India

​Supreme Court CJP Protest: CJP प्रोटेस्ट पर SC सख्त, दिल्ली से बैरिकेड हटाने का आदेश, प्रदर्शन के बीच पुलिस से मांगा जवाब

: दिल्ली के जंतरमंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई, नेताओं और वकीलों को हिरासत में लेने, मेट्रो व सड़कों पर पाबंदियां लगाने और फोन जैमर के इस्तेमाल को लेकर चार याचिकाएं दाखिल की गई हैं।

​Supreme Court CJP Protest: CJP प्रोटेस्ट पर SC सख्त, दिल्ली से बैरिकेड हटाने का आदेश, प्रदर्शन के बीच पुलिस से मांगा जवाब

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली में लोगों की आवाजाही बहाल करने, बैरिकेड हटाने और मेट्रो सेवाएं सामान्य समयसारणी के अनुसार चलाने को लेकर निर्देश दिए। साथ ही, वकीलों को उनके पेशेवर काम में बाधा नहीं पहुंचाने की बात भी कही गई।

कोर्ट में वकीलों और पुलिस अधिकारियों के बीच बहस

सुनवाई शुरू होने के दौरान कोर्टरूम नंबर 18 में वकीलों और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। वकीलों ने आरोप लगाया कि 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ मारपीट की थी। मारपीट का शिकार हुए कुछ वकील खुद भी अदालत में पेश हुए।

इस बीच, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक काम नहीं करने के कारण वकीलों ने कोर्टरूम बदलने की मांग की। उनका कहना था कि वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होना है, इसलिए तकनीकी समस्या दूर करना जरूरी है। वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने भी इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अदालत की कार्यवाही से बाहर यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि किसी एक पक्ष का समर्थन किया जा रहा है। इसके बाद सुनवाई करीब 15 मिनट के लिए रोक दी गई और कार्यवाही को कोर्टरूम नंबर 5 में स्थानांतरित किया गया। वहां सुनवाई दोबारा शुरू हुई।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर कोर्ट में बहस

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि लोगों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिले अभिव्यक्ति के अधिकार का इस्तेमाल करने की अनुमति मिलनी चाहिए। उन्होंने दलील दी कि प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगह होने के बावजूद लोगों को वहां जाने से रोका जा रहा है। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रदर्शन की अनुमति लेने के लिए आवेदन नहीं किया गया था।

जस्टिस बागची ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन इसका तरीका कानून के दायरे में होना चाहिए। अदालत यह भी देखेगी कि पुलिस की ओर से लगाई गई पाबंदियां संविधान के अनुच्छेद 19 के अनुरूप हैं या नहीं। सिब्बल ने दलील दी कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार पर अनुचित प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पत्रकारों को अपना काम करने से रोका जा रहा है।

महिला वकील को 12 किलोमीटर दूर ले जाने का आरोप

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि उनकी एक महिला जूनियर वकील को सुप्रीम कोर्ट आते समय जबरन बस में बैठाकर करीब 12 किलोमीटर दूर ले जाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि हिरासत में लेने वाले व्यक्ति के पास पहचान का बैज नहीं था। वहीं, मेनका गुरुस्वामी ने हिरासत में लिए गए लोगों की आधिकारिक संख्या सार्वजनिक करने की मांग की। जस्टिस बागची ने कहा कि सरकार को हिरासत में लेने की परिस्थितियों, तरीके और उसके औचित्य पर जवाब देने का अवसर देना होगा। सॉलिसिटर जनरल ने जवाब दाखिल करने के लिए बुधवार तक का समय मांगा, लेकिन अदालत ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को करने की बात कही।

दिल्ली से बैरिकेड हटाने और आवाजाही बहाल करने पर जोर

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में लोगों की आवाजाही बहाल करने और शहरभर में लगाए गए बैरिकेड हटाने को लेकर निर्देश दिए। अदालत ने इंटरनेट सेवाएं बहाल करने और वकीलों के पेशेवर काम में बाधा नहीं डालने की बात भी कही। कोर्ट ने कहा कि जब तक सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी कोई ऐसी स्थिति नहीं बनती, जिसके कारण प्रतिबंध जरूरी हों, तब तक मेट्रो सेवाएं सामान्य समयसारणी के अनुसार चलनी चाहिए। साथ ही, शहर में लोगों की आवाजाही सामान्य करने पर जोर दिया गया।

ये भी पढ़ें:  

सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर धारा 163 पर सवाल

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू किए जाने को लेकर सवाल उठाया। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी नहीं है। अदालत ने उन्हें स्थिति की जानकारी लेने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्सऑनरिकॉर्ड एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि वकीलों को परिसर के बाहर धारा 163 लागू होने की जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ वकीलों को उनके चैंबर से हिरासत में लिया गया। इस पर जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि यदि आदेश की जानकारी संबंधित लोगों को नहीं दी गई थी, तो यह धारा 163 के आदेश को चुनौती देने का ठोस आधार हो सकता है। CJP प्रदर्शन से जुड़े मामले में अब अगली सुनवाई मंगलवार को होगी। अदालत में सरकार को पुलिस कार्रवाई, हिरासत और लगाए गए प्रतिबंधों के संबंध में अपना पक्ष रखना है। 

ये भी पढ़ें:   

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply