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जालंधर: 72 साल की महिला को उपभोक्ता आयोग से बड़ी राहत, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को 4.54 लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने के आदेश.

जालंधर: 72 साल की महिला को उपभोक्ता आयोग से बड़ी राहत, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को 4.54 लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने के आदेश.

पंजाब के जालंधर में 72 वर्षीय महिला सुदर्शन टांगरी की शिकायत पर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को बड़ा झटका दिया है। आवासीय योजना में फ्लैट आवंटित करने के बावजूद जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने के मामले में आयोग ने ट्रस्ट को महिला की जमा राशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही मानसिक परेशानी के मुआवजे और मुकदमे के खर्च का भुगतान करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

4.54 लाख रुपये पर 9 प्रतिशत ब्याज देने का आदेश

आयोग के आदेश के अनुसार, जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को महिला की जमा की गई 4,54,677 रुपये की राशि पर 9 प्रतिशत सालाना ब्याज सहित भुगतान करना होगा। इसके अलावा मानसिक परेशानी के लिए 30,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के तौर पर 10,000 रुपये देने होंगे।

आयोग ने आदेश का पालन करने के लिए 45 दिन का समय दिया है। तय समय में भुगतान नहीं होने पर ब्याज दर में 3 प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़ोतरी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

वर्ष 2006 में बुक कराया था फ्लैट

शिवराज गढ़ निवासी सुदर्शन टांगरी ने वर्ष 2006 में इंद्रपुरम विकास योजना के तहत ब्लॉक-ए की दूसरी मंजिल पर स्थित एलआईजी फ्लैट नंबर 78 बुक कराया था। शिकायत के अनुसार, उन्होंने अलग-अलग किस्तों में कुल 4,54,677 रुपये जमा करवाए थे।

महिला का आरोप था कि उन्हें फ्लैट का वास्तविक कब्जा देने के बजाय केवल कागजी कब्जा सौंपा गया। फ्लैट में रहने के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं थीं, जिसके कारण वह वहां ठीक से रह नहीं सकीं और उनकी जमा पूंजी लंबे समय तक फंसी रही।

सड़क, पानी और सीवरेज जैसी सुविधाओं की कमी

शिकायत में बताया गया कि आवासीय परिसर में 45 फीट चौड़ी पहुंच सड़क, पेयजल, बिजली, चालू सीवरेज लाइन और कम्युनिटी हॉल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। बिजली की मुख्य लाइनें और ट्रांसफार्मर भी वर्ष 2012-2013 के दौरान चालू हो सके।

महिला ने इन्हीं कमियों को आधार बनाते हुए उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई और जमा रकम वापस दिलाने की मांग की।

इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने क्या दलील दी?

सुनवाई के दौरान ट्रस्ट ने कहा कि फ्लैट का कब्जा पहले ही दिया जा चुका था और शिकायत निर्धारित समय-सीमा के बाद दायर की गई थी। ट्रस्ट ने यह दलील भी दी कि फ्लैट ‘जैसा है, जहां है’ के आधार पर आवंटित किए गए थे और रखरखाव की जिम्मेदारी आवंटियों की थी।

हालांकि, आयोग ने दोनों पक्षों के सबूतों की समीक्षा की। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट जरूरी कंप्लीशन सर्टिफिकेट पेश नहीं कर सका। आयोग ने माना कि आवश्यक बुनियादी सुविधाओं और पूर्णता प्रमाण पत्र के अभाव में कब्जा दिए जाने का दावा पर्याप्त नहीं था।

RTI से मिली जानकारी भी बनी अहम

इस मामले में सुदर्शन टांगरी ने सूचना का अधिकार यानी आरटीआई के तहत प्राप्त जानकारी को अपने पक्ष में सबूत के रूप में पेश किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस जानकारी से सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर उनकी दलीलों को मजबूती मिली। बीबी भानी फ्लैट अलॉटी एसोसिएशन के प्रधान दर्शन ने भी उन्हें कानूनी सलाह के संबंध में सहयोग दिया।

आयोग के आदेश के बाद अब जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को निर्धारित समय के भीतर जमा राशि, ब्याज और मुआवजे का भुगतान करना होगा। यह फैसला उन आवंटियों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो रकम जमा करने के बावजूद आवासीय योजनाओं में जरूरी सुविधाएं नहीं मिलने की शिकायत करते हैं।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। आदेश की विस्तृत शर्तों और उसके अनुपालन की स्थिति के लिए संबंधित आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड देखे जाने चाहिए।

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