भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश चालू वित्त वर्ष की अप्रैलजून तिमाही में छह प्रतिशत बढ़कर 19.81 अरब डॉलर रहा. हालांकि, इस दौरान अमेरिका से एफडीआई 76 प्रतिशत से अधिक घटा. वहीं दूसरी ओर जापान इस मोर्चे पर नंबर 1 साबित हुआ है. ये जानकारी डिपार्टमेंट फोर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड की ओर से दी गई है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर आंकड़ों में किस तरह की कहानी कही गई है.

कुछ ऐसे रहे एफडीआई के आंकड़े
- पिछले वित्त वर्ष 202526 की इसी तिमाही में भारत में 18.62 अरब डॉलर का एफडीआई आया था. मई में एफडीआई एक साल पहले की इसी अवधि की तुलना में 45 प्रतिशत से अधिक घटकर 2.8 अरब डॉलर रहा. जून में भी इसमें करीब 29 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 4.91 अरब डॉलर रहा.
- अप्रैल में एफडीआई करीब दोगुना बढ़कर 12.1 अरब डॉलर हो गया, जबकि अप्रैल 2025 में यह 6.6 अरब डॉलर था.
- चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जापान 5.71 अरब डॉलर के एफडीआई के साथ सबसे बड़ा निवेशक रहा. इसके बाद क्रमश: सिंगापुर , मॉरीशस , नीदरलैंड , अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात का स्थान रहा.
- अमेरिका से एफडीआई चालू वित्त वर्ष की अप्रैलजून तिमाही में 76 प्रतिशत से अधिक घटकर 1.34 अरब डॉलर रह गया, जबकि वित्त वर्ष 202526 की समान तिमाही में यह 5.61 अरब डॉलर था.
- संयुक्त अरब अमीरात से भी निवेश घटकर 86.8 करोड़ डॉलर रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में एक अरब डॉलर था.
- आंकड़ों के अनुसार, जिन प्रमुख क्षेत्रों में अच्छा एफडीआई आया, उनमें सेवा क्षेत्र , कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर में , व्यापार में , गैरपारंपरिक ऊर्जा में और वाहन क्षेत्र में शामिल हैं.
- इक्विटी निवेश, मुनाफे का निवेश और अन्य पूंजी को मिलाकर कुल एफडीआई अप्रैलजून 202627 में करीब 22 प्रतिशत बढ़कर 30.65 अरब डॉलर हो गया.
- राज्यों में तमिलनाडु को इस अवधि में सबसे अधिक 5.95 अरब डॉलर का एफडीआई मिला. इसके बाद महाराष्ट्र , दिल्ली , कर्नाटक और गुजरात का स्थान रहा.
11 साल में 843 बिलियन डॉलर का एफडीआई
कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा कि पिछले फाइनेंशियल ईयर में FDI रिकॉर्ड 94.53 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिससे वित्त वर्ष 2015 और वित्त वर्ष 2026 के बीच कुल इनफ्लो बढ़कर 843 बिलियन डॉलर हो गया. कई सेक्टर के लिए सरकार की प्रोडक्शनलिंक्ड इंसेंटिव स्कीम का जिक्र करते हुए गोयल ने कहा कि इनसे 2.4 लाख करोड़ रुपए का असल निवेश, 23.8 लाख करोड़ रुपए का प्रोडक्शन और सेल, और 15.2 लाख करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट हुआ. ‘मेक इन इंडिया’ प्रोग्राम के 12 साल पूरे होने पर X पर एक पोस्ट में गोयल ने कहा कि इन स्कीम से 14.6 लाख से ज्यादा डायरेक्ट और इनडायरेक्ट नौकरियां भी पैदा हुईं. उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, ऑटोमोबाइल, IT हार्डवेयर और स्पेशलिटी स्टील जैसे सेक्टर को PLI स्कीम से काफी फायदा हुआ.



