Banda News: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में गौशालाओं की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. जिले में संचालित गोशालाओं में गोवंश के लिए चारापानी और साफसफाई की व्यवस्था खराब होने के आरोप लगाए गए हैं. कई गोशालाओं में कीचड़ और जलभराव की स्थिति होने तथा गोवंश के बीमार पड़ने और मौतों की शिकायतें सामने आने का दावा किया जा रहा है. इसी के साथ गोवंश के चारापानी के लिए जारी सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं.

जिले में करीब 263 गोशालाएं संचालित होने और इनमें लगभग 47 हजार गोवंश के संरक्षित होने की जानकारी दी गई है. आरोप है कि बड़ी संख्या में गोवंश होने के बावजूद कई गोशालाओं में पर्याप्त चारा और पानी उपलब्ध नहीं है. कुछ स्थानों पर गंदगी और कीचड़ की समस्या होने की बात भी सामने आई है.
गोवंश की मौतों को लेकर भी सवाल
गो रक्षा समिति के अध्यक्ष महेश प्रजापति का आरोप है कि गोशालाओं की व्यवस्थाओं पर संबंधित अधिकारियों की पर्याप्त निगरानी नहीं है. उनका कहना है कि सरकारी स्तर पर चारापानी और गोवंश के संरक्षण के लिए लगातार धनराशि जारी की जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका अपेक्षित असर दिखाई नहीं दे रहा. उन्होंने गोशालाओं में गोवंश की मौतों का मुद्दा भी उठाया है. आरोप है कि भूख, प्यास और बीमारी के कारण गोवंश की जान जा रही है. इसके अलावा लंपी जैसी बीमारियों से निपटने के लिए इलाज और निगरानी की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए गए हैं.
एक साल में 10 करोड़ के फंड पर सवाल
गो रक्षा समिति की ओर से उत्तर प्रदेश शासन को शिकायत भेजकर पिछले एक साल में गोवंश के लिए जारी करीब 10 करोड़ रुपये की धनराशि के इस्तेमाल की जांच कराने की मांग की गई है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चारापानी और गोवंश के संरक्षण के लिए जारी रकम के इस्तेमाल में अनियमितता हुई है. शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित करने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. उनका सवाल है कि अगर गोवंश के लिए करोड़ों रुपये जारी किए गए हैं तो उसका इस्तेमाल किस मद में हुआ, कितना चारा खरीदा गया और कितने गोवंश का इलाज कराया गया, इसका पूरा हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए.
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने आरोपों को नकारा
हालांकि, इन आरोपों पर बांदा के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने घोटाले की बात को सिरे से खारिज किया है. उनका कहना है कि जिले में गोवंश के लिए जारी धनराशि के इस्तेमाल में कोई घोटाला नहीं हुआ है. ऐसे में अब शिकायत में लगाए गए आरोपों और विभाग की ओर से दिए गए खंडन के बीच वास्तविक स्थिति जांच का विषय बन गई है. शिकायतकर्ताओं की मांग है कि गोशालाओं का भौतिक सत्यापन कराया जाए और सरकारी रिकॉर्ड में जारी धनराशि तथा उसके खर्च का मिलान किया जाए.
फिलहाल बांदा की गोशालाओं में गोवंश की स्थिति, चारापानी की उपलब्धता, इलाज की व्यवस्था और सरकारी फंड के इस्तेमाल को लेकर उठे सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा. शिकायतकर्ताओं ने शासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.

