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करोड़पति बहू शालू का नाम नहीं, लेकिन पत्नी-बेटे के अलावा इस शख्स के नाम थी वसीयत; विनीत मनोचा हत्याकांड में खुले नए राज!

करोड़पति बहू शालू का नाम नहीं, लेकिन पत्नी-बेटे के अलावा इस शख्स के नाम थी वसीयत; विनीत मनोचा हत्याकांड में खुले नए राज!

 कानपुर के फार्मास्युटिकल कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड की जांच में लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं. अब पुलिस की जांच कारोबारी के बेटे सुब्रत तक पहुंच गई है. पुलिस के मुताबिक कथित शूटर विशाल गौतम ने हत्या से दो दिन पहले नया सिम खरीदा था और इसी नंबर से सुब्रत को छह बार कॉल की गई थी. पुलिस ने सुब्रत, शालू और विशाल से जुड़े सात मोबाइल नंबरों के करीब 1,000 पन्नों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले हैं. रिकॉर्ड के अनुसार 1 मई से 5 सितंबर के बीच सुब्रत और विशाल के बीच करीब 309 बार बातचीत हुई. वहीं, पुलिस संपत्ति, कर्ज, सीसीटीवी और डिजिटल साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बना रही है.

नए सिम से सुब्रत को क्यों की गईं छह कॉल?

पुलिस के मुताबिक, विशाल गौतम ने 3 सितंबर को नया सिम खरीदा था. इसके ठीक दो दिन बाद, 5 सितंबर को विनीत मनोचा की हत्या कर दी गई. जांच में पता चला है कि इसी नए नंबर से विशाल ने शालू से बातचीत की थी और सुब्रत को भी छह बार फोन किया गया. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हत्या से ठीक पहले खरीदे गए नंबर से सुब्रत से संपर्क करने की जरूरत क्यों पड़ी. पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के मुताबिक, अगर शालू ने हत्या की योजना बनाई थी और विशाल ने वारदात के लिए नया नंबर लिया था, तो उसी नंबर से सुब्रत को कॉल किए जाने का कारण जांच का अहम हिस्सा है. इसी वजह से सुब्रत की संभावित भूमिका को लेकर भी पड़ताल की जा रही है.

सात नंबरों के करीब 1,000 पन्नों के रिकॉर्ड

मामले की कड़ियां जोड़ने के लिए पुलिस ने सुब्रत, शालू और विशाल से जुड़े सात मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड जुटाए हैं. ये रिकॉर्ड 1 मई से 6 सितंबर तक के बताए जा रहे हैं और इनकी लंबाई करीब 1,000 पन्ने है. पुलिस यह देख रही है कि हत्या से पहले और बाद में किन लोगों के बीच कब और कितनी बातचीत हुई. पुलिस उपायुक्त पश्चिम एसएम कासिम अबिदी ने कहा, “कॉल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया जा रहा है. इसका उद्देश्य हत्या से पहले और बाद में हुई बातचीत की प्रकृति को समझना है.” रिकॉर्ड में पुलिस को यह भी पता चला है कि 1 मई से 5 सितंबर के बीच सुब्रत और विशाल के बीच करीब 309 बार बातचीत हुई थी. 5 सितंबर की रात ही विनीत मनोचा की हत्या हुई थी.

    मनोचा की कंपनी से निकाला गया था विशाल

    पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि विशाल गौतम पहले विनीत मनोचा के यहां काम करता था. पुलिस के अनुसार कथित चोरी के आरोप में उसे नौकरी से हटा दिया गया था. इसके बावजूद नौकरी जाने के बाद भी विशाल और सुब्रत के बीच संपर्क बना रहा. अब जांचकर्ता इस पुराने संपर्क का कारण भी तलाश रहे हैं. पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि नौकरी से हटाए जाने के बाद दोनों के बीच लगातार बातचीत किस वजह से होती रही और हत्या से पहले उनके संपर्क का क्या संदर्भ था. इसी कारण सात मोबाइल नंबरों के कॉल रिकॉर्ड को केस में अहम साक्ष्य माना जा रहा है.

    जेल में शालू और विशाल से पूछे गए 30 से ज्यादा सवाल

    अदालत से अनुमति मिलने के बाद कल्याणपुर थाना प्रभारी केशव तिवारी ने मंगलवार को जेल में शालू और विशाल से पूछताछ की. पुलिस ने दोनों से कथित साजिश, आपसी बातचीत और हत्या से पहले तथा वारदात के बाद की गतिविधियों को लेकर 30 से अधिक सवाल किए. पुलिस के अनुसार शालू ने हत्या की योजना बनाने से इनकार किया है. वहीं विशाल ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि उसने शालू के कहने पर विनीत मिनोचा की हत्या की. विशाल के मुताबिक, शालू ने उसे छह लाख रुपये और नौकरी देने का वादा किया था. पुलिस अब दोनों के बयानों को दूसरे साक्ष्यों से मिलाकर देख रही है.

    रिमांड मिलने पर सुब्रत से आमने-सामने पूछताछ संभव

    पुलिस ने शालू और विशाल की कस्टडी रिमांड भी मांगी है. पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के मुताबिक, दो दिन के भीतर रिमांड मिलने की संभावना है. यदि रिमांड मिलती है तो जांचकर्ता दोनों आरोपियों के साथ सुब्रत से भी आमने-सामने पूछताछ कर सकते हैं. इसका उद्देश्य बयानों में सामने आ रहे अंतर और घटनाक्रम से जुड़े सवालों को स्पष्ट करना होगा. पुलिस आरोपियों के बयानों का मिलान सीसीटीवी फुटेज से भी कर रही है. खास तौर पर सुब्रत के उस बयान की जांच हो रही है, जिसमें उसने परिसर में दाखिल हुए व्यक्ति की पहचान विशाल के रूप में करने की बात कही थी.

    हत्या के बाद विशाल ने राज किशोर को किए पांच फोन

    पुलिस अब हत्या के बाद विशाल गौतम की गतिविधियों की भी जांच कर रही है. पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद विशाल ने अपने सहयोगी राज किशोर को पांच बार फोन किया था. इसके बाद वह उबर कैब से अपने ठिकाने तक गया. पुलिस कैब के रूट, ड्राइवर के बयान और डिजिटल पेमेंट रिकॉर्ड की जांच कर रही है. इन जानकारियों से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हत्या के बाद विशाल कहां-कहां गया और किन लोगों के संपर्क में रहा. पुलिस आयुक्त ने उन रिपोर्टों को अफवाह बताया है, जिनमें दावा किया गया था कि शालू ने इंटरनेट पर किसी व्यक्ति की हत्या के तरीके खोजे थे.

    शालू के फोन और इंस्टाग्राम गतिविधि पर भी सवाल

    पुलिस शालू के फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है. वहीं शालू के वकील शिवाकांत दीक्षित ने जब्त किए गए फोन को लेकर सवाल उठाए हैं. वकील का दावा है कि फोन से जुड़े इंस्टाग्राम अकाउंट पर 6 सितंबर की सुबह 10:03 बजे गतिविधि दिखाई गई थी. इसके अलावा उन्होंने हत्या की रात सुब्रत के बैंक जाने से जुड़ी रिपोर्ट की भी जांच की मांग की है. पुलिस इस मामले में डिजिटल साक्ष्यों को अन्य जांच से जोड़कर देख रही है. फिलहाल पुलिस के सामने फोन गतिविधियों और घटनाक्रम से जुड़े इन दावों की पुष्टि करना भी जांच का हिस्सा है.

    वसीयत में पत्नी, बेटे और बेटी के नाम संपत्ति

    जांच का एक दूसरा पहलू विनीत मिनोचा की संपत्ति और आर्थिक स्थिति से जुड़ा है. पुलिस आयुक्त के मुताबिक, वर्ष 2022 में पंजीकृत वसीयत में मनोचा ने अपनी संपत्तियां पत्नी पुनीता, बेटे सुब्रत और बेटी शुभानी के नाम की थीं. पुलिस को कानपुर और गाजियाबाद में उनकी संपत्तियों की जानकारी मिली है. इनमें बिरहाना रोड का फ्लैट और कैनाल रोड की संपत्ति समेत अन्य संपत्तियां शामिल हैं. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि संपत्तियों के बंटवारे का हत्या से कोई संबंध था या नहीं. साथ ही सुब्रत पर कर्ज होने के संकेत भी पुलिस को मिले हैं. इनमें ऑनलाइन क्रेडिट और दूसरी देनदारियां शामिल होने की बात सामने आई है.

    5 सितंबर को हुई थी कारोबारी की हत्या

    60 वर्षीय विनीत मिनोचा बिरहाना रोड पर अपने बेटे के साथ फार्मास्युटिकल फर्म चलाते थे. 5 सितंबर की तड़के उनकी चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में शालू, विशाल और राज किशोर जेल में हैं. अब नए सिम से सुब्रत को की गई छह कॉल ने जांच के दायरे को और बढ़ा दिया है. पुलिस सात मोबाइल नंबरों के करीब 1,000 पन्नों के रिकॉर्ड, सुब्रत और विशाल के बीच हुई करीब 309 बातचीत, सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल पेमेंट, उबर कैब की जानकारी और आरोपियों के बयानों को एक साथ रखकर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है. फिलहाल जांच में यह पता लगाना अहम है कि हत्या से पहले और बाद में आरोपियों और सुब्रत के बीच संपर्क किस वजह से हुआ था और संपत्ति तथा कर्ज से जुड़े पहलुओं का इस हत्याकांड से कोई संबंध है या नहीं..

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