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​झकरकटी अड्डा बस पहुंच तो जाएगी, निकलने की कोई गारंटी नहीं क्रासर

​झकरकटी अड्डा बस पहुंच तो जाएगी, निकलने की कोई गारंटी नहीं  क्रासर

 कानपुर,अमृत विचार: शहीद मेजर सलमान खान अंतर्राज्यीय झकरकटी बस अड्डे के अंदर बसों के प्रवेश करने में ज्यादा दिक्कत नहीं है लेकिन बस अड्डा के बाहर निकलने की कोई गारंटी नहीं है क्योंकि कई फिट ऊंचा फैले कीचड़ के अंदर बस निकल पाएगी या कीचड़ में ही बस फंस जाएगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है। अड्डे की इस दुर्दशा का आलम यह है कि पूछताछ काउंटर के ठीक सामने का पूरा मैदान किसी तालाब में तब्दील हो चुका है। मुख्य निकास द्वार पर कई फीट तक फैले कीचड़ में आए दिन बसें धंस रही हैं, जिसके चलते अधिकारियों को मजबूरी में करीब 300 बसों को वहीं रोकना पड़ा। इस गंभीर समस्या के चलते जहां एक ओर चालकों और परिचालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर समय पर गंतव्य तक न पहुंच पाने के कारण यात्रियों की मुसीबतें भी लगातार बढ़ती जा रही हैं।

अधिकारियों को कई पत्र लिखे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई

झकरकटी बस अड्डा के प्रवेश द्वार पर प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी आदि क्षेत्रों की बसें कब्जा किये रहती हैं जिससे लंबी दूरी की आने वाली बसों को बस अड्डा के अंदर से निकलने के लिए पीछे से गेट दिया गया है। ये बसें पुल के नीचे से होते हुए टाटमिल की ओर निकलती हैं लेकिन पुल के पास ही रेल अभियंता कार्यालय के गेट तक कीचड़ भरा हुआ है जिनके अंदर होकर बसों को निकलना पड़ रहा है। इस कीचड़ में फंसकर कई बसों का आगे का भाग क्षतिग्रस्त हो चुका है। इस संबंध में तत्कालीन सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक पंकज तिवारी ने अधिकारियों को कई पत्र लिखे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई और पिछले एक साल से बसों के लिए ये रास्ता मुसीबत बना हुआ है।

रिपोर्ट: अर्पित शुक्ल 

 

 

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