
नई दिल्ली: हमारी आंतों में मौजूद खरबों सूक्ष्मजीव यानी गट माइक्रोबायोम सिर्फ पाचन प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करते, बल्कि शरीर की इम्यूनिटी, मेटाबॉलिज्म और कई अन्य जैविक प्रक्रियाओं में भी भूमिका निभाते हैं। वैज्ञानिक अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आंतों के बैक्टीरिया और दिमाग के बीच मौजूद संबंध यानी गट-ब्रेन एक्सिस न्यूरोलॉजिकल बीमारियों को किस तरह प्रभावित कर सकता है।
एक नए अध्ययन में आंतों के कुछ बैक्टीरिया से बनने वाले रसायन इमिडाजोल प्रोपियोनेट (Imidazole Propionate) और अल्जाइमर से जुड़े कुछ जैविक बदलावों के बीच संबंध पाया गया है। हालांकि, शोध से यह साबित नहीं होता कि यह रसायन अल्जाइमर रोग का कारण है। इस संबंध को समझने के लिए अभी और शोध की जरूरत है।
क्या है इमिडाजोल प्रोपियोनेट?
इमिडाजोल प्रोपियोनेट एक छोटा मॉलिक्यूल है, जिसे आंतों में मौजूद कुछ बैक्टीरिया प्रोटीन में पाए जाने वाले एक अमीनो एसिड के मेटाबॉलिज्म के दौरान बना सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने इंसानों और चूहों में इसके संभावित प्रभावों का अध्ययन किया। इंसानों में खून में इस रसायन के अधिक स्तर और अल्जाइमर से जुड़े कुछ जैविक संकेतकों के बीच संबंध देखा गया।
करीब 1,200 लोगों के डेटा में क्या मिला?
अध्ययन में 1,196 ऐसे वयस्कों को शामिल किया गया, जिन्हें अध्ययन के समय याददाश्त या सोचने-समझने से जुड़ी कोई स्पष्ट समस्या नहीं थी।
शोधकर्ताओं ने पाया कि खून में ImP का स्तर अधिक होने वाले कुछ प्रतिभागियों ने याददाश्त और सोचने-समझने से जुड़े परीक्षणों में अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन किया। इनमें अल्जाइमर से जुड़े कुछ जैविक संकेत भी अधिक देखे गए।
शोध में आंतों के कुछ ऐसे बैक्टीरिया की भी पहचान की गई जो ImP बनाने से जुड़े थे।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है—किसी रसायन और बीमारी के बीच संबंध मिलना यह साबित नहीं करता कि वही रसायन बीमारी का कारण है। इसलिए खून में ImP का स्तर ज्यादा होने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को भविष्य में अल्जाइमर जरूर होगा।
चूहों पर प्रयोग में क्या सामने आया?
इस संभावित संबंध को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने चूहों पर भी प्रयोग किए। लंबे समय तक ImP के संपर्क में रहने वाले चूहों में अल्जाइमर से जुड़े कुछ जैविक बदलाव देखे गए।
इनमें बीटा-एमिलॉयड और टाऊ प्रोटीन से संबंधित बदलाव शामिल थे। अल्जाइमर में बीटा-एमिलॉयड दिमाग में जमा होकर प्लाक बना सकता है, जबकि असामान्य टाऊ प्रोटीन तंत्रिका कोशिकाओं के भीतर उलझी हुई संरचनाओं से जुड़ा होता है।
शोधकर्ताओं को यह संकेत भी मिले कि ImP का संबंध ब्लड-ब्रेन बैरियर में होने वाले बदलावों से हो सकता है।
क्या होता है ब्लड-ब्रेन बैरियर?
ब्लड-ब्रेन बैरियर दिमाग की एक महत्वपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था है। यह नियंत्रित करती है कि खून में मौजूद कौन-से पदार्थ दिमाग के ऊतकों तक पहुंच सकते हैं।
इस सुरक्षा प्रणाली में बदलाव या इसकी कमजोरी को उम्र बढ़ने और कुछ न्यूरोलॉजिकल स्थितियों से जुड़ी प्रक्रियाओं के साथ देखा गया है। हालांकि, ImP और ब्लड-ब्रेन बैरियर के बीच संबंध को पूरी तरह समझने के लिए अभी और अध्ययन जरूरी हैं।
क्या प्रोबायोटिक्स लेने से अल्जाइमर से बच सकते हैं?
अभी ऐसा कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है कि किसी खास प्रोबायोटिक या एक-दो तरह के बैक्टीरिया का सेवन करने से अल्जाइमर का खतरा कम किया जा सकता है।
गट माइक्रोबायोम बेहद जटिल होता है। इसमें मौजूद अलग-अलग बैक्टीरिया आपस में और शरीर के साथ कई तरह से प्रतिक्रिया करते हैं। इसलिए सिर्फ किसी एक बैक्टीरिया को बढ़ाने या घटाने से पूरे माइक्रोबायोम पर क्या असर पड़ेगा, यह निश्चित रूप से कहना संभव नहीं है।
इसी तरह, इस अध्ययन में ऐसा कोई विशेष भोजन या डाइट नहीं बताई गई है जो शरीर से ImP को पूरी तरह खत्म कर सके।
अल्जाइमर के प्रमुख जोखिम कारक क्या हैं?
अल्जाइमर को किसी एक बैक्टीरिया या रसायन से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। उम्र बढ़ना इसका सबसे प्रमुख ज्ञात जोखिम कारक है। इसके अलावा आनुवंशिक कारक, हृदय और रक्त वाहिकाओं की सेहत तथा जीवनशैली से जुड़े कई पहलू भी भूमिका निभा सकते हैं।
हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, शारीरिक निष्क्रियता, धूम्रपान, नींद की समस्या और संपूर्ण स्वास्थ्य जैसे कारकों पर ध्यान देना दिमाग और शरीर दोनों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।
गट-ब्रेन कनेक्शन पर अभी और रिसर्च की जरूरत
यह अध्ययन आंतों के माइक्रोबायोम और दिमाग के बीच संभावित संबंध को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक संकेत दे सकता है। अब शोधकर्ताओं के सामने कई सवाल हैं—कौन से बैक्टीरिया ज्यादा ImP बनाते हैं, वे ऐसा क्यों करते हैं और शरीर में इस रसायन की मात्रा किन परिस्थितियों में बढ़ती है।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अगर शरीर में ImP का स्तर कम किया जाए, तो क्या अल्जाइमर से जुड़े मस्तिष्क के बदलावों में वास्तव में कमी आती है। इसका जवाब भविष्य के अध्ययनों से ही मिल सकेगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख वैज्ञानिक शोध के निष्कर्षों पर आधारित सामान्य स्वास्थ्य जानकारी है। अध्ययन में इमिडाजोल प्रोपियोनेट और अल्जाइमर से जुड़े कुछ जैविक बदलावों के बीच संबंध पाया गया है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि ImP अल्जाइमर का कारण है या इसे कम करने से बीमारी को रोका जा सकता है। किसी भी सप्लीमेंट, प्रोबायोटिक या उपचार को डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू न करें।



