
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अपनी धार्मिक पहचान और जाति बदले बिना शादी करने वाले जोड़ों के लिए विशेष विवाह अधिनियम एक अहम विकल्प बन रहा है। इस कानून के तहत वर्ष 2026 में जनवरी से अक्टूबर की शुरुआत तक 28 जोड़े विवाह कर चुके हैं। इस व्यवस्था के जरिए अलग-अलग धर्मों और जातियों के वयस्क अपनी पहचान बनाए रखते हुए कानूनी रूप से शादी कर सकते हैं।
प्रयागराज के कलेक्ट्रेट स्थित एडीएम वित्त एवं राजस्व कार्यालय में भी हाल ही में एक जोड़े ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी की। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, शहर में पिछले कुछ वर्षों से इस कानून के जरिए विवाह करने वाले जोड़ों की संख्या लगातार दर्ज की जा रही है।
तीन साल के आंकड़ों में क्या सामने आया?
प्रयागराज में विशेष विवाह अधिनियम के तहत हुई शादियों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2023 में 15 जोड़ों ने इस प्रक्रिया से विवाह किया था। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 28 हो गई, जबकि 2025 में 21 जोड़ों ने इस कानूनी व्यवस्था को अपनाया।
वहीं, 2026 में जनवरी से अक्टूबर की शुरुआत तक 28 जोड़े इस कानून के तहत शादी कर चुके हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि विशेष विवाह अधिनियम शहर में अपनी पसंद से विवाह करने वाले जोड़ों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी विकल्प बना हुआ है।
क्या है विशेष विवाह अधिनियम?
विशेष विवाह अधिनियम, 1954 भारत का एक कानून है, जिसके तहत निर्धारित कानूनी शर्तें पूरी करने वाले लोग बिना धर्म परिवर्तन किए विवाह कर सकते हैं। यह उन जोड़ों के लिए भी विकल्प है, जिनकी धार्मिक या सामाजिक पृष्ठभूमि अलग-अलग है।
इस कानून के तहत शादी करने के लिए जोड़े को संबंधित विवाह अधिकारी के कार्यालय में आवेदन देना होता है। सामान्य प्रक्रिया में विवाह का नोटिस जारी किया जाता है और निर्धारित 30 दिन की अवधि पूरी होने के बाद, यदि कोई कानूनी बाधा नहीं होती, तो विवाह की आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
स्पेशल मैरिज के लिए क्या है प्रक्रिया?
विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी करने के लिए कुछ कानूनी औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं।
- जोड़े को संबंधित विवाह अधिकारी के कार्यालय में आवेदन देना होता है।
- निर्धारित नियमों के अनुसार विवाह का नोटिस जारी किया जाता है।
- सामान्य प्रक्रिया में नोटिस के बाद 30 दिन की अवधि लागू होती है।
- कानूनी शर्तें पूरी होने पर जोड़े को गवाहों के साथ विवाह अधिकारी के सामने उपस्थित होना होता है।
- आवश्यक घोषणाओं और हस्ताक्षरों के बाद विवाह संपन्न कराया जाता है।
विवाह की प्रक्रिया में दोनों पक्षों की कानूनी पात्रता और लागू नियमों का पालन जरूरी है। किसी विशेष मामले में आवश्यक दस्तावेजों और प्रक्रिया की जानकारी संबंधित विवाह अधिकारी से प्राप्त की जा सकती है।
अपनी पहचान बनाए रखने का मिलता है विकल्प
विशेष विवाह अधिनियम की खासियत यह है कि इसके तहत विवाह करने के लिए केवल शादी की वजह से धर्म बदलना जरूरी नहीं होता। इससे अलग-अलग धार्मिक या सामाजिक पृष्ठभूमि के वयस्कों को कानून के दायरे में विवाह करने का विकल्प मिलता है।
प्रयागराज में 2026 के दौरान अब तक दर्ज 28 विवाह इस कानूनी व्यवस्था के इस्तेमाल को दर्शाते हैं। हालांकि, केवल इन आंकड़ों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि शहर में ऐसे विवाहों का चलन हर साल लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि पिछले वर्षों में संख्या में उतार-चढ़ाव भी देखा गया है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट में प्रकाशित जानकारी और आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है। विवाह की पात्रता, नोटिस प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों से संबंधित नवीनतम जानकारी के लिए संबंधित विवाह अधिकारी या आधिकारिक सरकारी स्रोत से पुष्टि करें।



