
बरेली/देहरादून: उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य, उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी और उनकी पूर्व मैनेजर कल्पना से जुड़ा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। मंत्री की ओर से सार्वजनिक की गई कथित बातचीत ने पुराने मुकदमों, गिरफ्तारी और जमानत से जुड़े घटनाक्रम को फिर सुर्खियों में ला दिया है। इस मामले में वर्ष 2024 में दर्ज शिकायत से लेकर जून 2026 में दर्ज रंगदारी के मुकदमे तक कई कानूनी घटनाक्रम सामने आए हैं।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कथित बातचीत में महिला को यह कहते हुए समझाया जा रहा है कि यदि जेल जाना भी पड़ा तो दो-तीन दिन में जमानत मिल जाएगी। हालांकि, संबंधित समाचार रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि इस बातचीत की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इसे प्रमाणित तथ्य के बजाय सामने आए दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
वर्ष 2024 में मंत्री ने दर्ज कराई थी शिकायत
रिपोर्ट के अनुसार, 9 सितंबर 2024 को रेखा आर्य ने बरेली के बारादरी थाने में अपनी पूर्व मैनेजर कल्पना के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि कल्पना ने मंत्री के नाम का कथित तौर पर दुरुपयोग किया और दस्तावेजों में पप्पू गिरधारी को अपने पति के रूप में दर्ज कराया।
शिकायत में चोरी और वसूली जैसे आरोप भी लगाए गए थे। आरोप यह भी था कि कल्पना ने बरेली स्थित आवास से रुपये और सोने की माला चोरी की तथा अपनी कार पर लालबत्ती लगाकर घूमती थी। ये सभी आरोप शिकायत से संबंधित दावे हैं, जिनकी पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकती है।
जून में पप्पू गिरधारी ने भी दर्ज कराया मुकदमा
मामले में नया मोड़ 19 जून 2026 को आया, जब गिरधारी लाल साहू की ओर से बहेड़ी थाने में कल्पना के खिलाफ रंगदारी मांगने और धमकाने की प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
शिकायत के मुताबिक, कल्पना के पास कंपनी के कुछ गोपनीय दस्तावेज थे और उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी दी जा रही थी। आरोप लगाया गया कि 18 जून को दस्तावेज लौटाने के बहाने बहेड़ी बुलाए जाने पर 20 लाख रुपये की मांग की गई।
पुलिस ने 20 जून को कल्पना को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद मामले में जमानत की प्रक्रिया आगे बढ़ी। रिपोर्ट के अनुसार, बहेड़ी में दर्ज मुकदमे में कल्पना को 29 सितंबर 2026 को जमानत मिल गई। बारादरी थाने में दर्ज पुराने मामले में भी उन्हें सितंबर में जमानत मिलने की जानकारी सामने आई है।
कथित बातचीत में जमानत को लेकर क्या कहा गया?
रिपोर्ट के मुताबिक, रेखा आर्य ने अक्टूबर में सोशल मीडिया पर अपने पति और एक महिला के बीच बातचीत की कथित रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की। बताया गया कि बातचीत में मुकदमे और जेल जाने की आशंका का जिक्र था। इसी दौरान महिला को कथित तौर पर भरोसा दिलाया जा रहा था कि जेल जाना पड़ा तो कुछ ही दिनों में जमानत हो जाएगी।
इस बातचीत को लेकर विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि यह पुराने मुकदमों और हाल में हुई गिरफ्तारी से जुड़े घटनाक्रम के बीच सामने आई। हालांकि, रिकॉर्डिंग में कही गई बातों का वास्तविक संदर्भ और उनकी प्रामाणिकता स्वतंत्र रूप से स्थापित होना जरूरी है। केवल कथित बातचीत के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।
पप्पू गिरधारी के खिलाफ दर्ज मुकदमों का भी उल्लेख
समाचार रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पप्पू गिरधारी के खिलाफ बरेली में हत्या, जानलेवा हमला, धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और धमकी सहित विभिन्न आरोपों में 39 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पहला मामला वर्ष 1990 में जैन दंपती हत्याकांड से संबंधित था। बाद के मामलों में पुलिस की ओर से आरोपपत्र दाखिल किए जाने और कुछ मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगाए जाने का भी उल्लेख है।
हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना अपने आप में अपराध साबित होना नहीं है। प्रत्येक मामले की स्थिति, आरोपपत्र, अदालत की कार्यवाही और अंतिम फैसले को अलग-अलग समझना जरूरी है।
अब आगे क्या होगा?
रेखा आर्य, उनके पति और पूर्व मैनेजर से जुड़े इस विवाद में पुराने दस्तावेजों, दोनों पक्षों की शिकायतों, कथित बातचीत और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामले की वास्तविक स्थिति समझने के लिए संबंधित प्राथमिकी, पुलिस जांच और अदालत के रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे।
सत्यम रिपोर्ट का अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें उल्लेखित आरोप और कथित बातचीत स्वतंत्र रूप से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं हैं। संबंधित व्यक्तियों की कानूनी स्थिति का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।



