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​UP International Trade Show 2026 : 2 करोड़ की हाइड्रोजन बस, 2 लाख किमी का ट्रायल; जानिए कब घटेगी कीमत, विद्यानंद साही ने बताया पूरा प्लान

​UP International Trade Show 2026 : 2 करोड़ की हाइड्रोजन बस, 2 लाख किमी का ट्रायल; जानिए कब घटेगी कीमत, विद्यानंद साही ने बताया पूरा प्लान

ग्रेटर नोएडा से धीरेंद्र सिंह। क्या हाइड्रोजन बसें भारत के सार्वजनिक परिवहन का अगला बड़ा विकल्प बन सकती हैं? इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के सीनियर मैनेजर विद्यानंद साही के मुताबिक, हाइड्रोजन आधारित परिवहन स्वच्छ परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण तकनीक है।  UP International Trade Show 2026 में अमृत विचार से बातचीत में उन्होंने बताया कि एनसीआर में इंडियन ऑयल की 15 हाइड्रोजन बसें संचालित हो रही हैं और ये परीक्षण के दौरान अब तक करीब दो लाख किलोमीटर चल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में एक बस की लागत दो करोड़ रुपये से अधिक है, लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन होने पर इसमें कमी आने की संभावना है। हाइड्रोजन बसों को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने कर में रियायत की जरूरत भी बताई।

अमृत विचार : हाइड्रोजन बस की तकनीक के बारे में बताइए। इसकी खासियत क्या है?

विद्यानंद साही : हाइड्रोजन एक स्वच्छ ईंधन तकनीक है। हाइड्रोजन बस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे शून्य उत्सर्जन होता है। खास बात यह भी है कि इसमें भारतीय तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह तकनीक स्वच्छ परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

अमृत विचार : क्या अभी हाइड्रोजन बसों का व्यावहारिक संचालन हो रहा है?

विद्यानंद साही : बिल्कुल। इंडियन ऑयल की एनसीआर में फिलहाल 15 हाइड्रोजन बसें चल रही हैं। ये बसें सेंट्रल सेक्रेटेरिएट रूट पर संचालित हो रही हैं। इसके अलावा आरके पुरम से पेट्रोलियम मंत्रालय के कर्मचारी इन बसों से आतेजाते हैं। इंडियन नेवी की टाउनशिप से भी कर्मचारियों के आवागमन में इनका इस्तेमाल हो रहा है।

अमृत विचार : इन बसों का अब तक कितना परीक्षण हो चुका है?

विद्यानंद साही : ये बसें परीक्षण के आधार पर अब तक करीब दो लाख किलोमीटर चल चुकी हैं। अब इनका संचालन आगे भी जारी है। इससे वास्तविक परिस्थितियों में इस तकनीक के प्रदर्शन को समझने में मदद मिल रही है।

अमृत विचार : अंतरराष्ट्रीय व्यापार शो में हाइड्रोजन बस प्रदर्शित करने का उद्देश्य क्या है?

विद्यानंद साही : इसका मुख्य उद्देश्य जागरूकता पैदा करना है। इस प्रदर्शनी में बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं। करीब चारपांच लाख लोगों के आने की उम्मीद है। हम लोगों को बताना चाहते हैं कि भारत में इस तरह की उन्नत स्वच्छ परिवहन तकनीक विकसित और संचालित की जा रही है। यह भविष्य की जरूरतों को देखते हुए महत्वपूर्ण है।

अमृत विचार : क्या विदेशों से भी इस तकनीक को लेकर मांग या रुचि सामने आ रही है?

विद्यानंद साही : फिलहाल हमारा मुख्य उद्देश्य तकनीक के बारे में जागरूकता और इसके व्यावहारिक इस्तेमाल को बढ़ाना है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार शो जैसे मंच पर विभिन्न देशों और क्षेत्रों के लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचती है, जिससे भविष्य में संभावनाएं बन सकती हैं।

अमृत विचार  : एक हाइड्रोजन बस की लागत कितनी आती है?

विद्यानंद साही : अभी इसकी लागत दो करोड़ रुपये से अधिक है। हालांकि जैसेजैसे उत्पादन का पैमाना बढ़ेगा और करीब 10 हजार बसों का निर्माण होने लगेगा, लागत घटकर लगभग आठ लाख रुपये के स्तर तक आने की संभावना है।

अमृत विचार : फिलहाल लागत अधिक होने के बावजूद इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सरकार से क्या अपेक्षा है?

विद्यानंद साही : हमारी अपेक्षा है कि जिस तरह इलेक्ट्रिक वाहनों को कर में कुछ रियायतें मिलती हैं, उसी तरह हाइड्रोजन बसों के लिए भी कर में छूट जैसी सुविधाएं मिलें। इससे इस तकनीक को अपनाने और इसके विस्तार में मदद मिलेगी।

अमृत विचार : डीजल और पेट्रोल बसों की तुलना में हाइड्रोजन बस का सबसे बड़ा फायदा क्या है?

विद्यानंद साही : सबसे बड़ा फायदा प्रदूषण में कमी है। हाइड्रोजन बस शून्य उत्सर्जन वाली तकनीक पर आधारित है। अभी इसकी लागत पारंपरिक ईंधन वाली बसों की तुलना में अधिक है, लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन होने पर लागत में कमी आने की उम्मीद है। इसलिए यह स्वच्छ परिवहन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकल्प बन सकती है।

 

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