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आंगनवाड़ी से 12वीं तक पढ़ाई, अब गांव के बच्चों को पढ़ा रही करिश्मा.

आंगनवाड़ी से 12वीं तक पढ़ाई, अब गांव के बच्चों को पढ़ा रही करिश्मा.

किसी बच्चे की शुरुआती शिक्षा और सही देखभाल उसके पूरे भविष्य की दिशा बदल सकती है। गुजरात के आणंद जिले के मेहलाव गांव की करिश्मा की कहानी इसका एक उदाहरण है। कभी आंगनवाड़ी में खेल-खेल में पढ़ाई की शुरुआत करने वाली करिश्मा ने आगे चलकर 12वीं कक्षा तक अपनी पढ़ाई पूरी की। अब वह अपने गांव के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर उनके भविष्य को बेहतर बनाने में योगदान दे रही हैं।

आंगनवाड़ी से हुई पढ़ाई की शुरुआत

करिश्मा के माता-पिता ने बचपन में उन्हें गांव की आंगनवाड़ी में भेजना शुरू किया था। वहां पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों की साफ-सफाई, पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी आदतों पर भी ध्यान दिया जाता था।

करिश्मा के मुताबिक, आंगनवाड़ी में उन्हें खेल-खेल में पढ़ाया जाता था। साफ पानी पीने, खाना खाने से पहले हाथ धोने और स्वच्छता का ध्यान रखने जैसी जरूरी बातें भी बचपन से सिखाई गईं। बच्चों को पौष्टिक भोजन भी दिया जाता था, जिसमें खिचड़ी और सुखड़ी जैसी चीजें शामिल थीं।

उन्होंने बताया कि आंगनवाड़ी में बच्चों की देखभाल बेहद प्यार और ध्यान से की जाती थी। इससे उन्हें पढ़ाई के साथ एक अच्छा और सुरक्षित माहौल भी मिला।

आर्थिक सहायता से पढ़ाई जारी रखने में मिली मदद

आंगनवाड़ी के बाद करिश्मा ने स्कूल की पढ़ाई जारी रखी और मेहनत करके 12वीं कक्षा पास की। उनके मुताबिक, बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता ने भी उनकी पढ़ाई जारी रखने में मदद की।

करिश्मा ने बताया कि उन्हें हर महीने 700 रुपये की आर्थिक सहायता मिलती थी। उनके लिए यह मदद महत्वपूर्ण थी और इससे पढ़ाई का खर्च संभालने में सहारा मिला।

अब गांव के बच्चों को दे रही हैं ट्यूशन

12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद करिश्मा ने आगे बढ़ने का एक अलग रास्ता चुना। उन्होंने अपने गांव के छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि उन्होंने आंगनवाड़ी और स्कूल में जो कुछ सीखा, अब वही ज्ञान वह दूसरी पीढ़ी के बच्चों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं।

करिश्मा का मानना है कि हर माता-पिता को अपने बच्चों को आंगनवाड़ी भेजना चाहिए। शुरुआती उम्र में बच्चों को शिक्षा, पोषण और स्वच्छता का सही माहौल मिलने से उनके व्यक्तित्व और भविष्य की मजबूत नींव तैयार हो सकती है।

एक बेटी की कहानी, जो दूसरों के लिए बनी मिसाल

करिश्मा की कहानी यह दिखाती है कि अगर बच्चों को बचपन से ही शिक्षा, पोषण और सही मार्गदर्शन मिले तो उनके लिए आगे बढ़ने के रास्ते खुल सकते हैं। आंगनवाड़ी से शुरू हुआ उनका सफर

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