CrimeIndiaTrending

VIP कार में घूम रहा था नकली नोटों का खेल, लाखों के नकली नोटों ने खोला पढ़े-लिखे भाई-बहन का राज.

VIP कार में घूम रहा था नकली नोटों का खेल, लाखों के नकली नोटों ने खोला पढ़े-लिखे भाई-बहन का राज.

शाम का वक्त था। पुलिस अधिकारी अपने कार्यालय में दिनभर के काम निपटा ही रहे थे कि तभी एक पुराना मुखबिर उनके पास पहुंचा। उसके चेहरे पर इस बार अलग ही उत्साह था।

उसने कहा, “साहब, इस बार खबर बहुत बड़ी है। अगर समय रहते कार्रवाई हुई तो लाखों रुपये के नकली नोट बरामद हो सकते हैं।”

पुलिस अधिकारी ने तुरंत पूरी बात बताने को कहा।

मुखबिर ने बताया कि एक लग्जरी कार में कुछ लोग घूम रहे हैं। कार पर वीआईपी नंबर और लालबत्ती लगी है। देखने में ये लोग किसी बड़े परिवार से जुड़े लगते हैं, लेकिन उनके पास बड़ी मात्रा में दो हजार रुपये के संदिग्ध नोट हैं।

सूचना मिलते ही पुलिस ने आसपास के रास्तों पर निगरानी बढ़ा दी।

काफी देर तक गाड़ियों की जांच होती रही, लेकिन संदिग्ध कार दिखाई नहीं दी। रात गहराती गई और पुलिस का इंतजार बढ़ता गया।

फिर आधी रात के करीब दूर से एक सफेद रंग की लग्जरी कार आती दिखाई दी।

कार पर वीआईपी नंबर और लालबत्ती लगी थी।

पुलिस ने इशारा कर उसे रोक लिया।

ड्राइवर ने शीशा नीचे किया और नाराजगी भरे अंदाज में पूछा, “हमें क्यों रोका गया है?”

पुलिस ने कहा, “गाड़ी की तलाशी होगी। सभी लोग नीचे उतरिए।”

कार में बैठे लोगों ने खुद को प्रभावशाली परिवार से जुड़ा बताया और पुलिस को समझाने की कोशिश की कि उनकी गाड़ी में कोई गलत सामान नहीं है।

लेकिन पुलिस ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया।

जैसे ही कार की तलाशी शुरू हुई, अंदर रखे तीन बैग देखकर पुलिस की नजरें ठहर गईं।

बैग खोलते ही उनमें दो हजार रुपये के नोटों की गड्डियां दिखाई दीं।

पहली नजर में नोट बिल्कुल असली जैसे लग रहे थे।

लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में नई करेंसी और मुखबिर की सूचना ने पुलिस का शक बढ़ा दिया।

तीनों लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।

यहीं से एक ऐसी कहानी सामने आई, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

पूछताछ में पता चला कि पकड़ा गया युवक पढ़ा-लिखा था और तकनीकी क्षेत्र में अपना कारोबार शुरू कर चुका था। उसने पढ़ाई के दौरान कई प्रोजेक्ट तैयार किए थे और भविष्य में अपना बड़ा कारोबार खड़ा करने का सपना देख रहा था।

उसके साथ पकड़ी गई युवती उसकी करीबी रिश्तेदार थी। वह भी अच्छी पढ़ाई कर चुकी थी और कुछ समय से उसके कारोबार में काम कर रही थी।

शुरुआत में दोनों का ध्यान कारोबार बढ़ाने पर था। लेकिन धीरे-धीरे पैसों की जरूरत बढ़ने लगी।

इसी दौरान दोनों ने गलत रास्ता चुन लिया।

पुलिस के मुताबिक, पहले थोड़ी मात्रा में नकली नोट बाजार में चलाकर देखे गए। जब किसी को शक नहीं हुआ तो उनका हौसला बढ़ गया।

इसके बाद इस काम में कुछ और लोग जुड़ते चले गए।

एक कारोबारी भी कथित तौर पर इस नेटवर्क का हिस्सा बन गया। फिर नकली नोटों को अलग-अलग लोगों के जरिए बाजार में खपाने की कोशिश शुरू हुई।

देखते ही देखते यह छोटा सा खेल बड़े नेटवर्क में बदल गया।

पुलिस की जांच में सामने आया कि नकली नोट तैयार करने के लिए एक अलग जगह का इस्तेमाल किया जा रहा था। वहां से प्रिंटर, कागज और दूसरे सामान समेत कई चीजें बरामद किए जाने का दावा किया गया।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क में कुछ और लोग काम कर रहे थे, जिनकी तलाश शुरू कर दी गई।

लेकिन कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा वह लग्जरी कार थी, जिसमें बैठकर आरोपी लाखों रुपये के नकली नोट लेकर घूम रहे थे।

कार पर वीआईपी नंबर और लालबत्ती लगी थी।

आरोप था कि इसी दिखावे के सहारे लोगों को प्रभावित किया जाता था और पुलिस की नजर से बचने की कोशिश की जाती थी।

गिरफ्तारी के बाद जब मामले की जानकारी बाहर आई तो कुछ लोग पुलिस के पास अपनी शिकायत लेकर पहुंचे।

उन्होंने बताया कि उन्हें भी ऐसे नोट दिए गए थे, जिन्हें वे असली समझकर आगे इस्तेमाल कर चुके थे।

जांच आगे बढ़ी तो बैंक खातों और पैसों के लेन-देन की भी पड़ताल शुरू हुई।

बरामद नोटों को विशेषज्ञ जांच के लिए भेजा गया। जांच में नोटों के नकली होने की पुष्टि होने के बाद मामला और गंभीर हो गया।

इसके बाद आरोपियों को अदालत में पेश किया गया और न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई।

इस पूरे मामले ने एक अजीब तस्वीर सामने रखी।

जिस युवक ने पढ़ाई के बाद अपना कारोबार खड़ा करने और नई तकनीक के जरिए पहचान बनाने का सपना देखा था, वही कथित तौर पर जल्दी पैसा कमाने के लालच में अपराध के रास्ते पर पहुंच गया।

एक लग्जरी कार, वीआईपी होने का दिखावा और लाखों रुपये की नकली करेंसी ने उसके पूरे राज से पर्दा उठा दिया।

जिस कार को देखकर लोग रास्ता छोड़ देते थे, उसी कार ने आखिरकार पुलिस को उस कथित नकली नोटों के नेटवर्क तक पहुंचा दिया।

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply