Pentagon Cyber Attack : अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन के एक अहम डेटा सिस्टम में बड़े साइबर ब्रीच का मामला सामने आया है। डिफेंस मैनपावर डेटा सेंटर के सिस्टम में अनधिकृत लोगों ने कई महीनों तक पहुंच बनाए रखी। इस दौरान 30 लाख से ज्यादा लोगों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी के उजागर होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच सिस्टम में अनधिकृत पहुंच रही। इस ब्रीच में करीब 27.6 लाख जीवित लोगों और 2.94 लाख मृत व्यक्तियों से जुड़ा डेटा प्रभावित हुआ है।

कौनकौन सी जानकारी हुई लीक?
ब्रीच में लोगों की कई निजी और पेशेवर जानकारियां उजागर होने की बात सामने आई है। इनमें नाम, सोशल सिक्योरिटी नंबर , जन्मतिथि, कॉन्टैक्ट डिटेल्स और नौकरी से जुड़ी जानकारी शामिल है। डेटा के अनएन्क्रिप्टेड होने की वजह से इस घटना को और गंभीर माना जा रहा है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि अभी तक इस जानकारी के गलत इस्तेमाल का कोई सबूत नहीं मिला है।
जुलाई में सामने आई सिस्टम की खामी
अधिकारियों को जुलाई 2026 में सिस्टम में मौजूद खामी का पता चला। इसके बाद संबंधित सिस्टम को तुरंत पैच किया गया और अनधिकृत पहुंच को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए गए। प्रभावित लोगों को संभावित जोखिम से बचाने के लिए एक साल की मुफ्त क्रेडिट मॉनिटरिंग की सुविधा भी दी जा रही है।
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DMDC में करोड़ों रिकॉर्ड मौजूद
डिफेंस मैनपावर डेटा सेंटर अमेरिकी रक्षा विभाग के प्रमुख पर्सनल रिकॉर्ड सिस्टम में से एक है। इसमें सिर्फ सक्रिय सैन्य कर्मियों का ही डेटा नहीं रहता, बल्कि रिजर्व कर्मियों, सिविलियन कर्मचारियों, ठेकेदारों, रिटायर्ड कर्मियों, पूर्व सैनिकों और सैन्य परिवारों से जुड़ी जानकारी भी शामिल है। इस सिस्टम में 6 करोड़ से ज्यादा रिकॉर्ड मौजूद होने की बात कही गई है। ऐसे में कुछ लाख रिकॉर्ड का प्रभावित होना भी सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सैन्य भूमिकाओं की जानकारी भी उजागर
इस साइबर ब्रीच में केवल नाम और संपर्क जैसी सामान्य जानकारी ही प्रभावित नहीं हुई, बल्कि लोगों की नौकरी और पेशे से जुड़ी डिटेल्स भी सामने आने की बात कही गई है। ऐसी जानकारी संवेदनशील हो सकती है, क्योंकि इससे किसी व्यक्ति की सैन्य भूमिका, संगठन से जुड़े संबंध या पेशेवर प्रोफाइल का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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अभी डेटा के दुरुपयोग का सबूत नहीं
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि लीक हुए डेटा का इस्तेमाल गलत तरीके से किया गया है। हालांकि, लंबे समय तक सिस्टम में अनधिकृत पहुंच बने रहने के कारण संभावित जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पेंटागन ने सिस्टम की खामी को ठीक कर दिया है और प्रभावित लोगों को सुरक्षा संबंधी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। यह घटना अमेरिकी रक्षा विभाग के बड़े पैमाने पर मौजूद सैन्य और कर्मचारी डेटा की साइबर सुरक्षा को लेकर एक अहम मामला बन गई है।
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