
दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं, जिनसे जुड़ी कहानियां सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं। मेक्सिको का टिल्टेपेक गांव भी ऐसी ही जगहों में गिना जाता है। लंबे समय से इस गांव को लेकर यह चर्चा रही है कि यहां रहने वाले लोगों में बड़ी संख्या में अंधेपन की समस्या देखी गई और इसके पीछे एक रहस्यमयी पेड़ को जिम्मेदार माना जाता था।
कहा जाता था कि गांव में मौजूद एक खास पेड़ को देखने से इंसान की आंखों की रोशनी चली जाती है। हालांकि, बाद में वैज्ञानिक जांच में इस रहस्य के पीछे एक बीमारी की बात सामने आई।
रहस्यमयी पेड़ को माना जाता था वजह
स्थानीय मान्यता के मुताबिक, टिल्टेपेक में बाविन या लावलेजा नाम के एक विशेष पेड़ को लेकर डर की कहानी प्रचलित थी। लोगों के बीच यह धारणा थी कि इस पेड़ को देखने से आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है।
कहानी इतनी प्रचलित हुई कि गांव में होने वाले अंधेपन को भी इसी पेड़ से जोड़कर देखा जाने लगा। लेकिन वैज्ञानिक नजरिए से अंधेपन की वजह कुछ और बताई गई।
बीमारी ने खोला अंधेपन का राज
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस इलाके में अंधेपन की समस्या का संबंध ओन्कोसिएरसीस नामक परजीवी संक्रमण से हो सकता है। इसे आम भाषा में रिवर ब्लाइंडनेस भी कहा जाता है।
यह बीमारी Onchocerca volvulus नामक परजीवी के कारण होती है। इसका संक्रमण संक्रमित ब्लैक फ्लाई यानी एक तरह की काली मक्खी के काटने से फैलता है।
बार-बार संक्रमित मक्खियों के काटने से शरीर में परजीवी का संक्रमण बढ़ सकता है और इसके गंभीर प्रभाव त्वचा तथा आंखों पर पड़ सकते हैं। आंखों को प्रभावित करने की स्थिति में यह बीमारी दृष्टि को नुकसान पहुंचा सकती है।
पेड़ नहीं, संक्रमण बना वजह
यानी जिस अंधेपन को कभी गांव के रहस्यमयी पेड़ से जोड़कर देखा जाता था, उसके पीछे वैज्ञानिक जांच में संक्रामक बीमारी को प्रमुख कारण माना गया।
रिवर ब्लाइंडनेस आमतौर पर उन इलाकों में पाई जाती है जहां संक्रमण फैलाने वाली ब्लैक फ्लाई का प्रकोप होता है। इन मक्खियों का संबंध बहते पानी वाले क्षेत्रों से भी होता है।
क्या गांव का हर व्यक्ति अंधा है?
टिल्टेपेक को लेकर इंटरनेट और लोकप्रिय कहानियों में अक्सर इसे ऐसा गांव बताया जाता है जहां सभी लोग अंधे हैं। लेकिन इस तरह का दावा बिना संदर्भ के करना सही नहीं है।
असल कहानी यह है कि गांव लंबे समय से रिवर ब्लाइंडनेस और उससे जुड़े दृष्टि संबंधी मामलों की चर्चा के कारण जाना जाता रहा है। बीमारी की मौजूदगी को लेकर वैज्ञानिक कारण सामने आने के बाद रहस्यमयी पेड़ वाली कहानी की जगह संक्रमण की वैज्ञानिक व्याख्या ने ले ली।
यह कहानी एक दिलचस्प उदाहरण है कि किसी बीमारी के कारणों की जानकारी उपलब्ध न होने पर उसके साथ किस तरह लोक-विश्वास और रहस्यमयी कहानियां जुड़ सकती हैं। वैज्ञानिक जांच के बाद उसी घटना की एक बिल्कुल अलग तस्वीर सामने आ सकती है।



