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​Tata Sons Dispute: टाटा ग्रुप में आर-पार की लड़ाई, बाजार में लिस्टिंग रोकने पर अड़े नोएल

Tata Group Dispute:देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट घराने के हेडक्वार्टर बॉम्बे हाउस में वर्चस्व की पूरी तरह से खुली जंग छिड़ गई है. भारत के दिग्गज बिजनेस ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के बोर्ड ने अपने मौजूदा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को फिर से नियुक्त किया है. लेकिन मेजॉरिटी शेयरहोल्डर टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस फैसले को ‘अवैध’ बता दिया है. गुरुवार को हुई एक तूफानी बोर्ड मीटिंग के बाद टाटा ग्रुप के भीतर का ये भारी मतभेद सबके सामने आ गया. एक तरफ चंद्रा की कुर्सी का सवाल है, तो दूसरी तरफ टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट होने से रोकने की नोएल टाटा की लंबी जद्दोजहद है.

​Tata Sons Dispute: टाटा ग्रुप में आर-पार की लड़ाई, बाजार में लिस्टिंग रोकने पर अड़े नोएल

चंद्रा की वापसी पर आरपार की जंग

टाटा संस 125 अरब डॉलर वाले इस विशाल बिजनेस ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है. इसकी बोर्ड मीटिंग में की वापसी का प्रस्ताव 41 के बहुमत से पास कर दिया गया. इस मीटिंग में नोएल टाटा ने अकेले इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया. इसके तुरंत बाद टाटा ट्रस्ट्स ने सार्वजनिक तौर पर बयान जारी कर दिया. ट्रस्ट ने कहा कि चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति कानूनी रूप से शून्य है. उनका तर्क है कि टाटा संस के नियमों के तहत ये फैसला मान्य नहीं है.

दरअसल टाटा संस के बोर्ड में कोई भी बड़ा फैसला लेने के लिए टाटा ट्रस्ट्स के नॉमिनी की सहमति जरूरी होती है. मौजूदा बोर्ड में ट्रस्ट के सिर्फ दो नॉमिनी हैं नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन. इन दोनों ने गुरुवार को अलगअलग दिशा में वोट किया. नोएल ने खिलाफ वोट किया, जबकि वेणु ने समर्थन किया. जब मामला टाई होने की नौबत पर आया, तो मीटिंग की अध्यक्षता कर रहे हरीश मनवानी ने कास्टिंग वोट का इस्तेमाल किया.

टाटा संस के बोर्ड का मानना है कि उनका ये फैसला कानूनी रूप से सही है. लेकिन नोएल टाटा का कहना है कि उनका नेगेटिव वोट एक वीटो की तरह काम करता है, इसलिए मेजॉरिटी का फैसला अमान्य है. टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि उन्होंने पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की कानूनी राय भी पेश की थी, जिसे बोर्ड ने रिकॉर्ड पर नहीं लिया. ट्रस्ट ने ये भी कहा कि 12 अगस्त को चंद्रशेखरन ने खुद दोबारा पद न लेने का फैसला किया था, जिसे ट्रस्ट ने स्वीकार कर लिया था.

लिस्टिंग रोकने की बड़ी जद्दोजहद

इस पूरे विवाद के पीछे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का एक बड़ा फैसला भी है. हाल ही में आरबीआई ने टाटा संस की उस अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें कंपनी ने प्राइवेट बने रहने की मांग की थी. नियम के मुताबिक एक तय साइज के शैडो बैंकों को शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी है. टाटा संस का बोर्ड आरबीआई की गाइडलाइंस का पालन करते हुए लिस्टिंग की तरफ कदम बढ़ाना चाहता है.

नोएल टाटा का नजरिया इस पर बिल्कुल अलग है. उनका मानना है कि कंपनी को लिस्ट कराने की कोई मजबूरी नहीं है. उनका सुझाव है कि आरबीआई के नियमों का पालन करने के लिए कुछ अन्य स्ट्रक्चरल विकल्प तलाशे जा सकते हैं, जिससे टाटा संस को प्राइवेट रखा जा सके. मार्च 2024 में बोर्ड ने अनलिस्टेड रहने का जो फैसला किया था, उसे अभी तक औपचारिक तौर पर रद्द नहीं किया गया है. नोएल ने आरबीआई के फैसले को चुनौती देने के लिए कुछ और समय मांगा है. उन्होंने कहा है कि अगर लिस्टिंग जरूरी भी है, तो इसके लिए सितंबर 2029 तक का वक्त मिलना चाहिए.

कानूनी चुनौती से लेकर शेयरों की खरीद तक

कानूनी जानकारों का मानना है कि कंपनी एक्ट के तहत किसी नॉमिनी को चेयरमैन की नियुक्ति के पक्ष में वोट करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता. कॉर्पोरेट वकील रुचि खतलावाला के मुताबिक, अगर टाटा संस के नियमों में वोटिंग की कोई खास शर्त अनिवार्य है, तो उसे पूरा न करने पर प्रस्ताव को चुनौती दी जा सकती है. ऐसे में सीधे ‘अवैध’ शब्द का इस्तेमाल जल्दबाजी हो सकता है, लेकिन इस फैसले को कानूनी चुनौती जरूर मिलेगी.

अब सबकी निगाहें टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग पर टिक गई हैं. चेयरमैन बने रहने के लिए चंद्रशेखरन को एजीएम में डायरेक्टर के तौर पर दोबारा नियुक्त होना पड़ेगा. यहां असली पावर टाटा ट्रस्ट्स के पास है. फिलहाल सर रतन टाटा ट्रस्ट को फैसले लेने से रोका गया है, जिसकी वजह से कोरम पूरा न होने पर एजीएम टाल दी गई है. इसे 31 दिसंबर तक होना जरूरी है.

इसके अलावा नोएल टाटा ने शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप की हिस्सेदारी खरीदने का एक विस्तृत प्रस्ताव भी रखा है. स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट्स कॉर्पोरेशन, सायरस इन्वेस्टमेंट्स के पास मौजूद हिस्सेदारी के बदले कम से कम 25,000 करोड़ रुपये की बात कही गई है. इस प्रस्ताव में 18 महीने के भीतर दो किश्तों में बायआउट की योजना है. इसके लिए एनसीएलटी के जरिए सिलेक्टिव कैपिटल रिडक्शन का तरीका अपनाया जा सकता है. नोएल ने सुझाव दिया है कि इसकी फंडिंग इंटरनल कैश फ्लो, लिस्टेड शेयरों की बिक्री, नए बिजनेस में निवेशकों को लाने से की जा सकती है.

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