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प्यार की कीमत: जाति की दीवार के बीच पनपी मोहब्बत का खौफनाक अंत, खेत में मिली दोनों की लाश.

प्यार की कीमत: जाति की दीवार के बीच पनपी मोहब्बत का खौफनाक अंत, खेत में मिली दोनों की लाश.

शाम का वक्त था। सुरेश अपनी किराने की दुकान पर जाने की तैयारी कर रहा था। तभी उसकी पत्नी कमला का फोन बजा। फोन उठाते ही कमला के चेहरे के भाव बदल गए। कुछ देर तक वह चुपचाप सामने देखती रही और फिर फोन रख दिया।

सुरेश ने पूछा, “क्या हुआ? किसका फोन था?”

कमला ने धीमी आवाज में कहा, “तुम्हें एक बात बतानी है… हमारी बेटी नंदिनी किसी लड़के के साथ घूमती है।”

सुरेश के हाथ वहीं रुक गए।

“किस लड़के के साथ?”

कमला ने बताया कि पड़ोस की एक रिश्तेदार ने फोन करके कहा है कि नंदिनी को गांव के बाहर अक्सर एक युवक अमन के साथ देखा जा रहा है।

सुरेश का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा।

“तुम्हें पता है वह किस परिवार का लड़का है?”

कमला ने सिर झुका लिया।

“सुना है दूसरी जाति का है…”

इतना सुनते ही सुरेश ने कहा, “आज नंदिनी से बात करनी पड़ेगी। अगर बात सच निकली तो उसका कॉलेज जाना भी बंद कर देंगे।”

बेटी के घर लौटते ही शुरू हुआ सवाल-जवाब

नंदिनी शाम को कॉलेज से घर लौटी तो उसे देखते ही समझ आ गया कि घर का माहौल बदला हुआ है।

मां ने उससे सीधे पूछा, “कहां थी?”

“कॉलेज में थी।”

“अमन के साथ भी कॉलेज जाती हो?”

नंदिनी कुछ पल चुप रही। फिर उसने कहा, “हां, हम दोनों एक-दूसरे को पसंद करते हैं।”

कमला को जैसे झटका लगा।

नंदिनी ने आगे कहा, “अमन पढ़ा-लिखा है, नौकरी की तैयारी कर रहा है। वह मेरा सम्मान करता है। हम शादी करना चाहते हैं।”

लेकिन परिवार इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं था।

सुरेश ने साफ शब्दों में कह दिया कि वह अपनी बेटी की शादी परिवार की पसंद से ही करेगा।

नंदिनी ने भी अपनी बात रखी।

“अगर शादी करूंगी तो अमन से ही करूंगी। मुझे जाति देखकर किसी इंसान से रिश्ता तय नहीं करना।”

यह बात सुनकर घर में विवाद और बढ़ गया।

युवक के परिवार पर भी बढ़ा दबाव

नंदिनी और अमन को अलग करने के लिए दोनों परिवारों की ओर से दबाव बढ़ने लगा। अमन के घरवालों ने भी उसे समझाया कि वह इस रिश्ते से पीछे हट जाए, क्योंकि गांव में बात फैल चुकी थी।

लेकिन दोनों एक-दूसरे से शादी करने के फैसले पर कायम रहे।

इस बीच परिवार के कुछ लोगों ने दोनों को धमकाने की भी कोशिश की। उन्हें डर था कि अगर दोनों ने अपनी मर्जी से शादी कर ली तो गांव में परिवार की प्रतिष्ठा पर सवाल उठेंगे।

नंदिनी अपनी सहेली से फोन पर कहती थी कि वह किसी के दबाव में आकर अपना फैसला नहीं बदलेगी।

अचानक खेत में मिली दोनों की लाश

दो दिन बाद गांव के बाहर एक खेत में नंदिनी और अमन के शव मिलने की खबर फैल गई।

पुलिस मौके पर पहुंची तो दोनों की मौत हो चुकी थी। शुरुआती तौर पर मामला आत्महत्या का बताया जाने लगा, लेकिन घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।

परिवार के लोगों ने दावा किया कि दोनों ने शायद साथ मरने का फैसला किया होगा।

लेकिन पुलिस को मामला इतना सीधा नहीं लगा।

दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और घटनास्थल से सबूत जुटाए गए। पुलिस ने दोनों परिवारों और उनके परिचितों से पूछताछ शुरू कर दी।

गांव में फैल गई अलग-अलग चर्चाएं

घटना के बाद गांव में तरह-तरह की बातें होने लगीं। कोई इसे प्रेम प्रसंग का दुखद अंत बता रहा था तो कोई दोनों की हत्या की आशंका जता रहा था।

नंदिनी की मां कमला अपनी बेटी की मौत से टूट चुकी थी।

उसे बार-बार वही बात याद आ रही थी जब उसकी बेटी ने कहा था कि वह अमन के साथ अपनी जिंदगी बिताना चाहती है।

कमला के मन में सवाल उठ रहा था कि अगर परिवार ने उनकी बात मान ली होती तो क्या आज दोनों जिंदा होते?

जांच ने बदल दी कहानी की दिशा

पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो मामला और पेचीदा होता गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से मिले सबूतों के आधार पर पुलिस ने मौत की परिस्थितियों की बारीकी से जांच शुरू की।

जांच अधिकारियों ने दोनों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और आखिरी समय में उनके संपर्क में रहे लोगों की जानकारी जुटाई।

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही थी कि दोनों खेत तक खुद पहुंचे थे या किसी ने उन्हें वहां बुलाया था।

अब सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या यह वाकई आत्महत्या थी या प्रेम संबंध और परिवार की कथित इज्जत के विवाद में दोनों की जान ली गई?

जांच पूरी होने के बाद ही इस सवाल का जवाब सामने आने की उम्मीद थी।

कमला के लिए मगर कहानी का सच कुछ भी हो, उसकी बेटी हमेशा के लिए उससे दूर जा चुकी थी।

जिस बेटी के भविष्य के लिए परिवार ने इतने सपने देखे थे, वही बेटी अब एक ऐसी कहानी बन चुकी थी, जिसमें प्यार, परिवार का दबाव और समाज की सोच—तीनों आमने-सामने खड़े थे।

और सबसे बड़ा सवाल आज भी यही था—क्या दो बालिग लोगों के अपने जीवन का फैसला करने से किसी परिवार की ‘इज्जत’ सच में खत्म हो जाती है, या असली नुकसान तब होता है जब उस फैसले का जवाब हिंसा से दिया जाता है?

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