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​एक बेटी ननिहाल में, दूसरी जेल में मां के साथ… मुस्कान को फांसी की सजा के बाद दोनों का क्या होगा?

Meerut News: मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई है. फैसला सुनाए जाने के बाद जहां सौरभ के परिवार ने राहत की सांस ली, वहीं मुस्कान की दोनों बेटियों के भविष्य को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. मुस्कान की एक बेटी करीब 7 साल की है, जो अपने ननिहाल में रह रही है. वहीं, छोटी बेटी राधा का जन्म 24 नवंबर 2025 को हुआ था. करीब 10 महीने की राधा फिलहाल जेल में अपनी मां मुस्कान के साथ रह रही है.

​एक बेटी ननिहाल में, दूसरी जेल में मां के साथ… मुस्कान को फांसी की सजा के बाद दोनों का क्या होगा?

सजा सुनाए जाने से पहले अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जेल में बंद मुस्कान और साहिल को जोड़ा था. जज ने मुस्कान से पूछा कि पति की हत्या के मामले में दोषी होने पर वह क्या कहना चाहती है… इस पर मुस्कान ने कहा, मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए. इसके बाद वह खामोश हो गई. साहिल ने भी सवाल के जवाब में कुछ नहीं कहा.

बड़ी बेटी ननिहाल में, छोटी मां के साथ जेल में

मुस्कान की दोनों बेटियों की स्थिति अलगअलग है. बड़ी बेटी अपने ननिहाल में रह रही है, जबकि छोटी बेटी राधा अपनी मां के साथ जेल में है. राधा अभी बहुत छोटी है और उसे देखभाल की जरूरत है. ऐसे में मुस्कान को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद बच्चियों की परवरिश और भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

हालांकि, फांसी की सजा सुनाए जाने का मतलब यह नहीं है कि उसे तुरंत लागू कर दिया जाएगा. इस फैसले के खिलाफ आगे कानूनी प्रक्रिया पूरी होनी है. इस दौरान मुस्कान की छोटी बेटी के रहने और देखभाल की व्यवस्था को लेकर संबंधित जेल प्रशासन और बाल कल्याण से जुड़े अधिकारियों की भूमिका अहम हो सकती है.

कितनी उम्र तक मां के साथ जेल में रह सकते हैं बच्चे?

भारतीय जेल नियमों के अनुसार, महिला कैदी के छोटे बच्चे आम तौर पर छह वर्ष की उम्र तक अपनी मां के साथ जेल में रह सकते हैं. यह व्यवस्था जेल के बाहर जन्मे और जेल में जन्मे, दोनों तरह के बच्चों पर लागू होती है. हालांकि, बच्चे के हित और परिस्थितियों को देखते हुए संबंधित नियमों और अधिकारियों के निर्देशों का पालन किया जाता है.

जेल में मां के साथ रहने वाले बच्चों के लिए भोजन, कपड़े और चिकित्सा देखभाल जैसी सुविधाओं का प्रावधान है. छोटे बच्चों के लिए शुरुआती शिक्षा की व्यवस्था करने के निर्देश भी हैं. छह वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद बच्चे को मां से अलग रखने की जरूरत पड़ सकती है. ऐसी स्थिति में परिवार के सदस्य या रिश्तेदार बच्चे की देखभाल कर सकते हैं. यदि परिवार में कोई उपयुक्त व्यक्ति उपलब्ध नहीं हो तो बाल कल्याण समिति की मदद से बच्चे के हित में आगे की व्यवस्था की जा सकती है.

फांसी की सजा के बाद भी बाकी है लंबी कानूनी प्रक्रिया

मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद भी इसे लागू करने से पहले कई कानूनी चरण पूरे होने हैं. जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे के मुताबिक, फैसले को करीब एक सप्ताह बाद हाई कोर्ट में सजा की पुष्टि के लिए भेजे जाने की बात कही गई है. मौत की सजा के मामलों में हाई कोर्ट की पुष्टि जरूरी होती है. इसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध उपायों के अनुसार मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है.

दया याचिका समेत अन्य कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल भी संबंधित नियमों के तहत किया जा सकता है. ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय आने में लंबा समय लग सकता है. इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि मुस्कान और साहिल को कब फांसी दी जाएगी या सजा में आगे कोई बदलाव होगा या नहीं.

क्या था सौरभ राजपूत हत्याकांड?

सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मुस्कान और साहिल ने मिलकर सौरभ की हत्या की और सबूत मिटाने के लिए शव के पांच टुकड़े कर उन्हें नीले ड्रम में डाल दिया. इसके बाद ड्रम में सीमेंट का घोल भर दिया गया था. मामले की जांच और सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई.

सजा के ऐलान के बाद सौरभ की मां भावुक हो गईं. उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिला है. वहीं, मेरठ कोर्ट के बाहर कुछ वकीलों ने लड्डू बांटकर फैसले पर खुशी जताई. अधिवक्ता कृष्ण कुमार दुबे के मुताबिक, अदालत ने हत्या से संबंधित धारा 302 के तहत 50 हजार रुपए और धारा 238A के तहत 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है.

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