
अस्पताल की फार्मेसी से दवा खरीदते समय मरीजों और उनके परिजनों के लिए अब दवा की कीमत से जुड़ी जानकारी ज्यादा पारदर्शी बनाने की तैयारी है। उत्तर प्रदेश में फार्मेसियों को दवाओं की खरीद और बिक्री से जुड़ी जरूरी जानकारी सार्वजनिक करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस व्यवस्था के तहत मरीज यह जान सकेंगे कि किसी दवा को फार्मेसी ने किस कीमत पर खरीदा और उसे ग्राहक को किस कीमत पर बेचा जा रहा है। इसका उद्देश्य दवाओं की कीमतों को लेकर पारदर्शिता बढ़ाना और मरीजों के हितों की रक्षा करना है।
वेबसाइट पर दिखानी होगी दवा की कीमत से जुड़ी जानकारी
अस्पताल परिसर में चलने वाली या मरीजों के लिए दवा उपलब्ध कराने वाली फार्मेसियों को अपनी वेबसाइट पर दवाओं से संबंधित कई जानकारियां उपलब्ध करानी होंगी।
इनमें दवा बनाने वाली कंपनी का नाम, ब्रांड नाम, जेनेरिक नाम, प्राइस टू रिटेल यानी PTR और प्राइस टू कंज्यूमर यानी PTC जैसी जानकारी शामिल होगी।
PTR वह कीमत है जिस पर फार्मेसी दवा निर्माता या मार्केटर से खरीदती है, जबकि PTC वह कीमत है जिस पर दवा मरीज को बेची जाती है। इससे ग्राहक दोनों कीमतों के बीच का अंतर समझ सकेंगे।
हर रिटेल फार्मेसी को बनानी होगी पब्लिक वेबसाइट
नई व्यवस्था के तहत रिटेल फार्मेसियों को अपनी सार्वजनिक वेबसाइट पर फार्मेसी से जुड़ी जरूरी जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी।
वेबसाइट पर फार्मेसी का नाम, लाइसेंस नंबर, लाइसेंस धारक का नाम और परिसर का पता जैसी जानकारी दी जानी होगी। इसके अलावा वहां काम करने वाले फार्मासिस्ट का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर और फोटो भी उपलब्ध कराने का प्रावधान बताया गया है।
फार्मेसी को अपने स्टॉक से जुड़ी जानकारी भी नियमित रूप से अपडेट करनी होगी।
काउंटर पर लगाया जाएगा QR कोड
मरीजों और ग्राहकों को वेबसाइट तक आसानी से पहुंचाने के लिए फार्मेसी काउंटर पर वेबसाइट का पता प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा।
इसके साथ QR कोड या अन्य डिजिटल माध्यम से भी ग्राहकों को ऑनलाइन जानकारी तक पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी। इससे मरीज मोबाइल फोन से दवा और फार्मेसी से संबंधित जानकारी देख सकेंगे।
दवा की कीमतों से जुड़े नियमों का पालन जरूरी
फार्मेसियों को दवाओं की कीमत से जुड़े मौजूदा नियमों का भी पालन करना होगा। संबंधित प्रावधानों के तहत दवा की मूल्य सूची ऐसी जगह प्रदर्शित करने की व्यवस्था है, जहां ग्राहक उसे आसानी से देख सकें।
अधिकारियों के अनुसार अस्पतालों और संस्थानों की फार्मेसियों में भी कीमत संबंधी जानकारी को पारदर्शी रखना जरूरी है।
खरीद और बिक्री कीमत में अंतर पर नजर
जांच के दौरान कुछ मामलों में यह बात सामने आने का दावा किया गया कि अस्पतालों को दवाएं काफी कम कीमत पर मिल रही थीं, जबकि मरीजों से उनकी बिक्री कीमत काफी अधिक वसूली जा रही थी।
विभाग का कहना है कि संस्थागत खरीद पर मिलने वाले लाभ का फायदा मरीजों तक पहुंचना चाहिए। साथ ही दवाओं की खरीद कीमत और अधिकतम खुदरा मूल्य के बीच असामान्य अंतर होने पर दवा की गुणवत्ता और उसकी वैधता को लेकर भी जांच की जरूरत पड़ सकती है।
यह कीमत तय करने का आदेश नहीं
अधिकारियों की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य अस्पताल या फार्मेसी की दवा की बिक्री कीमत को सीधे नियंत्रित करना नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य दवाओं की खरीद और बिक्री से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक करना है।
नई व्यवस्था से मरीजों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि दवा किस कीमत पर खरीदी गई और उन्हें किस कीमत पर दी जा रही है। इससे दवा बिक्री की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और मरीजों के हितों की बेहतर सुरक्षा की उम्मीद है।



