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​UP International Trade Show 2026 : भदोही के कालीन से आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी तक विदेशी बाजार में दस्तक, रूस-बेलारूस के खरीदारों ने दिखाई गोरखपुर की टेराकोटा में रुचि

​UP International Trade Show 2026 : भदोही के कालीन से आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी तक विदेशी बाजार में दस्तक, रूस-बेलारूस के खरीदारों ने दिखाई गोरखपुर की टेराकोटा में रुचि

लखनऊ/ग्रेटर नोएडा ,अमृत विचार: ग्रेटर नोएडा में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में उत्तर प्रदेश का पारंपरिक हुनर सात समंदर पार अपनी पहचान बना रहा है। कहीं भदोही के कालीन खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं तो कहीं आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी, गोरखपुर की टेराकोटा और लखनऊ की चिकनकारी विदेशी मेहमानों को लुभा रही है। 
रूस, जापान और बेलारूस से आए खरीदार इन कलाकृतियों की बारीकियां समझ रहे हैं। हालांकि, विदेशी बाजार तक पहुंचने की राह में भाषा और कीमत जैसी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। कारीगरों का कहना है कि ट्रेड शो ने उन्हें दुनिया के सामने अपना हुनर दिखाने का अवसर दिया है।

न्यूजीलैंड तक पहुंची आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी

आजमगढ़ से आए विकास  प्रजापति के चेहरे पर अपने हुनर को मिल रही पहचान की खुशी है। उन्होंने बताया कि उनकी ब्लैक पॉटरी न्यूजीलैंड तक पहुंच चुकी है। ट्रेड शो में भी लोग इन उत्पादों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। गोरखपुर के शशिकांत सिंह की टेराकोटा कलाकृतियों को रूस और बेलारूस से आए प्रतिनिधियों ने देखा और जानकारी ली। विदेशी खरीदारों की रुचि से उन्हें कारोबार बढ़ने की उम्मीद है।

जापान के खरीदार आए, लेकिन भाषा ने अटकाया सौदा

लखनऊ के चिकनकारी कारोबारी मिर्जा यूसुफ अहमद के स्टॉल पर जापान और रूस के खरीदार पहुंचे। उन्होंने बताया कि विदेशी मेहमानों ने उत्पादों में रुचि दिखाई, लेकिन अभी कोई ऑर्डर नहीं मिला है। बातचीत में भाषा की दिक्कत आ रही है। दुभाषिये उपलब्ध होने के बावजूद खरीदारों से कारोबारी बातचीत सहज नहीं हो पा रही है।

भदोही के कालीन को खरीदारों का अच्छा प्रतिसाद

भदोही के इस्तिखार अहमद दूसरी बार ट्रेड शो में पहुंचे हैं। उनके स्टॉल पर जरी और कालीन के प्रदर्शन के साथ इन्हें बनाने की प्रक्रिया भी दिखाई जा रही है। उन्होंने बताया कि इस बार खरीदारों के साथ आम लोग भी उत्पादों को पसंद कर रहे हैं और खरीदारी हो रही है।

50 रुपये से 1.40 लाख तक की कलाकृतिया

ट्रेड शो में हस्तशिल्प की एक अलग कहानी भी सामने आई। वाराणसी के ओम प्रकाश शर्मा  के स्टॉल पर 50 रुपये से लेकर 1.40 लाख रुपये तक की कलाकृतियां मौजूद हैं। पंचमुखी हनुमान की कलाकृति की कीमत 1.40 लाख रुपये है। कारीगर बताते हैं कि उनकी कलाकृतियां विदेशों तक जाती हैं, लेकिन देश में कई कला प्रेमी महंगी होने के कारण इन्हें खरीद नहीं पाते। मशीनों के दौर में हस्तशिल्प की पहचान बनाए रखना भी चुनौती है। ऐसे में ट्रेड शो उनके लिए बिक्री के साथ अपनी कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का मंच बन रहा है।

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