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किडनी खराब होने से पहले: शरीर देता है ये संकेत, इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

किडनी खराब होने से पहले: शरीर देता है ये संकेत, इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

किडनी हमारे शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक है। इसका मुख्य काम खून से अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त तरल पदार्थ को फिल्टर करके बाहर निकालना है। समस्या यह है कि किडनी की बीमारी शुरुआती दौर में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ सकती है। इसी वजह से कई लोगों को बीमारी का पता तब चलता है, जब किडनी की कार्यक्षमता काफी प्रभावित हो चुकी होती है।

हालांकि, शरीर में कुछ ऐसे बदलाव हो सकते हैं, जिन पर समय रहते ध्यान देना जरूरी है। खासकर पेशाब में बदलाव, पैरों या चेहरे पर सूजन और लगातार कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

शुरुआत में दिख सकते हैं ये संकेत

किडनी की समस्या के शुरुआती चरण में लक्षण बहुत हल्के हो सकते हैं। कुछ लोगों को रात में बार-बार पेशाब आने, सामान्य से ज्यादा कमजोरी या भूख कम लगने जैसी परेशानी हो सकती है।

लेकिन ये लक्षण केवल किडनी की बीमारी के कारण ही हों, यह जरूरी नहीं है। इसलिए सिर्फ लक्षणों के आधार पर किडनी की बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।

बीमारी बढ़ने पर शरीर में क्या बदलाव होते हैं?

जब किडनी की कार्यक्षमता ज्यादा प्रभावित होने लगती है तो कुछ लक्षण अधिक स्पष्ट हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं:

  • पैरों और टखनों में सूजन
  • चेहरे या आंखों के आसपास सूजन
  • पेशाब की मात्रा कम होना
  • भूख कम लगना
  • उल्टी या मतली
  • वजन कम होना
  • लगातार कमजोरी और थकान

गंभीर अवस्था में शरीर में विषैले पदार्थ बढ़ने के कारण भ्रम, बेहोशी या दौरे जैसी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं।

चेहरे और पैरों में सूजन क्यों आती है?

किडनी ठीक से काम नहीं करती तो शरीर में अतिरिक्त पानी और नमक जमा होने लग सकता है। इसका असर चेहरे, आंखों के आसपास और पैरों में सूजन के रूप में दिखाई दे सकता है।

दिनभर खड़े रहने या चलने से पैरों में सूजन ज्यादा नजर आ सकती है, जबकि लेटने या आराम करने के बाद चेहरे और आंखों के आसपास सूजन दिखाई दे सकती है। कुछ गंभीर मामलों में पेट में भी तरल पदार्थ जमा हो सकता है।

किडनी की बीमारी बिना लक्षण के भी हो सकती है

किडनी की बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में कई लोगों को कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती। इसका मतलब यह है कि केवल शरीर में लक्षण दिखाई देने का इंतजार करना पर्याप्त नहीं है।

डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, धूम्रपान की आदत या परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास रखने वाले लोगों को नियमित जांच पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

किडनी की जांच के लिए कौन से टेस्ट होते हैं?

किडनी की कार्यक्षमता जांचने के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार कई टेस्ट करा सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं:

सीरम क्रिएटिनिन: इससे किडनी की फिल्टर करने की क्षमता का अनुमान लगाने में मदद मिलती है।

eGFR: क्रिएटिनिन समेत अन्य जानकारी के आधार पर किडनी की फिल्ट्रेशन क्षमता का अनुमान लगाया जाता है।

UACR: पेशाब में एल्ब्यूमिन यानी प्रोटीन के रिसाव का पता लगाने में मदद करता है। किडनी की बीमारी के शुरुआती संकेतों में यह जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

अल्ट्रासाउंड: इससे किडनी के आकार, पथरी, रुकावट और कुछ अन्य संरचनात्मक समस्याओं की जानकारी मिल सकती है।

डायबिटीज और हाई BP से बढ़ सकता है किडनी का खतरा

डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। लंबे समय तक ब्लड शुगर या ब्लड प्रेशर नियंत्रित न रहने पर किडनी की रक्त वाहिकाओं और फिल्टरिंग सिस्टम पर असर पड़ सकता है।

इसलिए डायबिटीज और हाई BP वाले लोगों के लिए नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इन दोनों को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है।

क्या BP की दवा किडनी के लिए नुकसानदायक है?

आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना किडनी की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। कुछ BP की दवाएं पेशाब में प्रोटीन के रिसाव को कम करने और किडनी को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद कर सकती हैं।

हालांकि, दवा का चुनाव व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार किया जाता है। इसलिए BP की दवा अपनी मर्जी से बंद या शुरू नहीं करनी चाहिए।

किडनी मरीजों को नमक पर देना चाहिए ध्यान

किडनी की बीमारी और हाई BP वाले लोगों को नमक की मात्रा को लेकर सावधानी बरतनी पड़ सकती है। ज्यादा नमक शरीर में पानी जमा होने और ब्लड प्रेशर बढ़ने की समस्या को बढ़ा सकता है।

पापड़, नमकीन, पैकेज्ड स्नैक्स, अचार और ज्यादा नमक वाली चटनी जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना उपयोगी हो सकता है। नमक की सही मात्रा व्यक्ति की बीमारी और डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय की जानी चाहिए।

क्या किडनी मरीज दूध पी सकते हैं?

किडनी की बीमारी होने पर हर व्यक्ति के लिए दूध पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है। दूध में कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व होते हैं, लेकिन किडनी की बीमारी बढ़ने पर प्रोटीन, फास्फोरस और अन्य पोषक तत्वों की मात्रा को लेकर विशेष डाइट की जरूरत पड़ सकती है।

इसलिए दूध और अन्य डेयरी उत्पादों की मात्रा मरीज की किडनी की स्थिति और पूरी डाइट के आधार पर तय करना बेहतर होता है।

CKD की कौन सी स्टेज गंभीर होती है?

क्रॉनिक किडनी डिजीज यानी CKD को आमतौर पर पांच स्टेज में बांटा जाता है। स्टेज 5 में किडनी की कार्यक्षमता बहुत कम हो जाती है और eGFR आमतौर पर 15 से नीचे होता है।

हालांकि, केवल eGFR देखकर यह तय नहीं किया जाता कि मरीज को तुरंत डायलिसिस की जरूरत है या नहीं। शरीर में पानी जमा होना, पोटैशियम का बढ़ना, लगातार उल्टी, गंभीर कमजोरी और अन्य लक्षणों को भी ध्यान में रखा जाता है।

डायलिसिस कब पड़ सकती है जरूरत?

जब किडनी शरीर से अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त तरल पदार्थ पर्याप्त रूप से बाहर नहीं निकाल पाती, तब कुछ मरीजों में डायलिसिस की जरूरत पड़ सकती है।

डायलिसिस शुरू करने का फैसला केवल एक टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर नहीं होता। डॉक्टर मरीज के लक्षण, किडनी की कार्यक्षमता, शरीर में तरल पदार्थ, इलेक्ट्रोलाइट्स और पूरी स्वास्थ्य स्थिति को देखकर निर्णय लेते हैं।

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

किडनी की सेहत बनाए रखने के लिए इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है:

  • ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें।
  • नियमित शारीरिक गतिविधि करें।
  • धूम्रपान से बचें।
  • शराब का सेवन करते हैं तो इसे सीमित रखें।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार दर्द की दवाएं या अन्य OTC दवाएं न लें।
  • पर्याप्त पानी पिएं, लेकिन किडनी की बीमारी होने पर तरल पदार्थ की मात्रा डॉक्टर की सलाह से तय करें।
  • जोखिम वाले लोगों को नियमित किडनी जांच करानी चाहिए।

किन लोगों को नियमित किडनी जांच करानी चाहिए?

डायबिटीज, हाई BP, मोटापा, धूम्रपान की आदत या परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास रखने वाले लोगों को नियमित जांच पर ध्यान देना चाहिए। अधिक उम्र के लोगों में भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार किडनी की जांच कराना उपयोगी हो सकता है।

किडनी की बीमारी में सबसे महत्वपूर्ण बात है कि इसे केवल लक्षणों के आधार पर पहचानने की कोशिश न करें। अगर आप किसी जोखिम वाली श्रेणी में आते हैं या शरीर में लगातार असामान्य बदलाव दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जांच कराएं।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। किडनी की बीमारी का इलाज या दवा शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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