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बड़वानी में सिविल सर्जन पर महिला कर्मचारी से छेड़छाड़ का आरोप, ऑफिस के बाद मिलने का दबाव बनाने की शिकायत; पुलिस जांच में जुटी.

बड़वानी में सिविल सर्जन पर महिला कर्मचारी से छेड़छाड़ का आरोप, ऑफिस के बाद मिलने का दबाव बनाने की शिकायत; पुलिस जांच में जुटी.

बड़वानी, मध्य प्रदेश: जिला चिकित्सालय में कार्यरत एक महिला कर्मचारी ने सिविल सर्जन डॉ. मनोज खन्ना पर छेड़छाड़, मानसिक प्रताड़ना और पद का दुरुपयोग करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का दावा है कि छुट्टी और कार्यालय से जुड़े मामलों में उन्हें परेशान किया गया और अपनी बात रखने के लिए कार्यालय समय के बाद मिलने का दबाव बनाया गया। शिकायत के आधार पर महिला थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, संबंधित अधिकारी ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए महिला की उपस्थिति पर सवाल उठाए हैं।

पिता की बीमारी के कारण मांगी थी छुट्टी

महिला कर्मचारी के अनुसार, उनके 71 वर्षीय पिता को 16 अप्रैल को स्ट्रोक आया था। उनकी हालत गंभीर होने के कारण उन्हें करीब सात दिनों तक वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। इसके बाद 6 मई को ट्रेकोस्टॉमी के साथ उन्हें अस्पताल से घर भेजा गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि 31 मई तक उनके पिता को घर पर चौबीस घंटे नर्सिंग देखभाल की जरूरत थी।

महिला ने बताया कि वह अपने पिता की देखभाल करने वाली इकलौती अविवाहित बेटी हैं। इसी वजह से उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट के साथ छुट्टी के लिए आवेदन दिया था। उनका आरोप है कि 17 से 31 मई तक का अवकाश स्वीकृत नहीं किया गया और इस दौरान उनका 75 दिनों का वेतन भी रोक दिया गया।

कार्यालय समय के बाद मिलने का दबाव बनाने का आरोप

शिकायत में महिला ने आरोप लगाया कि छुट्टी से जुड़ी समस्या पर मौखिक रूप से बात करने की कोशिश करने पर उन्हें कार्यालय समय के बाद मिलने के लिए कहा गया। उन्होंने संबंधित अधिकारी पर अनुचित व्यवहार करने, मानसिक दबाव बनाने और कार्यालय में भय का माहौल पैदा करने के आरोप भी लगाए हैं।

महिला ने अपनी शिकायत में पूर्व सिविल सर्जन की ओर से 19 सितंबर 2024 को जारी एक पत्र का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, मानवीय आधार पर उन्हें सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक कार्यालय आने की अनुमति दी गई थी। आरोप है कि बाद में इस व्यवस्था का पालन नहीं किया गया।

हाजिरी और आवेदन को लेकर भी विवाद

महिला कर्मचारी ने अपनी शिकायत में उपस्थिति दर्ज करने को लेकर भी कई सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि 6 और 7 अगस्त को छुट्टी के आवेदनों के सामने हाजिरी रजिस्टर में सवालिया निशान लगाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि 15 और 21 अगस्त को ड्यूटी पर मौजूद रहने के बावजूद उनकी अनुपस्थिति दर्ज की गई।

शिकायतकर्ता के अनुसार, 1 सितंबर को उन्हें उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने से रोका गया और आवक शाखा ने उनका आवेदन लेने से भी इनकार कर दिया। महिला का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में कलेक्टर सहित वरिष्ठ अधिकारियों को आवेदन भेजे थे और 3 सितंबर को महिला थाना पहुंचकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।

सिविल सर्जन ने आरोपों को बताया निराधार

दूसरी ओर, डॉ. मनोज खन्ना ने महिला कर्मचारी की ओर से लगाए गए आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि कर्मचारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंचतीं और बिना सूचना दिए छुट्टी पर चली जाती हैं। उन्होंने दावा किया कि महिला अप्रैल में करीब डेढ़ महीने तक लगातार अनुपस्थित रही थीं।

डॉ. खन्ना के अनुसार, कर्मचारी सुबह लगभग 11:30 बजे कार्यालय आती हैं और दोपहर 2 बजे से पहले चली जाती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कर्मचारी की अनुपस्थिति से जुड़ा मामला भोपाल भेजा गया है।

पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच जारी

महिला की शिकायत पर बड़वानी महिला थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 74, 75 और 78 के तहत मामला दर्ज किया है। अब पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों, संबंधित दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है।

फिलहाल मामले में दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। जांच पूरी होने और साक्ष्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध जानकारी और शिकायत में दर्ज आरोपों के आधार पर तैयार की गई है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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