
लखनऊ, अमृत विचार। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी का निधन हो गया है। उन्होंने लखनऊ स्थित पीजीआई में 74 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से समाजवादी पार्टी और राजनीतिक जगत में शोक की लहर है। रामगोविंद चौधरी समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे। बलिया की चिलकहर व बांसडीह विधानसभा सीटों का प्रतिनिधित्व करने वाले रामगोविंद आठ बार विधानसभा के सदस्य रहे। वे मुलायम सिंह यादव सरकार में मंत्री रहने के अलावा अखिलेश यादव की सरकार में भी मंत्री रहे। 20 मार्च 2017 में उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया और मई 2019 तक नेता प्रतिपक्ष रहें। रामगोविंद चौधरी के निधन की खबर सामने आने के बाद सपा नेताओं और उनके समर्थकों में शोक की लहर है।
वह 2017 से 2022 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे थे। लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने प्रदेश सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। रामगोविंद चौधरी के निधन की सूचना सामने आने के बाद पार्टी नेताओं और समर्थकों में शोक की लहर है।
सपा के शुरुआती दौर से जुड़े प्रमुख नेताओं में रहे शुमार
रामगोविंद चौधरी समाजवादी पार्टी के शुरुआती दौर से जुड़े प्रमुख नेताओं में रहे। लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने पार्टी और उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई अहम भूमिकाएं निभाईं। अपने बेबाक तेवर और स्पष्ट राजनीतिक रुख के लिए वह अलग पहचान रखते थे। अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ समय से उनका स्वास्थ्य खराब चल रहा था और लखनऊ स्थित पीजीआई में उनका उपचार किया जा रहा था। उपचार के दौरान शुक्रवार को उनका निधन हो गया। उनके निधन के साथ समाजवादी पार्टी ने अपने एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता को खो दिया।
रामगोविंद चौधरी: राजनीतिक सफर की खास बातें
- 8 बार विधायक रहे रामगोविंद चौधरी उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए आठ बार चुने गए।
- मंत्री की जिम्मेदारी संभाली समाजवादी पार्टी की सरकार में उन्होंने मंत्री पद भी संभाला।
- जेपी के साथ किया काम राजनीतिक जीवन के शुरुआती दौर में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के साथ काम किया।
- चंद्रशेखर के साथ भी जुड़े देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के साथ भी उन्होंने राजनीतिक सफर तय किया।
- मुलायम सिंह यादव के करीबी सहयोगी समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के साथ उनका लंबा राजनीतिक जुड़ाव रहा।
- सदन में मुखर भूमिका 2017 से 2022 तक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहते हुए उन्होंने सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरा।
- बलिया से रहा गहरा जुड़ाव बलिया की राजनीति से निकलकर उन्होंने प्रदेश स्तर पर अपनी पहचान बनाई।



