
मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में अमित कश्यप हत्याकांड में अदालत ने उसकी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले को गंभीर अपराध मानते हुए टिप्पणी की कि इस घटना में एक व्यक्ति की जान लेने के साथ वैवाहिक रिश्ते के विश्वास को भी गहरी चोट पहुंचाई गई। घटना के करीब डेढ़ साल के भीतर सुनाए गए इस फैसले के बाद मृतक के परिवार ने राहत जताई है।
अपर सत्र न्यायाधीश जयवीर नागर की अदालत ने दोनों दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया। हालांकि, मृत्युदंड को लागू करने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट की पुष्टि जरूरी होगी। अदालत के फैसले में सजा के साथ साक्ष्य छिपाने से संबंधित अपराध के लिए भी दंड का उल्लेख किया गया है।
अदालत ने वैवाहिक रिश्ते के विश्वास पर की टिप्पणी
सजा सुनाते समय अदालत ने पति-पत्नी के रिश्ते को विश्वास, त्याग और समर्पण पर आधारित बताया। न्यायाधीश ने सत्यवान-सावित्री की कथा का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां सावित्री अपने पति के प्राण बचाने के लिए संघर्ष करती है, वहीं इस मामले में पत्नी पर अपने पति की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप साबित हुआ है।
अदालत ने अमरदीप की भूमिका का भी उल्लेख किया। वह अमित के साथ काम करता था और उसके परिवार से परिचित था। अदालत के अनुसार, इस मामले में विश्वास के रिश्ते को तोड़ने और गंभीर अपराध को अंजाम देने के लिए दोनों को दोषी ठहराया गया।
नौ साल पहले हुई थी अमित और रविता की शादी
अमित कश्यप मुजफ्फरनगर जिले के तितावी क्षेत्र के सैदपुर की रहने वाली रविता से शादी के बाद मेरठ जिले के बहसूमा क्षेत्र के अकबरपुर सादात में रहता था। अमित टाइल और पत्थर लगाने का काम करता था। दंपती के तीन बच्चे हैं।
अमरदीप अमित के साथ काम करता था और पड़ोस में ही रहता था। परिवार से परिचित होने के कारण उसका घर आना-जाना था। पुलिस जांच के अनुसार, इसी दौरान रविता और अमरदीप के बीच नजदीकियां बढ़ गई थीं। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दावा किया कि दोनों ने मिलकर अमित की हत्या की योजना बनाई थी।
सांप के काटने की घटना दिखाने की कोशिश का आरोप
मामले में अभियोजन पक्ष के अनुसार, 12 अप्रैल 2025 को अमित परिवार के साथ शाकंभरी देवी के दर्शन करके लौटा था। आरोप है कि उसी दिन अमरदीप ने सांप की व्यवस्था की। रात में अमित के सो जाने के बाद रविता ने उसे बुलाया।
अभियोजन के मुताबिक, अमरदीप सांप लेकर घर पहुंचा। आरोप है कि रविता ने अमित के हाथ पकड़े और अमरदीप ने उसका गला दबा दिया। इसके बाद शव के पास सांप छोड़ दिया गया, ताकि मौत सांप के काटने से हुई प्रतीत हो।
अगली सुबह अमित का बेटा उसे जगाने पहुंचा तो चारपाई पर सांप देखकर परिवार के लोगों को इसकी जानकारी दी। शुरुआत में परिवार ने सांप के काटने की आशंका जताई। सांप पकड़ने के लिए सपेरे को बुलाया गया और बाद में अमित के शव को झाड़-फूंक के लिए भी ले जाया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुला हत्या का मामला
परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा था, तभी तत्कालीन थाना प्रभारी इंदू वर्मा पुलिस टीम के साथ गांव पहुंचीं। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या किए जाने की बात सामने आई, जिसके बाद जांच की दिशा बदल गई।
इसके बाद पुलिस ने रविता और अमरदीप से पूछताछ की। पुलिस की जांच में दोनों की भूमिका सामने आने का दावा किया गया और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। दोनों तब से न्यायिक हिरासत में थे।
पुलिस ने 23 जून 2025 को अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। अभियोजन पक्ष ने मामले से जुड़े साक्ष्य और गवाह अदालत के सामने पेश किए। सात अक्टूबर 2026 को अदालत ने दोनों को दोषी करार दिया और 16 अक्टूबर को सजा सुनाई।
मृत्युदंड के साथ जुर्माना भी लगाया
अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) और धारा 3(5) के तहत रविता और अमरदीप को मृत्युदंड सुनाया। रिपोर्ट के अनुसार, हत्या के मामले में दोनों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। साक्ष्य छिपाने के अपराध में दोनों को सात-सात साल की सजा और 20-20 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी दिया गया।
जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास का प्रावधान भी बताया गया है। मृत्युदंड का अंतिम निष्पादन हाई कोर्ट की पुष्टि के बाद ही हो सकेगा।
फैसले के बाद परिवार ने जताई राहत
फैसला सुनाए जाने के दौरान अमित की मां मुनेश और भाई सोहनवीर अदालत में मौजूद थे। रिपोर्ट के मुताबिक, फैसला आने के बाद परिवार भावुक हो गया। मां ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस फैसले से अमित को न्याय मिलने की दिशा में बड़ी राहत मिली है।
इस मामले में अमित के तीनों बच्चों की देखभाल को लेकर भी चिंता जताई गई है। पिता की हत्या और मां को मिली सजा के बाद बच्चों के भविष्य तथा उनकी देखरेख का सवाल अहम बना हुआ है।
सत्यम रिपोर्ट का अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और अदालत के फैसले से संबंधित विवरणों पर आधारित है। मृत्युदंड को लागू करने से पहले हाई कोर्ट की पुष्टि आवश्यक है। कानूनी प्रक्रिया में आगे होने वाले बदलावों के अनुसार मामले की स्थिति बदल सकती है।



