
लखनऊ, अमृत विचार। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में अपराध की वैज्ञानिक जांच को और मजबूत करने की तैयारी है। इसके तहत पुलिस के ‘स्पेशल 32’ अधिकारी तैयार किए जा रहे हैं, जो क्राइम सीन मैनेजमेंट और फॉरेंसिक साइंस में विशेषज्ञता हासिल करेंगे। छह बैच में 100100 पुलिस अधिकारियों को 40 दिन का प्रशिक्षण देने के बाद बेहतर प्रदर्शन करने वाले 32 अधिकारियों का चयन किया गया है। इन्हें अब उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस , लखनऊ में मास्टर ट्रेनिंग दी जा रही है।
क्राइम सीन एक्सपर्टीज से सुलझाएंगे हर केस
प्रशिक्षण का फोकस घटनास्थल को सुरक्षित रखने, साक्ष्यों की पहचान, वैज्ञानिक तरीके से उनके संग्रह और विवेचना में उपयोग पर है। अधिकारियों को क्राइम सीन नोट्स तैयार करने, फोटोग्राफीवीडियोग्राफी, तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया तथा फिंगरप्रिंट और रक्त के नमूनों जैसे साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। कृत्रिम घटनास्थल तैयार कर अधिकारियों की व्यावहारिक दक्षता भी परखी जाएगी।
दी जा रही है स्पेशल ट्रेनिंग
यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी के अनुसार छह बैच में 600 पुलिस अधिकारियों को पहले ही 40 दिन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इन अधिकारियों ने अपनेअपने जिलों में अन्य पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित किया। अब प्रशिक्षण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 32 अधिकारियों को विशेषज्ञ स्तर की ट्रेनिंग दी जा रही है।
हैंड्सऑन सेशन और एक्सपीरिएंशियल लर्निंग पर जोर
इसमें विशेषज्ञों के व्याख्यान के साथ हैंड्सऑन सेशन और एक्सपीरिएंशियल लर्निंग पर जोर है। डॉ. गोस्वामी ने कहा कि आपराधिक जांच में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए क्राइम सीन मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान जरूरी है। ‘स्पेशल 32’ की विशेषज्ञता का उपयोग आगे जिलों में पुलिसकर्मियों की क्षमता बढ़ाने में किया जाएगा। इससे प्रदेश के 75 जिलों में घटनास्थल प्रबंधन और वैज्ञानिक विवेचना को मजबूत करने की दिशा में प्रशिक्षण व्यवस्था को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
दिनरात और अलगअलग परिस्थितियों में क्राइम सीन का अभ्यास
मास्टर ट्रेनिंग में दिन और रात के अलगअलग समय तथा विभिन्न स्थानों पर तैयार किए गए क्राइम सीन के माध्यम से अधिकारियों की दक्षता परखी जाएगी। उन्हें उन परिस्थितियों से निपटने के लिए भी तैयार किया जा रहा है, जहां साक्ष्य छिपाने या नष्ट करने का प्रयास हो सकता है। उद्देश्य घटनास्थल से मिले सुरागों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए विवेचना को मजबूत आधार देना है।


