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​आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार : यूपी में फिर पोस्टर वार

​आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार :  यूपी में फिर पोस्टर वार

 लखनऊ ,अमृत विचार:  विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में सियासी पोस्टर वार फिर तेज हो गया है। सोमवार को लखनऊ समेत कई शहरों में समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को निशाना बनाते हुए पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए। इनमें पूर्व मंत्री आजम खान, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरों के साथ लिखा गया ‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार’। एक अन्य नारे में अखिलेश यादव को घेरते हुए ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश’ लिखा गया है।

पोस्टर किस संगठन या व्यक्ति की ओर से लगाए गए, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लखनऊ के अलावा उन्नाव, इटावा, सीतापुर, बरेली, मेरठ, आजमगढ़ और गाजीपुर समेत कई जिलों में पोस्टर सामने आए हैं। पोस्टरों में सपा सरकार के कार्यकाल की कानूनव्यवस्था और कथित माफिया प्रभाव को मुद्दा बनाया गया है। पोस्टरों में कुछ नामों के साथ अलगअलग आपराधिक घटनाओं और आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। मसलन अतीक को अपहरण, मुकीम काला को कैराना पलायन और संजीव जीवा को 1997 में पूर्व मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या से जोड़ते हुए दावे किए गए हैं। हालांकि भाजपा प्रवक्ता हीरो वाजपेयी ने पोस्टर लगाने में भाजपा संलिप्तता से इंकार किया। कहा कि यह नाराज जनता की प्रतिक्रिया हो सकती है।

‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ से सपा को घेरने की कोशिश

पोस्टर अभियान में ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ का नारा भी इस्तेमाल किया गया है। पोस्टरों में अवध, पूर्वांचल, पश्चिमी यूपी, रुहेलखंड, ब्रज और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों के लिए अलगअलग नामों की सूची दी गई है। इनमें अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, आजम खान, याकूब कुरैशी, अनिल दुजाना, डीपी यादव, संजीव जीवा, मुकीम काला, उमाकांत यादव, रमाकांत यादव समेत कई नाम शामिल किए गए हैं। इन नामों को पोस्टर में सपा शासनकाल के कथित माफिया प्रभाव से जोड़कर पेश किया गया है।

चुनाव से पहले ‘माफिया’ का मुद्दा फिर केंद्र में

पोस्टर वार के जरिए सपा के शासनकाल की कानूनव्यवस्था और अपराध से जुड़े पुराने मुद्दों को चुनावी बहस में फिर सामने लाने की कोशिश दिखाई दे रही है। राजनीतिक रूप से यह वही मुद्दा है, जिसके सहारे भाजपा और उसके नेता पहले भी सपा सरकार पर हमला करते रहे हैं। दूसरी ओर, मौजूदा पोस्टर अभियान की जिम्मेदारी किसी दल या संगठन ने सार्वजनिक रूप से नहीं ली है। ऐसे में पोस्टरों में लगाए गए राजनीतिक आरोपों और उनके पीछे की जिम्मेदारी को अलगअलग देखना होगा।

गोंडा में सपाइयों ने फाड़ा, कई जगह प्रशासन ने हटाए 

गोंडा में ऐसे पोस्टर सामने आने के बाद सपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें फाड़ दिया। अंबेडकरनगर में भी विवादित होर्डिंग लगाए जाने और बाद में उन्हें हटाए जाने की सूचना है। अयोध्या में राम मंदिर जाने वाले मार्ग पर लगे एक पोस्टर को प्रशासन ने हटा  दिया है ।

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