
असंतुलित खान-पान, पानी की कमी और सुस्त जीवनशैली के कारण आज कब्ज (Constipation) एक बेहद आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या बन चुकी है। पेट साफ न होने पर दिनभर भारीपन, आलस और चिड़चिड़ापन बना रहता है। लोग अक्सर इससे राहत पाने के लिए तुरंत दवाइयों या चूर्ण का सहारा लेते हैं, लेकिन लंबे समय तक इसका सेवन आंतों को नुकसान पहुंचा सकता है। कब्ज एक आम समस्या है, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। आमतौर पर जब मल त्याग सामान्य से कम हो जाए, मल बहुत सख्त हो या मल त्याग करते समय दर्द और ज्यादा जोर लगाना पड़े, तो इसे कब्ज माना जाता है। हर व्यक्ति की टॉयलेट की आदत अलग होती है, लेकिन सामान्य रूप से दिन में तीन बार से लेकर हफ्ते में तीन बार तक मल त्याग होने को नॉर्मल माना जाता है।
हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड और एम्स से प्रशिक्षित गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, डॉ. सौरव सेठी ने बताया प्रकृति में कई ऐसे खाद्य पदार्थ मौजूद हैं जो दवाइयों के बजाय एकदम सुरक्षित और प्राकृतिक लैग्जेटिव की तरह काम करते हैं। आपकी रोजमर्रा की कुछ आदते आपके कब्ज का कारण बन सकती हैं इनमें सुधार करना जरूरी है। रोजाना डाइट में कम फाइबर का सेवन करना, पर्याप्त फल-सब्जियां नहीं खाना, शरीर में पानी की कमी और टॉयलेट जाने की इच्छा को बार-बार रोकना कब्ज के आम कारणों में शामिल हैं। हालांकि कई बार कब्ज का कोई स्पष्ट कारण नहीं पता चलता। डॉक्टर सौरव सेठी ने बताया अगर आप लाइफस्टाइल में बदलाव करें, कुछ नेचुरल चीजों का सेवन करें तो आसानी से कब्ज का इलाज कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि कब्ज का नेचुरल इलाज क्या है।
कब्ज में राहत के लिए 4 प्राकृतिक ड्रिंक
प्रून जूस का करें सेवन
द अमेरिकी जर्नल ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और PubMed Central में प्रकाशित क्लिनिकल ट्रायल्स के अनुसार, प्रून जूस क्रोनिक कब्ज के इलाज में काफी प्रभावी है। प्रून यानी सूखे बेर से बने प्रून जूस से है जिसमें सॉर्बिटोल नाम का नेचुरल शुगर अल्कोहल पाया जाता है। यह हल्के लैक्सेटिव की तरह काम कर सकता है और मल त्याग में मदद कर सकता है। हालांकि, ज्यादा मात्रा में लेने पर कुछ लोगों को गैस और पेट फूलने की समस्या हो सकती है। एक्सपर्ट ने बताया प्रून जूस आंतों में पानी बनाए रखने में मदद कर सकता है और मल को नरम करने में मददगार हो सकता है। इसलिए प्रून जूस का इस्तेमाल कब्ज में राहत के लिए किया जाता है।
नींबू पानी पिएं
गुनगुने पानी में ताजा नींबू का रस मिलाकर पीना पाचन को बढ़ावा देने और कब्ज में राहत देने में बेहद असरदार साबित होता है। ये घरेलू उपाय सुबह के समय बेहद असरदार साबित होता है। खाली पेट गुनगुने पानी में नींबू का सेवन बॉडी को हाइड्रेट करता है और बॉडी को हेल्दी रखता है। मेडिकल स्टडीज और फिजियोलॉजी के अनुसार, नींबू पानी का असर मुख्य रूप से गैस्ट्रोकोलिक रिफ्लेक्स और हाइड्रेशन पर आधारित है। सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने से पेट और आंतों की मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं और कब्ज से राहत मिलती है।
अदरक की चाय पिएं
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी रिसर्च और PubMed में दर्ज अध्ययनों के अनुसार, अदरक में प्रोकिनेटिक (Prokinetic) गुण होते हैं जो गैस्ट्रिक खाली होने की प्रक्रिया को तेज करते हैं। अदरक में पाए जाने वाले सक्रिय बायोएक्टिव यौगिक जिंजरोल और शोगाओल (Gingerol & Shogaol) आंतों की चिकनी मांसपेशियों के संकुचन को बढ़ाते हैं। अदरक की चाय कब्ज में मददगार साबित होती है। अदरक पाचन तंत्र को सक्रिय करने और मल त्याग को बढ़ावा देने में मददगार साबित होती है।
एलोवेरा जूस पिएं
एलोवेरा के लैक्सेटिव गुणों पर कई क्लिनिकल स्टडीज मौजूद हैं। यूएस एफडीए (FDA) ने भी इसको नेचुरल लैक्सेटिव बताया है। एलोवेरा में कुछ ऐसे यौगिक पाए जाते हैं जो पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। थोड़ी मात्रा में एलोवेरा जूस का सेवन पानी के साथ करने से फायदा होता है। हालांकि, एलोवेरा जूस हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता, इसलिए इसका नियमित या अधिक मात्रा में सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
इन तरीकों से करें कब्ज को दूर
टॉयलेट सीट पर पैर ऊंचे रखें
कब्ज में मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर लगाने से बचने के लिए टॉयलेट पर बैठते समय पैरों के नीचे छोटा स्टूल रख लें। इससे घुटने कूल्हों से थोड़ा ऊपर आ जाते हैं और मलाशय का कोण सीधा होने में मदद मिल सकती है। इससे मल को डिस्चार्ज करने में मदद मिलती है।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
मल को सॉफ्ट रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना जरूरी है। रोजाना करीब आठ गिलास पानी पीना आपके पाचन के दुरुस्त रखने के लिए जरूरी है। हालांकि, पानी की जरूरत हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। इसके साथ ही डाइट में फाइबर की मात्रा बढ़ाना भी मददगार हो सकता है।
डाइट में फाइबर बढ़ाएं
फाइबर मल में पानी बनाए रखने में मदद करता है, जिससे मल सॉफ्ट हो सकता है और उसे बाहर निकालना आसान हो सकता है। इसके लिए डाइट में फल, सब्जियां और ओट्स जैसे फाइबर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
रोजाना शारीरिक गतिविधि करें
नियमित रूप से पैदल चलना और एक्सरसाइज करना भी कब्ज से राहत पाने में मदद कर सकता है। शारीरिक गतिविधि आंतों की गति को बढ़ाने में मदद करती है। जब मल बड़ी आंत में ज्यादा समय तक रुका रहता है, तो उसमें से पानी अधिक अवशोषित हो सकता है और मल सूखकर सख्त हो सकता है।
जरूरत पड़ने पर लैक्सेटिव का करें इस्तेमाल
अगर खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव से कब्ज में पर्याप्त राहत नहीं मिलती, तो डॉक्टर की सलाह से लैक्सेटिव का इस्तेमाल किया जा सकता है। बाजार में अलग-अलग तरह के लैक्सेटिव उपलब्ध हैं, इसलिए इन्हें अपनी मर्जी से लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। कुछ लैक्सेटिव केवल थोड़े समय के लिए इस्तेमाल किए जाने चाहिए।
बल्क-फॉर्मिंग लैक्सेटिव
बल्क-फॉर्मिंग लैक्सेटिव डाइट में फाइबर बढ़ाने की तरह काम करते हैं। ये मल में पानी बनाए रखने में मदद करते हैं, जिससे मल को बाहर निकालना आसान हो सकता है। इन्हें असर करने में आमतौर पर 2 से 3 दिन लग सकते हैं। शुरुआत में इससे गैस और पेट फूलने की समस्या हो सकती है, जो समय के साथ कम हो सकती है।
ऑस्मोटिक लैक्सेटिव
ऑस्मोटिक लैक्सेटिव आंतों में पानी बनाए रखने में मदद करते हैं, जिससे मल नरम हो जाता है और उसे बाहर निकालना आसान होता है। इन्हें भी असर करने में कुछ दिन लग सकते हैं। इनका इस्तेमाल करते समय पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना जरूरी होता है।
स्टीमुलेंट लैक्सेटिव
सेन्ना जैसे स्टीमुलेंट लैक्सेटिव आंतों की गतिविधि को बढ़ाकर मल त्याग में मदद करते हैं। इनके कारण आंतों में संकुचन बढ़ता है, जिससे कुछ लोगों को पेट में ऐंठन या क्रैंप हो सकते हैं। इनका असर कुछ घंटों में हो सकता है।
स्टूल सॉफ्टनर
डॉक्यूसेट सोडियम जैसे स्टूल सॉफ्टनर मल में पानी की मात्रा बढ़ाने में मदद करते हैं। इससे सख्त और सूखे मल को नरम करके बाहर निकालना आसान हो सकता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। कब्ज के घरेलू उपाय या लैक्सेटिव हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते। लगातार या बार-बार कब्ज, तेज पेट दर्द, उल्टी, मल में खून या अचानक वजन कम होने जैसे लक्षण हों तो डॉक्टर से सलाह लें। किसी भी लैक्सेटिव या एलोवेरा जूस का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना न करें।



