Shahjahanpur News: शाहजहांपुर में मंदिर परिसर में दो संतों की हत्या के बाद शवों को जलाए जाने की घटना से हड़कंप मच गया. वारदात की जानकारी तब हुई, जब सुबह ग्रामीण मंदिर पहुंचे. वहां बरामदे में दोनों संतों के जले हुए कंकाल पड़े थे. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित समेत कई अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. एडीजी बरेली रेंज रमित शर्मा और डीआईजी अजय साहनी भी मौके पर पहुंचे. पुलिस ने आरोपी सुमित सिंह को हिरासत में लिया है. पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने पूछताछ में वारदात कबूल की है.

रॉड से हमला कर संतों की हत्या
मंदिर में रहने वाले बाबा गोपाल दास और बाबा बिहारी दास गुरुचेले थे. दोनों मंदिर के बरामदे में रहते थे. आरोप है कि रात में सुमित सिंह ने दोनों पर रॉड से हमला कर दिया. हमले में दोनों संतों की मौत हो गई. इसके बाद आरोपी ने दोनों शवों को मंदिर परिसर में ही एक तख्त पर रखा और उनके ऊपर लकड़ियां रखकर आग लगा दी. सुबह जब ग्रामीण मंदिर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए. दोनों संतों के शव पूरी तरह जल चुके थे और मौके पर कंकाल पड़े थे. ग्रामीणों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी. इसके बाद पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए.
मंदिर की जमीन को लेकर विवाद
पुलिस की शुरुआती जांच में वारदात के पीछे मंदिर की जमीन का विवाद सामने आया है. मंदिर के संरक्षक शिवकुमार सिंह फौजी के मुताबिक, जिस जमीन पर मंदिर बना है, वह शामिल खाते की जमीन है. इसमें आरोपी सुमित सिंह के पिता विष्णु सिंह का भी हिस्सा बताया जा रहा है. इसी जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद चल रहा था. मृतक बाबा बिहारी दास के भाई श्रीकृष्ण सिंह ने भी जमीन विवाद को हत्या की वजह बताया है. उनका आरोप है कि सुमित सिंह पहले भी उनके भाई को कई बार धमकी दे चुका था. वह कहता था कि जमीन और मंदिर उनका है और संतों को वहां रहने नहीं दिया जाएगा.
दोनों संतों का जमीन विवाद से कोई लेनादेना नहीं
बाबा बिहारी दास के परिजन भी घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे. उनकी बहनों ने बताया कि उनके भाई का किसी से कोई विवाद नहीं था. उनका स्वभाव बेहद सरल था. बचपन में ही एक घटना के बाद वह संत बन गए थे और गांव के बाहर स्थित इसी मंदिर परिसर में रहने लगे थे. परिजनों का कहना है कि बाबा बिहारी दास और बाबा गोपाल दास का जमीन के विवाद से कोई लेनादेना नहीं था. इसके बावजूद दोनों को निशाना बनाया गया. परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि सुमित सिंह पहले से बाबा बिहारी दास को धमकाता था.
भाई का आरोप सुमित के साथ पिता भी हत्या में शामिल
मृतक बाबा बिहारी दास के भाई श्रीकृष्ण सिंह ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि सुमित सिंह और उसके पिता विष्णु सिंह ने मिलकर दोनों संतों की हत्या की है. हालांकि पुलिस ने फिलहाल सुमित सिंह को ही गिरफ्तार किया है. श्रीकृष्ण सिंह का आरोप है कि उन्होंने पुलिस को अलग से तहरीर दी, लेकिन उस पर मुकदमा दर्ज नहीं किया गया. उनका कहना है कि मंदिर के संरक्षक और आरोपी के सगे ताऊ की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया, लेकिन उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने मांग की है कि उनकी तहरीर के आधार पर भी मुकदमा दर्ज किया जाए और विष्णु सिंह के खिलाफ कार्रवाई हो.
ग्रामीणों का कहना है कि सुमित सिंह का पहले से भी विवादों से नाता रहा है. ग्रामीणों के मुताबिक, वह गांव में लोगों से मारपीट और झगड़े करता रहा है. एक ग्रामीण की स्विफ्ट कार में आग लगाने का आरोप भी उस पर लगाया गया है. ग्रामीणों का दावा है कि सुमित हाल ही में जेल से छूटकर गांव वापस आया था. हालांकि, इन पुराने आरोपों की पुलिस जांच और उनका वर्तमान मामले से संबंध अलग से स्पष्ट किया जाना बाकी है.
जन्माष्टमी पर दोनों संतों ने किया था कार्यक्रम में हिस्सा
ग्रामीणों के मुताबिक, बीती जन्माष्टमी पर इसी मंदिर में कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इसमें बाबा गोपाल दास और बाबा बिहारी दास ने भी हिस्सा लिया था. दोनों संत भजन संध्या में शामिल हुए थे. ग्रामीणों का कहना है कि दोनों संत सामान्य तरीके से मंदिर में रहते थे और उनका किसी से विवाद नहीं था.
घटना के बाद पुलिस ने आरोपी सुमित सिंह को हिरासत में ले लिया है. अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर मामले की जांच शुरू कर दी है. पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और वारदात में इस्तेमाल हथियार समेत अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है. एडीजी बरेली रेंज रमित शर्मा भी मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से घटना की जानकारी ली. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हत्या की पूरी वारदात कैसे हुई और इसमें कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं.



