेतनभत्ते तय करने के लिए ज़िम्मेदार होती है.
आने वाली चुनौतियां
बोर्ड उस कमिटी की सिफारिशों पर काम करता है जो पूरे बोर्ड का ही एक हिस्सा होती है. एक अधिकारी ने कहा कि जब ग्रुप रेगुलेटरी और कैपिटल मार्केट में बदलाव के दौर से गुजर रहा है, तो ऐसे में लीडरशिप में बदलाव करना दोहरी चुनौती साबित हो सकता है. हालांकि चंद्रशेखरन ने संकेत दिया है कि फरवरी 2027 के बाद वे अगला कार्यकाल नहीं चाहते, लेकिन लिस्टिंग की संभावना उन्हें कुछ समय के लिए और बनाए रखने के तर्क को मजबूत कर सकती है. ग्रुप को आगे ले जाने में उनकी संस्थागत जानकारी और अनुभव एक मजबूत आधार बनेंगे, खासकर तब जब टाटा संस एक लिस्टेड कंपनी के तौर पर ज्यादा कड़ी निगरानी में काम करने की तैयारी कर रहा है.
अगर चंद्रा अपने फ़ैसले पर दोबारा विचार करते हैं, तो उन्हें टाटा ट्रस्ट्स के समर्थन की जरूरत होगी. उन्हें सालाना आम बैठक में डायरेक्टर के तौर पर दोबारा नियुक्त किया जाना होगा. हालांकि, यह प्रक्रिया अभी रुकी हुई है क्योंकि मुख्य शेयरहोल्डर ‘सर रतन टाटा ट्रस्ट’ को महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने अहम फेसले लेने से रोक दिया है. यह रोक ट्रस्ट द्वारा नियमों के उल्लंघन की जांच पूरी होने तक लगाई गई है.



