अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एक अहम अपडेट सामने आया है. कोर्ट ने इस मामले में दायर चार्जशीट पर संज्ञान लिया है. आरोपियों की ओर से पेश हो रहे ‘लीगल एड डिफेंस काउंसिल’ के वकील कुल शेखर सिंह ने चार्जशीट और मामले की कानूनी स्थिति के बारे में जरूरी जानकारी दी.

वकील कुल शेखर सिंह के अनुसार, जांच अधिकारी ने 59 पन्नों की मुख्य चार्जशीट दायर की. हालांकि, इसके साथ जुड़े दस्तावेज़ों की संख्या बहुत ज्यादा है, चार्जशीट के समर्थन में कोर्ट में लगभग 36,039 पन्नों के दस्तावेज और करीब 101 सीडी जमा की गईं. पुलिस ने इस मामले में 133 लोगों को गवाह बनाया है. वकील ने बताया कि पुलिस ने चार्जशीट में कुछ आरोपों में बदलाव किया है. आरोपियों के खिलाफ धारा 305 और 306 पूरी तरह से हटा दी गई हैं। इसके अलावा, आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के खिलाफ पहले लगाई गई धारा 317 को भी हटा दिया गया है.
बरकरार रखे गए आरोप
वकील कुल शेखर सिंह अनुसार, धारा 317 अन्य आरोपियों पर लागू रहेगी, क्योंकि पुलिस ने उनसे बरामदगी का दावा किया है. चार्जशीट में धारा 316 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 , 13 और 13 को बरकरार रखा गया है. वकील कुल शेखर सिंह ने इन आरोपों को चुनौती देते हुए इन्हें जबरदस्ती लगाए गए आरोप बताया है.
गवाहों की सूची पर कड़ी आपत्ति जताई
उनका तर्क है कि उनके मुवक्किल सरकारी कर्मचारियों की श्रेणी में नहीं आते हैं. सुनवाई के दौरान वकील ने गवाहों की सूची पर कड़ी आपत्ति जताई. वकील का आरोप है कि जांच अधिकारी ने इस मामले में काफी पक्षपात किया है. उनका दावा है कि पुलिस ने ऐसे लोगों को गवाह बनाया है जिन्हें असल में आरोपी बनाया जाना चाहिए था.
राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े चार लोग गवाह
वकील के अनुसार, गवाहों की सूची में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े चार लोग शामिल हैं. इस मामले के मुख्य आरोपी टीनू यादव और सुभाष की जमानत याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई होनी थी. लेकिन, कोर्ट परिसर में वकीलों के जबरदस्त विरोध और गुस्से के कारण कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी.
अब 24 सितंबर को सुनवाई करेगा
अब इस मामले में 24 सितंबर को सुनवाई होगी. इस तारीख पर सबकी नजरें टिकी हैं. बाकी छह आरोपियों के बारे में वकील ने साफ किया कि कोर्ट ने पहले ही उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं. हालांकि, वह पिछला खारिज करने का आदेश तब आया था जब मामले में धाराएं 305 और 306 शामिल थीं. अब जब नई चार्जशीट से ये धाराएं हटा दी गई हैं, तो बचाव पक्ष हालात में बदलाव का हवाला देते हुए दूसरी जमानत याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहा है. इसके बाद, जरूरत पड़ने पर हाई कोर्ट का भी रुख किया जा सकता है.



