हर साल 2 अक्टूबर को देश के ज्यादातर हिस्सों में शराब की दुकानें, बार और रेस्तरां में शराब की बिक्री बंद रहती है. लेकिन सवाल है कि आखिर महात्मा गांधी की जयंती पर ड्राय डे क्यों होता है. यह नियम किसने बनाया? इसका जवाब बापू के विचारों और संविधान की सोच, दोनों में छिपा है.

ड्राई डे वह दिन होता है, जब किसी इलाके में शराब की बिक्री और परोसने पर रोक रहती है. यह रोक आमतौर पर 24 घंटे की होती है. इस दौरान शराब की दुकानें, बार, पब और रेस्तरां शराब नहीं बेच सकते. नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद्द हो सकता है और जुर्माना या कार्रवाई भी हो सकती है.
गांधी जयंती के अलावा स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस को भी ज्यादातर राज्यों में ड्राई डे रहता है. चुनाव के दिनों, मतगणना और कुछ बड़े त्योहारों पर भी ऐसी रोक लगती है.
ड्राय डे का बापू से कनेक्शन
महात्मा गांधी शराब को समाज की सबसे बड़ी बुराइयों में गिनते थे. उनका मानना था कि शराब इंसान की सोचनेसमझने की ताकत छीन लेती है. परिवारों को बर्बाद करती है और गरीब को और गरीब बना देती है. उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान नशाबंदी को आंदोलन का अहम हिस्सा बनाया.
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बापू ने नशाबंदी को आंदोलन का अहम हिस्सा बनाया. फोटो: Getty Images
असहयोग आंदोलन के समय शराब की दुकानों के सामने धरने दिए गए. उनके कार्यक्रम में भी नशाबंदी को शामिल किया गया था. महात्मा गांधी के नाम से यह बात भी अक्सर दोहराई जाती है कि अगर उन्हें कुछ समय के लिए देश की सत्ता मिले, तो वे सबसे पहले शराब की दुकानें बंद कराते. पर भाव यही रहा है कि वे शराब के सख्त खिलाफ थे. यही वजह है कि उनकी जयंती पर उनके विचारों के सम्मान में शराब की बिक्री बंद रखने की परंपरा बनी.
संविधान क्या कहता है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद47 में राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के तहत कहा गया है कि राज्य नशीली शराब और सेहत के लिए हानिकारक नशों के सेवन पर रोक लगाने की दिशा में काम करे. यह कोई बाध्यकारी कानून नहीं है, बल्कि सरकारों के लिए एक दिशा है. महात्मा गांधी जी की सोच का असर इसमें साफ नजर आता है.
भारतीय संविधान.
यह नियम कौन तय करता है?
यह एक दिलचस्प बात है. शराब का मामला संविधान में राज्य सूची का विषय है यानी शराब की बिक्री, लाइसेंस और ड्राई डे तय करने का अधिकार हर राज्य सरकार के पास है. इसलिए पूरे देश में एक जैसा नियम लागू नहीं होता. ज्यादातर राज्यों में गांधी जयंती पर ड्राई डे रहता है. कुछ राज्यों या शहरों में कुछ खास छूट या अलग नियम हो सकते हैं. हर राज्य की आबकारी नीति में ड्राई डे की सूची साल की शुरुआत में जारी होती है.
इसलिए आपके शहर में 2 अक्टूबर को क्या नियम है, यह जानने के लिए राज्य के आबकारी विभाग की सूची देखना सबसे भरोसेमंद तरीका है.
बापू के असहयोग आंदोलन के समय शराब की दुकानों के सामने धरने दिए गए थे.फोटो: Pexels
यहां पहले से पूरी शराबबंदी है
कुछ राज्यों में शराबबंदी पूरे साल लागू है. महात्मा गांधी का गृह राज्य गुजरात इनमें सबसे पुराना उदाहरण है, जहां लंबे समय से शराबबंदी है. बिहार में अप्रैल 2016 से शराबबंदी लागू है. नगालैंड में भी शराब पर रोक का कानून रहा है. लक्षद्वीप में भी शराब की बिक्री पर सख्त पाबंदियां हैं. इन जगहों पर 2 अक्टूबर के लिए अलग से ड्राई डे घोषित करने की जरूरत नहीं पड़ती.
ड्राई डे और सरकारी कमाई
शराब से मिलने वाला आबकारी राजस्व राज्यों की आमदनी का बड़ा हिस्सा होता है. इसी वजह से पूरी शराबबंदी हमेशा बहस का विषय रही है. कुछ लोग इसे सामाजिक सुधार का कदम मानते हैं, जबकि दूसरे इसे राजस्व के नुकसान और अवैध शराब के कारोबार को बढ़ावा मिलने के जोखिम से जोड़ते हैं.
2 अक्टूबर को सिर्फ गांधी जयंती नहीं है. संयुक्त राष्ट्र ने 2007 में इस दिन को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया था. भारत में यह पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन भी है. इस दिन को राष्ट्रीय अवकाश के तौर पर सम्मान और सादगी के साथ मनाने की सोच भी ड्राई डे से जुड़ी है.



