
बलिया: अपनी जड़ों की तलाश इंसान को हजारों किलोमीटर दूर भी खींच ला सकती है। ऐसा ही भावुक मामला उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से सामने आया, जहां कनाडा में रहने वाला 75 वर्षीय बुजुर्ग और उनकी पत्नी करीब 12,000 किलोमीटर का सफर तय करके अपने पूर्वजों का गांव खोजने पहुंचे। अपने पुश्तैनी गांव की मिट्टी और पुरानी यादों से जुड़ी जगह को देखकर दोनों भावुक हो गए।
1871 के पुराने दस्तावेज ने दिखाई राह
रिपोर्ट के मुताबिक, इस बुजुर्ग कपल के पास वर्ष 1871 का एक पुराना दस्तावेज था। इसी ऐतिहासिक कागज में दर्ज जानकारी के सहारे उन्होंने अपने परिवार की जड़ों को तलाशना शुरू किया। बताया गया है कि उनके पूर्वजों को मजदूर के रूप में कनाडा भेजा गया था, जिसके बाद परिवार की कई पीढ़ियां वहीं बस गईं।
बलिया के गांव तक पहुंचने का सफर
अपने पुरखों की जन्मभूमि खोजते हुए यह कपल उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की खरसरा ग्राम पंचायत के बेलौना टोला गांव पहुंचा। लंबे समय से जिस जगह के बारे में उन्होंने दस्तावेजों और पारिवारिक इतिहास के जरिए जाना था, उसे अपनी आंखों से देखना उनके लिए बेहद भावुक पल बन गया।
पुरखों की मिट्टी से जुड़ा रिश्ता
समय बीतने और कई पीढ़ियां विदेश में रहने के बावजूद अपने पूर्वजों की जन्मभूमि से जुड़ाव इस कपल को भारत खींच लाया। उनकी यह यात्रा बताती है कि परिवार का इतिहास केवल पुराने कागजों में दर्ज नामों तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह लोगों की पहचान और भावनाओं से भी जुड़ा रहता है।
करीब 155 साल पुराने दस्तावेज के सहारे अपने पुरखों के गांव तक पहुंचने की यह कहानी अब लोगों का ध्यान खींच रही है।



