
सर्दियों का मौसम आते ही लाल-लाल, रसीली गाजरें बाजार में छा जाती हैं। सलाद में कच्ची गाजर का क्रंच हो या फिर सब्जी और सूप में उबली हुई गाजर का स्वाद, यह सब्जी हर रूप में सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गाजर को कच्चा खाना ज्यादा फायदेमंद है या फिर उसे उबालकर (Boiled) खाना? अक्सर लोग मानते हैं कि सब्जियों को पकाने या उबालने से उनके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, लेकिन गाजर के मामले में विज्ञान और आयुर्वेद का गणित थोड़ा अलग है।
एम्स के पूर्व कंसल्टेंट और साओल हार्ट सेंटर के फाउंडर एंड डायरेक्टर डॉ बिमल झाजर के मुताबिक गाजर मीठी और क्रेंची सब्जी है जिसमें गुण ही गुण है। इस सब्जी में कैलोरी कम और पानी ज्यादा होता है जो वजन कंट्रोल करने में असरदार होती है। गाजर में मौजूद मुख्य पोषक तत्व जैसे बीटा-कैरोटीन (Beta-Carotene), जो शरीर में जाकर विटामिन A में बदलता है उबलने के बाद शरीर द्वारा और भी आसानी से अवशोषित (Absorb) होता है, जबकि कच्ची गाजर में विटामिन C और फाइबर की मात्रा भरपूर बनी रहती है।
2002 में हुई एक रिसर्च में शोधकर्ताओं ने पाया कि पकी हुई गाजर खाने से वास्तव में शरीर में अवशोषित होने वाले बीटा-कैरोटीन की मात्रा बढ़ जाती है। यह आंखों की रोशनी, स्किन और इम्यूनिटी के लिए बहुत फायदेमंद है। आइए जानते हैं कच्ची और पक्की गाजर का सेवन कैसे सेहत पर असर करता है। किसका सेवन करने से बॉडी को ज्यादा फायदा मिलता है।
कच्ची गाजर का सेवन कैसे सेहत पर करता है असर?
कच्ची गाजर खाने में कुरकुरी लगती है। इसमें नेचुरल शुगर होती है जिसे डायबिटीज मरीज भी खा सकते हैं। कच्ची गाजर में अघुलनशील फाइबर होता है जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है। इस गाजर को खाने से आंत की सेहत दुरुस्त रहती है। कच्ची गाजर में एंजाइम होते हैं जो शरीर को फायदा पहुंचाते हैं। कच्ची गाजर फाइबर, बीटा-कैरोटीन और पोटैशियम जैसे पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है। गाजर का नारंगी रंग बीटा-कैरोटीन की वजह से होता है, जिसे शरीर विटामिन ए में बदलता है। यह आंखों की रोशनी बढ़ाने और इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने में असरदार साबित होती है। गाजर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट यौगिक शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसमें प्राकृतिक शुगर भी होती है, इसलिए डायबिटीज वाले लोग इसे डाइट में शामिल कर सकते हैं, लेकिन मात्रा और अपनी कुल डाइट का ध्यान रखना जरूरी है।
पकी हुई गाजर का सेवन कैसे सेहत पर असर करता है?
पकी हुई गाजर खाने से भी शरीर को कई पोषक तत्व मिलते हैं। पकाने से गाजर की कोशिकाओं की संरचना नरम हो जाती है, जिससे इसमें मौजूद बीटा-कैरोटीन को शरीर के लिए अवशोषित करना आसान हो सकता है। बीटा-कैरोटीन शरीर में विटामिन A में बदलता है, जो आंखों की सामान्य सेहत और इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी है। हालांकि, ज्यादा देर तक या बहुत तेज तापमान पर पकाने से उसके तत्वों की मात्रा कम हो सकती है। इसलिए गाजर को हल्का उबालना, भाप में पकाना या कम समय तक पकाना बेहतर विकल्प माना जा सकता है।
कच्ची और पकी हुई दोनों में कौन सी गाजर का सेवन ज्यादा बेहतर
कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि गाजर सेहत के लिए बेहद उपयोगी और गुणों का खजाना है। कच्ची गाजर में अघुलनशील फाइबर (Insoluble Fibre) पाया जाता है, जो पाचन और आंतों की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। जबकि भुनी या भाप में पकी हुई नर्म गाजर लोगों के लिए खाना आसान होती है, लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि सलाद में कच्ची गाजर शामिल करने से आपको ज्यादा पोषक तत्व मिलेंगे और गाजर को पकाने से उसका पोषण कम हो जाएगा, ये सोच पूरी तरह सही नहीं है।
कच्ची और पक्की हुई दोनों गाजर पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं, लेकिन गाजर को पकाने से कुछ पोषक तत्वों को शरीर के लिए अधिक आसानी से उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। गाजर बीटा-कैरोटीन से भरपूर होती है, जो शरीर में विटामिन ए में परिवर्तित होने वाला एक यौगिक है। गाजर को पकाने, खासकर भाप में पकाने या उबालने से उसकी कठोर कोशिका संरचना टूटने लगती है। इससे बीटा-कैरोटीन शरीर के लिए अधिक आसानी से अवशोषित होने योग्य हो जाता है। गाजर का सेवन आप कच्चा और पकाकर दोनों तरह से कर सकते हैं, दोनों तरह गाजर का सेवन फायदेमंद साबित होता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी और सुझाव केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए हैं। यह किसी भी तरह से पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान (Diagnosis) या इलाज का विकल्प नहीं है। अपनी Diet में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले या अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर या प्रमाणित न्यूट्रिशनिस्ट से परामर्श अवश्य लें।



