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​Hospital Grading: अब मरीजों को मिलेगी अस्पतालों की ‘रेटिंग’, ये नया सिस्टम लाने की तैयारी में सरकार

Hospital Grading: जब भी घर में कोई बीमार पड़ता है, सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि मरीज को किस अस्पताल में ले जाया जाए. अक्सर लोगों को ये नहीं पता होता कि कौन सा अस्पताल सुरक्षित है. लेकिन अब सरकार आपकी इस उलझन को दूर करने जा रही है. देश के हेल्थकेयर सिस्टम को सुधारने के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठा रही है. नीति आयोग एक ऐसे नेशनल क्वालिटी फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है, जिससे देश के सभी सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों की ग्रेडिंग की जाएगी. ये ग्रेडिंग पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित होगी. इसका मकसद मरीजों को सही जानकारी देना है ताकि वे अपने इलाज के लिए एक बेहतर फैसला ले सकें.

​Hospital Grading: अब मरीजों को मिलेगी अस्पतालों की ‘रेटिंग’, ये नया सिस्टम लाने की तैयारी में सरकार

पारदर्शिता से हेल्थ सेक्टर में आएगा सुधार

अभी तक मरीजों के पास ऐसा कोई पारदर्शी तरीका नहीं है जिससे वे अस्पतालों की क्वालिटी नाप सकें. इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद, ग्रेडिंग सिस्टम को सबके सामने रखा जाएगा. इससे अस्पताल भी अपनी सुविधाओं को बेहतर करने के लिए मजबूर होंगे. नीति आयोग की नई टीम इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रही है. सरकार का मानना है कि इस पारदर्शी व ऑडिट किए गए सिस्टम से भारत के हेल्थ इकोसिस्टम में काफी सुधार होगा. इसके साथ ही विदेश से भारत आकर इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या में भी इजाफा होगा, जिससे मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा.

किन पैमानों पर कसे जाएंगे अस्पताल

एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, ये फ्रेमवर्क इस साल के अंत तक बनकर तैयार होने की पूरी उम्मीद है. इसके बाद अगले वित्त वर्ष से अस्पतालों को ग्रेड देने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. हाल ही में नीति आयोग के सदस्य एम. श्रीनिवास की अगुवाई में स्टेकहोल्डर्स के साथ एक अहम बैठक हुई है. इसमें तय किया जा रहा है कि अस्पताल को किन पैमानों पर परखा जाए. इसमें मरीज की सुरक्षा, दवाइयों में होने वाली गलतियां, इलाज के बाद मरीज का अनुभव, मरीज के दोबारा अस्पताल में भर्ती होने की दर जैसी अहम चीजों को शामिल किया जाएगा. इसके अलावा कैंसर सर्जरी के बाद मृत्यु दर, ऑर्गन ट्रांसप्लांट के बाद मरीज के बचने की दर जैसे गंभीर डेटा को भी इस ग्रेडिंग का खास हिस्सा बनाया जाएगा.

ब्रिटेन के सिस्टम से ली गई प्रेरणा

अगर हम मौजूदा सिस्टम की बात करें, तो भारत में अभी प्राइवेट अस्पतालों को मरीज की सुरक्षा के लिए एनएबीएच के मानकों का पालन करना होता है. लेकिन समस्या ये है कि इन रिपोर्ट्स को पब्लिक के सामने कभी नहीं रखा जाता है. इस वजह से मरीजों को अस्पताल की असली क्वालिटी का पता नहीं चल पाता है. वहीं अगर हम यूके के नेशनल हेल्थ सर्विस की बात करें, तो वहां अस्पतालों की क्वालिटी इंडिकेटर की रिपोर्ट बाकायदा पब्लिश की जाती है. इससे मरीजों को अपने लिए सही अस्पताल चुनने में काफी मदद मिलती है. इसी पारदर्शी सिस्टम को अब भारत में लागू करने की तैयारी चल रही है.

इंश्योरेंस कंपनियों को भी होगा फायदा

ईवाईपार्थेनन इंडिया के हेल्थकेयर सेक्टर लीडर श्रीमोई चक्रवर्ती का कहना है कि इस स्टैंडर्ड फ्रेमवर्क का सबसे बड़ा फायदा तो मरीजों को ही होने वाला है. इसके साथ ही जो अस्पताल सच में अच्छी क्वालिटी का इलाज दे रहे हैं, वे खुद को भीड़ से अलग दिखा पाएंगे. इतना ही नहीं, जो कंपनियां हेल्थ इंश्योरेंस देती हैं, वे भी इस ग्रेडिंग के नतीजों के आधार पर अपने नए प्लान डिजाइन कर सकेंगी.

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