
सरकारी नौकरी की बात होती है तो आमतौर पर पुलिस, सेना, शिक्षक और दूसरे विभागों का जिक्र किया जाता है। लेकिन जेल प्रशासन से जुड़ा एक ऐसा काम भी है, जिसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी होती है। यह काम है जल्लाद का, जिसे अंग्रेजी में हैंगमैन या एक्जीक्यूशनर कहा जाता है। भारत में मृत्युदंड दिए जाने की स्थिति में फांसी की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए जेल प्रशासन को निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक नियमों का पालन करना होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जल्लाद कैसे बनते हैं, क्या इसके लिए कोई परीक्षा होती है और इस काम के बदले कितना भुगतान किया जाता है?
क्या जल्लाद बनने के लिए परीक्षा देनी पड़ती है?
भारत में जल्लाद बनने के लिए पूरे देश में एक जैसी प्रतियोगी परीक्षा या नियमित भर्ती प्रक्रिया नहीं है। इसे सामान्य सरकारी नौकरी की तरह नहीं समझना चाहिए, जिसमें हर साल पदों के लिए आवेदन मांगे जाते हैं और लिखित परीक्षा आयोजित होती है।
इस काम के लिए व्यवस्था संबंधित राज्य के जेल नियमों, जेल प्रशासन की जरूरत और उपलब्ध व्यवस्था पर निर्भर करती है। जब मृत्युदंड की सजा को फांसी के जरिए लागू करने की स्थिति आती है, तब जेल प्रशासन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक सेवाओं की व्यवस्था करता है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि भारत में जल्लाद बनने के लिए कोई एक राष्ट्रीय परीक्षा आयोजित की जाती है।
जल्लाद को काम की ट्रेनिंग कैसे मिलती है?
जल्लाद की भूमिका बेहद संवेदनशील और जिम्मेदारी वाली होती है। इस काम में संबंधित नियमों, सुरक्षा प्रक्रियाओं और जेल प्रशासन के निर्देशों की जानकारी जरूरी होती है।
दिल्ली के जेल मैनुअल में भी इस बात का उल्लेख मिलता है कि पहली बार यह जिम्मेदारी निभाने वाले व्यक्ति की क्षमता और जिम्मेदारी को लेकर जेल अधीक्षक को संतुष्ट होना चाहिए। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में लागू नियमों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में अंतर हो सकता है।
भारत में कुछ जल्लाद परिवारों में यह काम पीढ़ी-दर-पीढ़ी किया जाता रहा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर जगह इस पेशे में आने के लिए पारिवारिक पृष्ठभूमि होना अनिवार्य है। संबंधित जेल प्रशासन की जरूरत और लागू नियमों के अनुसार ही व्यवस्था तय होती है।
जल्लाद को कितने पैसे मिलते हैं?
जल्लाद को मिलने वाले भुगतान की कोई एक समान राष्ट्रीय दर नहीं है। यह संबंधित राज्य के नियमों और जेल प्रशासन की व्यवस्था पर निर्भर करता है।
मॉडल प्रिजन मैनुअल में प्रावधान है कि जल्लाद को प्रत्येक फांसी के लिए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दर के अनुसार भुगतान किया जाए। इस व्यवस्था से यह स्पष्ट होता है कि इस काम को हर जगह नियमित मासिक वेतन वाली नौकरी मानना सही नहीं है।
भुगतान की वास्तविक रकम के बारे में जानकारी के लिए संबंधित राज्य के जेल नियमों या आधिकारिक आदेशों को देखना जरूरी है। बिना आधिकारिक दस्तावेज के किसी एक निश्चित रकम को पूरे देश में लागू बताना भ्रामक हो सकता है।
क्या जल्लाद सरकारी कर्मचारी होता है?
जल्लाद की भूमिका जेल प्रशासन से जुड़ी होती है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हर जल्लाद नियमित सरकारी कर्मचारी ही होता है। भुगतान, नियुक्ति और सेवा की प्रकृति संबंधित राज्य की व्यवस्था पर निर्भर कर सकती है।
कई मामलों में यह काम जरूरत के अनुसार लिया जाता है, इसलिए इसकी प्रकृति सामान्य स्थायी सरकारी पद से अलग हो सकती है।
भारत में जल्लाद का काम इतना दुर्लभ क्यों है?
भारत में मृत्युदंड से जुड़े मामलों की संख्या सीमित होती है और फांसी की सजा लागू करने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होता है। इसी वजह से जल्लाद की जरूरत नियमित रूप से नहीं पड़ती। यह भी एक कारण है कि इस काम के लिए सामान्य सरकारी नौकरियों जैसी व्यापक भर्ती प्रक्रिया दिखाई नहीं देती।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध प्रकाशित जानकारियों और जेल प्रशासन से जुड़े सामान्य नियमों पर आधारित है। नियुक्ति, प्रशिक्षण और भुगतान की सटीक शर्तों के लिए संबंधित राज्य के आधिकारिक जेल नियमों और सरकारी आदेशों को देखना चाहिए।



