
गले में बलगम जमा होना, बार-बार गला साफ करने की जरूरत महसूस होना या सुबह उठते ही खांसी आना कई लोगों की आम परेशानी है। बलगम यानी म्यूकस शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा है। यह नाक, गले और सांस की नलियों को नम रखने के साथ धूल, कीटाणुओं और दूसरे बाहरी कणों को बाहर निकालने में मदद करता है। लेकिन जब बलगम ज्यादा महसूस होने लगे या गाढ़ा होकर गले में अटकने लगे, तो रोजमर्रा के कामों में परेशानी हो सकती है।
सर्दी-जुकाम, एलर्जी, साइनस की समस्या और नाक से गले की ओर म्यूकस बहने जैसी स्थितियां इसकी वजह हो सकती हैं। कुछ लोगों को खानपान की कुछ चीजों से भी परेशानी महसूस होती है। हालांकि, यह मानना सही नहीं है कि हर व्यक्ति में कुछ खास खाद्य पदार्थ सीधे बलगम का उत्पादन बढ़ाते हैं। आइए जानते हैं किन चीजों पर ध्यान देना चाहिए और राहत पाने के लिए क्या किया जा सकता है।
1. दूध और डेयरी उत्पाद
दूध, पनीर, दही और चीज जैसे डेयरी उत्पादों को अक्सर बलगम बढ़ने से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण यह साबित नहीं करते कि दूध सामान्य रूप से शरीर में बलगम का उत्पादन बढ़ाता है।
कुछ लोगों को दूध पीने के बाद मुंह या गले में गाढ़ी परत जैसा एहसास हो सकता है। यह दूध की बनावट के कारण भी हो सकता है, न कि वास्तव में बलगम बनने की मात्रा बढ़ने के कारण।
अगर आपको लगता है कि किसी खास डेयरी उत्पाद से परेशानी बढ़ती है, तो अपने लक्षणों पर ध्यान दें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से सलाह लें। बिना कारण दूध और दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है।
2. ज्यादा चीनी और पैकेटबंद खाद्य पदार्थ
मिठाइयां, मीठे पेय, बिस्कुट और ज्यादा चीनी वाले पैकेटबंद खाद्य पदार्थ सीमित मात्रा में खाना बेहतर है। इनमें से कई चीजों में अतिरिक्त चीनी, नमक या संतृप्त वसा की मात्रा ज्यादा हो सकती है।
हालांकि, यह दावा कि चीनी खाते ही बलगम बढ़ जाता है या शरीर में पानी की कमी होने लगती है, सभी लोगों के लिए सही नहीं है। बलगम की परेशानी को केवल चीनी से जोड़ने के बजाय अपने संपूर्ण खानपान, पानी के सेवन और दूसरे लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।
3. तली-भुनी चीजें और ज्यादा वसा वाला भोजन
समोसे, पकौड़े, फ्रेंच फ्राइज और बहुत ज्यादा वसा वाले भोजन को नियमित रूप से अधिक मात्रा में खाना सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता। लेकिन इस बात के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं कि तली-भुनी चीजें सीधे बलगम का उत्पादन बढ़ाती हैं।
कुछ लोगों में भारी या तैलीय भोजन एसिड रिफ्लक्स की परेशानी बढ़ा सकता है। एसिड रिफ्लक्स में पेट का एसिड गले तक पहुंचने से खांसी, गले में जलन या बार-बार गला साफ करने की समस्या हो सकती है। यदि खाने के बाद ऐसे लक्षण बढ़ते हैं, तो भोजन की मात्रा कम रखना और खाने के तुरंत बाद न लेटना मददगार हो सकता है।
4. रेड मीट और प्रोसेस्ड मीट
बीफ, पोर्क और लैम्ब जैसे रेड मीट के साथ-साथ सॉसेज और बेकन जैसे प्रोसेस्ड मीट का अधिक सेवन सीमित रखना बेहतर है। खासकर प्रोसेस्ड मीट का नियमित अधिक सेवन कई स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ा है।
हालांकि, रेड मीट खाने से सीधे बलगम ज्यादा बनने लगता है, इसका ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। यदि आपको गले में बलगम की शिकायत है, तो केवल मीट को दोष देने के बजाय एलर्जी, संक्रमण, साइनस और एसिड रिफ्लक्स जैसे संभावित कारणों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
5. चाय, कॉफी और अल्कोहल
चाय और कॉफी में कैफीन होता है। सामान्य मात्रा में कैफीन लेने से हर व्यक्ति में शरीर में पानी की कमी नहीं होती, लेकिन बहुत अधिक कैफीन लेने से कुछ लोगों को परेशानी हो सकती है। अल्कोहल का सेवन भी कुछ लोगों में गले में जलन या एसिड रिफ्लक्स के लक्षण बढ़ा सकता है।
यदि चाय, कॉफी या अल्कोहल लेने के बाद गले में परेशानी महसूस होती है, तो इसकी मात्रा कम करके देखें। पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है, क्योंकि शरीर में पानी की कमी होने पर म्यूकस गाढ़ा महसूस हो सकता है।
बलगम कम करने के लिए क्या करें?
पर्याप्त पानी पिएं
दिनभर नियमित रूप से पानी पीते रहें। पर्याप्त तरल पदार्थ म्यूकस को कम गाढ़ा रखने में मदद कर सकते हैं, जिससे उसे बाहर निकालना आसान हो सकता है। जरूरत हर व्यक्ति की उम्र, गतिविधि, मौसम और स्वास्थ्य के अनुसार अलग हो सकती है।
गर्म पेय से मिल सकती है राहत
गुनगुना पानी या गर्म सूप गले को आराम दे सकता है। अदरक या पुदीने की चाय भी कुछ लोगों को सुखद लग सकती है, लेकिन इन्हें बलगम का प्रमाणित इलाज नहीं मानना चाहिए।
नाक की सफाई पर ध्यान दें
यदि नाक से म्यूकस गले में गिरता रहता है, तो सलाइन नेजल स्प्रे या सलाइन से नाक की सफाई कुछ लोगों को राहत दे सकती है। नाक धोने के लिए केवल स्टेराइल, डिस्टिल्ड या उबालकर ठंडा किया हुआ पानी इस्तेमाल करें। सामान्य नल का पानी सीधे नाक में इस्तेमाल न करें।
भाप लेते समय सावधानी बरतें
गर्म भाप से कुछ लोगों को अस्थायी आराम महसूस हो सकता है, लेकिन उबलते पानी के बर्तन के ऊपर झुककर भाप लेना जलने का जोखिम पैदा करता है। इसलिए इस तरीके से बचें। कमरे में हवा की नमी उचित रखना या गर्म शॉवर लेना अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है। यूकेलिप्टस या दूसरे एसेंशियल ऑयल हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं होते और संवेदनशील लोगों में जलन पैदा कर सकते हैं।
शहद का इस्तेमाल कब करें?
एक साल से अधिक उम्र के लोगों में शहद खांसी को कुछ हद तक शांत करने में मदद कर सकता है। लेकिन एक साल से कम उम्र के बच्चों को शहद बिल्कुल न दें। डायबिटीज वाले लोग शहद को भी चीनी के स्रोत के रूप में ध्यान में रखें।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
यदि बलगम लंबे समय तक बना रहे, बार-बार लौट आए या उसके साथ अन्य लक्षण हों, तो चिकित्सकीय जांच कराना उचित है। खासकर इन स्थितियों में डॉक्टर से सलाह लें:
- कई सप्ताह तक खांसी या बलगम बना रहना।
- बार-बार बुखार आना या सीने में दर्द होना।
- बलगम में खून दिखाई देना।
- बिना वजह वजन कम होना या लगातार कमजोरी महसूस होना।
- सांस लेने में परेशानी होना।
यदि सांस लेने में गंभीर कठिनाई हो या सीने में तेज दर्द हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
निष्कर्ष
गले में बलगम जमा होने की वजह हमेशा खानपान नहीं होती। सर्दी-जुकाम, एलर्जी, साइनस की समस्या और एसिड रिफ्लक्स भी इसके कारण हो सकते हैं। दूध, चीनी या तली-भुनी चीजों को सभी लोगों के लिए बलगम बढ़ाने वाला मानने के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। बेहतर है कि संतुलित भोजन करें, पर्याप्त पानी पिएं और जिन चीजों से व्यक्तिगत रूप से परेशानी बढ़ती है, उन पर ध्यान दें।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है, व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं। बलगम या खांसी लंबे समय तक बनी रहे, बढ़ती जाए या सांस लेने में परेशानी हो, तो योग्य डॉक्टर से परामर्श लें। अपनी डाइट में बड़े बदलाव करने से पहले भी स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।



