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दिमाग को शांत कर: सकते हैं ये 4 योगासन, रोज करें तो ब्रेन को मिलेगी ऑक्सीजन, योग गुरु से जानिए कैसे

दिमाग को शांत कर: सकते हैं ये 4 योगासन, रोज करें तो ब्रेन को मिलेगी ऑक्सीजन, योग गुरु से जानिए कैसे

भागदौड़ भरी जिंदगी, लगातार काम का दबाव और अनियंत्रित दिनचर्या के कारण मानसिक तनाव व मानसिक थकान होना बेहद आम बात हो गई है। जब दिमाग को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन और रक्त संचार (Blood Circulation) नहीं मिलता, तो एकाग्रता में कमी और चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार कुछ विशेष योगासनों का नियमित अभ्यास मस्तिष्क में ऑक्सीजन के प्रवाह को बेहतर बनाने और नर्वस सिस्टम को शांत करने में बहुत मददगार साबित हो सकता है।

योग गुरु बाबा रामदेव ने बताया अगर आप हर दिन सुबह उठकर कुछ योगासन कर लें तो आप अपने दिमाग को रिलैक्स और तनाव मुक्त कर सकते हैं। कुछ योगासन ब्रेन की बेहतरीन एक्सरसाइज हैं। अगर आप भी दिनभर की मानसिक थकावट से राहत पाना चाहते हैं, तो योग गुरु से जानिए वे 4 प्रमुख योगासन जो आपके दिमाग को शांत रखकर उसमें नई ऊर्जा का संचार कर सकते हैं।

भस्त्रिका प्राणायाम करें

योग गुरु बाबा रामदेव ने बताया भस्त्रिका में तेज और गहरी सांस लेने-छोड़ने की प्रक्रिया होती है। इसमें सांस पर लगातार ध्यान देना पड़ता है, इसलिए मन को इधर-उधर भटकने से रोकने में मदद मिल सकती है। नियमित और सही तरीके से रोज अभ्यास करने पर इंसान ज्यादा एनर्जेटिक और एक्टिव महसूस करता है। इसे करने के लिए तेज सांस लेने और छोड़ने की तकनीक का इस्तेमाल होता है जिससे कुछ लोगों में उत्तेजना या चक्कर जैसी परेशानी हो सकती है। इसलिए शुरुआत में ये प्राणायाम कम ही करें और गति धीरे-धीरे ही बढ़ाएं।

कपालभाति करें

कपालभाति में पेट की मांसपेशियों की मदद से सांस को जोर से बाहर छोड़ा जाता है, जबकि सांस अंदर सामान्य रूप से आती है। इस दौरान व्यक्ति को सांस की गति और शरीर की गतिविधि पर ध्यान देना होता है, जिससे एकाग्रता बढ़ाने और मन को शांत करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कपालभाति भी तेज श्वसन वाला अभ्यास है, इसलिए इसे बहुत तेज या लंबे समय तक करने से बचना चाहिए। तेज तेज करने से चक्कर या असहजता महसूस हो सकती है। इस योगासन को आराम से और सही तकनीक के साथ करना चाहिए।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम करें

अनुलोम-विलोम एक ऐसा प्राणायाम है जिसमें बारी-बारी से एक-एक नाक से सांस लेना और दूसरी से छोड़ना शामिल होता है। इसे करने के लिए रीढ़ सीधी रखी जाती है और कंधे रिलैक्स रखे जाते हैं। इसे करने के लिए एक नासिका से सांस लेकर दूसरी से सांस छोड़ी जाती है और फिर प्रक्रिया को उल्टा किया जाता है। इसकी धीमी और नियंत्रित गति व्यक्ति का ध्यान सांस पर केंद्रित करती है। धीमी सांस लेने से शरीर के रिलैक्सेशन रिस्पॉन्स को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे तनाव के समय दिल की धड़कन और सांस की गति को सामान्य करने में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि इसे तनाव और मानसिक बेचैनी के समय किया जाने वाला सरल श्वसन अभ्यास माना जाता है।

चंद्रभेदन प्राणायाम करें

चंद्रभेदन प्राणायाम है भी एक ऐसा प्राणायाम है जिसमें आमतौर पर सांस बाईं नासिका से लेकर दाईं नासिका से सांस छोड़ी जाती है। योग परंपरा में बाईं नासिका को शांत और शीतल प्रभाव से जोड़ा जाता है। इस अभ्यास में सांस धीमी और कंट्रोल रहती है, जिससे व्यक्ति अपना ध्यान सांसों पर लगाता है और कुछ समय के लिए तनाव पैदा करने वाले विचारों से दूरी बना सकता है। योग गुरु ने बताया आप रोजाना इसे करें तो दिमाग रिलैक्स और मन शांत महसूस करेगा।

ये प्राणायाम मन को शांत करने में कैसे मदद कर सकता हैं?

इन सभी अभ्यासों में दिमाग को रिलैक्स और मन को शांत करने के लिए सांस से जुड़ी एक्सरसाइज करने पर ज़ोर दिया गया है। जब व्यक्ति तनाव में होता है, तो सांस तेज और उथली हो सकती है। इसके विपरीत, धीमी और नियंत्रित सांस लेने से शरीर को आराम की स्थिति में जाने में मदद मिलती है।

डिस्कलेमर : यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी और योग जागरूकता के उद्देश्य से साझा की गई है। अगर आपको गर्दन, रीढ़ की हड्डी, उच्च ब्लड प्रेशर या कोई दूसरी हेल्थ प्रॉब्लम है तो इन योगासनों का अभ्यास करने से पहले किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लें।

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