यूपीआई चार्ज के मुद्दे पर कांग्रेस केंद्र सरकार पर हमलावर है. कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अमेरिका के आगे झुक गई है. वसूली मैन मोदी का कहर जारी है. इस बार की वसूली अमेरिका के सामने सरेंडर करने की वजह से हो रही है. वसूली के नए प्लान में ₹2,000 से ऊपर के हर मर्चेंट UPI पेमेंट पर 0.4% का चार्ज वसूला जाएगा. अगर आपने ₹5,000 की खरीदारी की तो ₹20 का चार्ज लगेगा. अगर ₹10,000 की खरीदारी की तो ₹40 वसूला जाएगा.

सुप्रिया ने कहा कि पहले UPI पेमेंट पूरी तरह फ्री था लेकिन नरेंद्र मोदी से ये देखा नहीं गया और यहां भी वसूली का खेल शुरू कर दिया. यह पैसा कौन देगा? यह पैसा देश के गरीब, युवा, छात्रों, मज़दूरों से वसूला जाएगा. मोदी सरकार की दलील बिल्कुल बेमानी है कि यह टैक्स ग्राहक नहीं बल्कि मर्चेंट चुकाएगा. सब जानते हैं मर्चेंट या दुकानदार यह पैसा ग्राहक मतलब आपसे ही वसूलेगा, कैसे? कीमत बढ़ाकर.
उन्होंने कहा कि महंगाई से जूझते लोगों को मरहम लगाने के बजाय मोदी जी उनके घाव पर नमक छिड़क रहे हैं. वो भी इसलिए क्योंकि वो फिर से एक बार अमेरिका के सामने नतमस्तक हैं. अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की zeroMDR नीति का विरोध करती रही हैं और अब मोदी जी ने सरेंडर कर दिया. US Trade Representative की 2026 की रिपोर्ट में UPI और RuPay की मुफ्त होने के लिए आलोचना की गई. आरोप लगाया गया कि इससे अमेरिकी Visa और Mastercard का नुकसान हो रहा है. आइए जानते हैं कि सुप्रिया श्रीनेत और क्याक्या कहा, क्या सवाल किए हैं.
UPI क्या है?
भारतीय संस्थानों और बैंकों द्वारा ऑनलाइन लेनदेन के लिए बनाई गई भुगतान व्यवस्था
MDR क्या है?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है जो व्यापारी डिजिटल भुगतान प्रोसेस करने के लिए बैंकों और पेमेंट प्रोवाइडर्स को देता है
नए UPI नियम क्या हैं?
व्यक्तिसेव्यापारी UPI लेनदेन पर ₹2,000 से ऊपर 0.4% MDR लगेगा, अब तक यह मुफ्त था
कितने के UPI transaction पर वसूली होगी?
- P2M UPI transactions ₹2,000 से ऊपर: 604.8 करोड़
- P2M UPI transactions ₹2,000 से ऊपर वैल्यू में: ₹66.22 लाख करोड़
सबसे बड़े लाभार्थी कौन हैं?
- PhonePe
- Google Pay
MDR रेवन्यू उनकी कमाई और वैल्यूएशन बढ़ाएगा
भारत में UPI पेमेंट ऐप्स का मार्केट शेयर क्या है?
- PhonePe: 48.9%
- Google Pay: 37.7%
- Paytm: 8.3%
- अन्य: 3.6%
- Cred: 1%
- Amazon Pay: 0.5%
UPI की दो सबसे बड़ी पेमेंट ऐप्स के मालिक कौन हैं?
- PhonePe: अमेरिका की Walmart की 72% हिस्सेदारी
- Google Pay: 100% अमेरिका के Google LLC की कंपनी
नए नियम PhonePe को कैसे प्रभावित करते हैं?
PhonePe के भारत IPO के लिए संजीवनी बूटी है यह खबर, इस IPO को मार्च 2026 में रोक दिया गया था क्योंकि फोनपे का वैल्यूएशन $10 बिलियन से नीचे गिर गया था. मतलब हिंदुस्तान के लोग जो महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे हैं वह अब अमेरिकी कंपनी के IPO के पहले उसका वैल्यूएशन बढ़ाने के लिए मजबूर किए जा रहे हैं.
अमेरिकी पेमेंट apps के पास सारे UPI लेनदेन का बड़ा हिस्सा है, साथ ही उनको भारत के spending pattern की अहम जानकारी भी मिलती है और अब भारतीयों से वसूली करके उनकी कमाई भी बढ़ने वाली है.
क्या UPI चलाने के लिए पैसे की कमी है?
नहीं, बिल्कुल नहीं. मोदी सरकार का दावा कि UPI को आर्थिक रूप से टिकाऊ रखने का यही एकमात्र रास्ता है, कोरा झूठ है. सरकार और RBI के पास व्यापारियों या उपभोक्ताओं पर शुल्क लगाए बिना UPI इकोसिस्टम को फंड करने का पर्याप्त पैसा है.
- UPI को चलाने के लिए हर साल ₹20,700 करोड़ रुपये चाहिए
- 202526 में RBI ने मोदी सरकार को surplus ₹2.87 लाख करोड़ transfer किए
- लिस्टेड बैंकों का मुनाफा: ₹4.11 लाख करोड़
- NPCI जो UPI चलाती है का surplus before tax: ₹1,888 करोड़
- RBI जो पैसा सरकार को दे रहा है, उसके महज़ 7.2% से पूरा UPI चल जाएगा
सुप्रिया ने आगे कहा कि सबसे बड़ी बात है कि यह निर्णय भी झूठ बोलकर लिया गया है.
- 6 अगस्त: मोदी सरकार के Taxation and Other Laws Amendment Bill, 2026 ने वो गारंटी हटा दी थी जो UPI लेनदेन को मुफ्त रखती थी. इसी से मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने का रास्ता खुल गया, आगे चल कर आसानी से किसी भी payments को बढ़ाया जा सकता है.
- 6 अगस्त: वित्त मंत्री ने कहा था MDR पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है.
- 10 अगस्त: वित्त मंत्री ने सदन में कहा MDR का कोई फ्रेमवर्क फाइनल नहीं किया गया है.
- 14 सितंबर: नोटिफिकेशन निकाल कर MDR चार्ज लगा दिया जाता है.
उन्होंने कहा कि UPI से वसूली का मतलब है UPI को कमज़ोर करना. साफ़ है कि प्रधानमंत्री मोदी अपने दोस्त डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में UPI को कमजोर करके डिजिटल payments में अमेरिकी कंपनियों के मुनाफे के लिए देश के ही लोगों से वसूली कर रहे हैं. इससे ज़्यादा देश विरोधी और क्या होगा? UPI की नींव मनमोहन सिंह जी की UPA सरकार ने रखी थी. इमारत भी हमने बनाई. अब बिल्डिंग पर पुताई करके उसको अमेरिका के हाथों में देने का काम मोदी सरकार कर रही है.
- 2007: Payments Law enacted
- 2008: NPCI DBT rolled out
- 2013: 7 crore Gas cylinder payments on NPCI
- 2014: Extended to 200 districts under NPCIDBT system
- 2026: मोदी सरकार ने UPI पर छठे लगाया गरीबों पर वार करके अमेरिकी कंपनियों की तिजोरी भर रहे हैं
सुप्रिया के सरकार से सवाल
- बजाय महंगाई से जूझ रहे लोगों को राहत देने के सरकार उनके ऊपर बोझ क्यों बढ़ा रही है?
- देश के युवाओं, छात्रों, गरीब, मज़दूर किसान की जेब काट कर अमेरिकी कंपनियों की जेब में पैसा क्यों भरा जा रहा है?
- अमेरिकी कंपनियों के दबाव में आप देश विरोधी फैसले क्यों ले रहे हैं?
- क्या भारत के लोगों से वसूली करके अमेरिकी कंपनियों की तिजोरियां भरी जा रही हैं?
- क्या देश के लोगों की जेब पर डाका डाल कर PhonePe के IPO का valuation बढ़ाया जा रहा है?
- UPI चलाने का खर्च सरकार और RBI क्यों नहीं उठा सकते, जबकि यह सरकार को दिए जाने वाले RBI surplus का मात्र 7.2% है
- क्या गारंटी है कि ऐसे ही मनमाने तरीके से आगे भी किसी भी पेमेंट में फेर बदल नहीं किया जाएगा?
उन्होंने कहा कि इस मंच से हमारी मांग है यह देश विरोधी फैसला तुरंत रद्द किया जाए. UPI को पहली को तरह मुफ़्त किया जाये और मोदी जी अमेरिका के आगे दंडडवत करना बंद करें.



