
आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में मंगलवार को हुई वारदात के बाद कई घंटे तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। पुलिस के मुताबिक, अरविंद कुमार ने अपनी पत्नी बबिता सिंह और अनुष्ठान में शामिल दो पुजारियों अखिलेश मिश्रा और महेंद्र पाठक की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद वह अपने तीन बच्चों के साथ घर के एक कमरे में बंद हो गया।
आरोपी के पास लाइसेंसी हथियार था और वह बच्चों को भी गोली मारने की धमकी दे रहा था। पुलिस और परिजन करीब सात घंटे तक उसे आत्मसमर्पण के लिए समझाते रहे। इसी दौरान कमरे के भीतर से गोली चलने की आवाज आई। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस टीम ने तत्काल कमरे में प्रवेश करने का फैसला लिया।
दरवाजा तोड़कर कमरे में दाखिल हुई पुलिस
एसपी डॉ. अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह और आरक्षी प्रदीप समेत पुलिस टीम ने कमरे में प्रवेश करने के लिए दरवाजा तोड़ा। पुलिस के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान स्टन ग्रेनेड और टियर गैस ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया।
पुलिस टीम के अंदर पहुंचते ही अरविंद ने फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार, उसने चारपांच राउंड गोलियां चलाईं। इसके बाद पुलिस ने बच्चों की सुरक्षा और आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की। इसमें अरविंद घायल हो गया।
आरोपी की मौत, घायल बेटे ने भी दम तोड़ा
पुलिस टीम ने अरविंद और गोली लगने से घायल उसके नौ वर्षीय बेटे शौर्य सिंह को अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने अरविंद को मृत घोषित कर दिया। वहीं, शौर्य को लाइफ लाइन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी भी मौत हो गई।
पुलिस के मुताबिक, कमरे के अंदर 10 वर्षीय बेटी परी और छह माह की बच्ची भी मौजूद थीं। दोनों को पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बड़ी बेटी की कोहनी के पास मामूली खरोंच आई है।
पूजा के दौरान विवाद के बाद शुरू हुआ घटनाक्रम
एसपी डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, मंगलवार को भाई की आत्मा की शांति के लिए घर में धार्मिक अनुष्ठान चल रहा था। इसी दौरान किसी बात को लेकर विवाद हुआ। पुलिस के मुताबिक, इसके बाद अरविंद ने अपनी पत्नी बबिता सिंह और अनुष्ठान में शामिल अखिलेश मिश्रा तथा महेंद्र पाठक को गोली मार दी।
परिजनों के अनुसार, अरविंद की मानसिक स्थिति ठीक नहीं रहती थी। परिवार की ओर से भूतप्रेत की बाधा दूर करने के लिए घर में पांच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान कराया जा रहा था। घटना के दिन अनुष्ठान का चौथा दिन था।
मौके पर कमरा खुलवाने का प्रयास करती पुलिस
सात घंटे तक पुलिस करती रही आत्मसमर्पण की कोशिश
तीन लोगों की हत्या के बाद अरविंद बच्चों को लेकर कमरे में बंद हो गया था। पुलिस और परिजन लगातार उससे बातचीत कर आत्मसमर्पण करने तथा बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की अपील करते रहे।
करीब सात घंटे बाद कमरे के भीतर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। इसके बाद पुलिस ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल कार्रवाई की और कमरे में प्रवेश किया। इसी दौरान आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी, जिसके बाद जवाबी फायरिंग में वह घायल हुआ।
एडीजी और डीआईजी भी मौके पर पहुंचे
घटना के बाद पुलिस ने सभी मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं।
अपर पुलिस महानिदेशक वाराणसी जोन नवीन अरोड़ा और डीआईजी आजमगढ़ परिक्षेत्र सुनील कुमार सिंह भी कई घंटे घटनास्थल पर मौजूद रहे। दोनों अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पुलिस टीम को आवश्यक दिशानिर्देश दिए।
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