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पाकिस्तान में हर हफ्ते लगती है ‘छोकरा मंडी’! नाबालिग लड़कों की लगती है बोली, जानें कौन खरीदता है इन्हें और क्या है पूरा मामला.

पाकिस्तान में हर हफ्ते लगती है ‘छोकरा मंडी’! नाबालिग लड़कों की लगती है बोली, जानें कौन खरीदता है इन्हें और क्या है पूरा मामला.

पाकिस्तान: खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कुछ इलाकों में नाबालिग लड़कों के यौन शोषण और मानव तस्करी से जुड़ी कथित गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर ‘बाचा बाजी’ के नाम से पहचानी जाने वाली इस कुप्रथा में बच्चों को कथित तौर पर नाच-गाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है और बाद में उनका यौन शोषण किया जाता है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस तरह के अपराधों के खिलाफ आवाज उठाई है और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

किन इलाकों में सामने आते हैं ऐसे मामले?

मीडिया रिपोर्टों और स्थानीय खबरों के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू, स्वाबी, डेरा इस्माइल खान, करक और लक्की मरवत सहित कुछ इलाकों में इस तरह के शोषण की शिकायतें सामने आती रही हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कुछ स्थानों पर शुक्रवार और रविवार को कथित तौर पर ऐसी अवैध गतिविधियां होती हैं। हालांकि, इन कथित बाजारों के संचालन और उनके मौजूदा स्वरूप से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

क्या है ‘बाचा बाजी’?

‘बाचा बाजी’ एक ऐसी शोषणकारी प्रथा के तौर पर जानी जाती है, जिसमें कम उम्र के लड़कों को निशाना बनाया जाता है। आरोप है कि प्रभावशाली लोग गरीब परिवारों के बच्चों को अपने नियंत्रण में लेकर उनका यौन शोषण करते हैं। कुछ मामलों में बच्चों को महफिलों में नचाने और मनोरंजन के लिए इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। यह मामला बच्चों के अधिकारों, उनकी सुरक्षा और मानव तस्करी से जुड़े गंभीर अपराधों के दायरे में आता है।

गरीबी और मजबूरी बनती है बच्चों की कमजोरी

ऐसी घटनाओं में आर्थिक तंगी, सामाजिक असुरक्षा और शिक्षा के अवसरों की कमी बच्चों को अधिक जोखिम में डाल सकती है। आरोप है कि बिचौलिए गरीब परिवारों की मजबूरी का फायदा उठाकर बच्चों को शोषण के जाल में फंसाते हैं। कुछ मामलों में परिवारों पर आर्थिक दबाव का भी उल्लेख किया गया है। बच्चों को बहला-फुसलाकर ले जाना, उनकी खरीद-फरोख्त करना या उन्हें यौन शोषण के लिए मजबूर करना गंभीर अपराध हैं और इनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।

रिपोर्ट में पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ के हवाले से छह महीनों में बच्चों के खिलाफ अपराध के 1,914 मामले दर्ज होने का दावा किया गया है, जिनमें 1,015 से अधिक मामले कथित तौर पर यौन उत्पीड़न से जुड़े बताए गए हैं। इन आंकड़ों की संबंधित रिपोर्ट और अवधि के आधार पर पुष्टि की जानी चाहिए।

कानून होने के बावजूद कार्रवाई पर सवाल

पाकिस्तान में मानव तस्करी रोकने के लिए वर्ष 2018 में Prevention of Trafficking in Persons Act लागू किया गया था। इस कानून के तहत मानव तस्करी से जुड़े अपराधों के लिए सजा का प्रावधान है। इसके बावजूद बच्चों के शोषण से जुड़े आरोप यह सवाल उठाते हैं कि कानूनों को जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है।

ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने के लिए निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, पीड़ित बच्चों का पुनर्वास और उनकी पहचान व सुरक्षा की रक्षा बेहद जरूरी है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों की भूमिका भी अहम है, ताकि पीड़ित बच्चे बिना डर के मदद मांग सकें।

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध मीडिया विवरणों और लगाए गए आरोपों पर आधारित है। कथित मंडियों के संचालन और दिए गए आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना सभी दावों को स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

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