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24 साल तक पुलिस को चकमा देता रहा आरोपी, गुरुग्राम में दर्जी बनकर काट रहा था जिंदगी; 24 साल पुराने ब्लाइंड मर्डर केस में गिरफ्तारी.

24 साल तक पुलिस को चकमा देता रहा आरोपी, गुरुग्राम में दर्जी बनकर काट रहा था जिंदगी; 24 साल पुराने ब्लाइंड मर्डर केस में गिरफ्तारी.

दिल्ली में करीब 24 साल पहले हुए एक ब्लाइंड मर्डर केस का आरोपी आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने लंबे समय से फरार चल रहे फिरोज उर्फ ख्वाजा को गुरुग्राम के मानेसर इलाके से गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी इतने लंबे समय से पहचान छिपाकर रह रहा था और मानेसर की एक रेडीमेड गारमेंट फैक्ट्री में दर्जी का काम कर रहा था।

यह मामला साल 2002 का है, जब तुगलकाबाद किले के पास डीडीए के जंगल से एक युवक का शव बरामद हुआ था। उस समय शव की हालत काफी खराब थी और उसकी पहचान कलाम अंसारी, निवासी पश्चिमी चंपारण, बिहार के रूप में हुई थी।

रोजगार की तलाश में दिल्ली आया था कलाम

पुलिस के मुताबिक, कलाम अंसारी साल 2001 में रोजगार की तलाश में बिहार से दिल्ली आया था। इसी दौरान उसकी जान-पहचान फिरोज से हुई थी। दोनों एक-दूसरे को जानते थे और कुछ समय तक साथ काम भी किया था।

बाद में दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया और धीरे-धीरे यह विवाद पुरानी रंजिश में बदल गया।

पुलिस की जांच के अनुसार, इस रंजिश के पीछे फिरोज के भाई साहबजान से जुड़ा एक पुराना मामला भी था। बताया गया कि साहबजान की शादी कलाम के गांव में हुई थी, लेकिन उसकी पत्नी उसके साथ रहने को तैयार नहीं थी। इसी पारिवारिक विवाद के बीच साहबजान ने कलाम के घर के सामने आत्महत्या कर ली थी।

पुलिस का कहना है कि फिरोज को शक था कि उसके भाई की मौत के लिए कलाम का परिवार जिम्मेदार है। इसी कथित रंजिश के चलते उसने कलाम से बदला लेने की योजना बनाई।

बहाने से जंगल में ले गया, फिर हत्या का आरोप

जांच के मुताबिक, 15 फरवरी 2002 को फिरोज कलाम को बहाने से तुगलकाबाद के जंगल की तरफ ले गया। पुलिस का आरोप है कि वहां पत्थर से हमला कर कलाम की हत्या कर दी गई।

इसके बाद आरोपी दिल्ली से निकलकर बिहार चला गया। पुलिस के अनुसार, उसने कलाम के परिवार को भी उसके बारे में गलत जानकारी दी, जिससे काफी समय तक मामले की गुत्थी उलझी रही।

कुछ दिनों बाद 18 फरवरी 2002 को तुगलकाबाद किले के पास डीडीए के जंगल से कलाम का शव बरामद हुआ। इसके बाद ओखला औद्योगिक क्षेत्र थाने में हत्या का मामला दर्ज किया गया और आरोपी की तलाश शुरू हुई।

24 साल तक बदलता रहा ठिकाना

मामला पुराना होने के साथ-साथ आरोपी लगातार पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहा। लंबे समय तक उसका कोई ठोस सुराग नहीं मिलने के बाद केस को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपा गया।

क्राइम ब्रांच की टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए पुराने रिकॉर्ड खंगाले और उसके संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई। पुलिस के मुताबिक, करीब दो महीने तक बिहार में लगभग 30 स्थानों पर छापेमारी भी की गई।

इसके साथ ही तकनीकी निगरानी और फील्ड जांच के जरिए पुलिस ने आरोपी के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की।

मानेसर की फैक्ट्री में दर्जी बनकर रह रहा था

जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के गुरुग्राम में छिपे होने की जानकारी मिली। इसके बाद टीम ने मानेसर इलाके में निगरानी बढ़ाई।

पुख्ता सूचना मिलने के बाद पुलिस ने आईएमटी मानेसर स्थित एक रेडीमेड गारमेंट फैक्ट्री में छापा मारकर फिरोज उर्फ ख्वाजा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी वहां दर्जी के तौर पर काम कर रहा था और करीब 24 साल पुराने मामले में लगातार गिरफ्तारी से बचता आ रहा था।

अब क्राइम ब्रांच आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इतने लंबे समय तक उसने किन-किन जगहों पर अपना ठिकाना बदला और पुलिस से बचने के लिए क्या-क्या तरीके अपनाए।

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