
हेल्थ डेस्क: डेंगू को आमतौर पर तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द और प्लेटलेट्स की संख्या कम होने से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन गंभीर मामलों में यह बीमारी दिमाग और नर्वस सिस्टम को भी प्रभावित कर सकती है। कुछ मरीजों में भ्रम, असामान्य व्यवहार, अत्यधिक नींद, बेहोशी और दौरे जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए डेंगू के दौरान केवल प्लेटलेट्स की संख्या पर ध्यान देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरीज की पूरी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखना भी जरूरी है।
पीएसआरआई अस्पताल की वरिष्ठ सलाहकार और पल्मोनोलॉजी, क्रिटिकल केयर एवं स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. नीतू जैन के अनुसार, डेंगू के मरीजों में कुछ परिस्थितियों में दिमाग और नर्वस सिस्टम से जुड़ी जटिलताएं हो सकती हैं। ऐसे लक्षणों को समय रहते पहचानना और उचित चिकित्सा उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।
डेंगू में दिमाग प्रभावित होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण
डेंगू के कुछ गंभीर मामलों में मरीज की मानसिक स्थिति और चेतना में बदलाव हो सकता है। इसके लक्षणों में शामिल हैं:
- भ्रम की स्थिति: मरीज को आसपास की परिस्थितियों को समझने या सही तरीके से जवाब देने में परेशानी हो सकती है।
- अत्यधिक नींद आना: मरीज असामान्य रूप से सुस्त हो सकता है या उसे जगाने में कठिनाई हो सकती है।
- व्यवहार में बदलाव: मरीज बेचैन हो सकता है या उसका व्यवहार सामान्य से अलग दिखाई दे सकता है।
- दौरे पड़ना: गंभीर स्थिति में मरीज को झटके या दौरे आ सकते हैं।
- बेहोशी: मरीज की चेतना कम हो सकती है या वह बेहोश हो सकता है।
हर डेंगू मरीज में ये लक्षण दिखाई नहीं देते। हालांकि, यदि बुखार के दौरान या उसके बाद मरीज की मानसिक स्थिति में अचानक बदलाव आता है, तो इसे सामान्य कमजोरी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
आखिर डेंगू से दिमाग पर असर क्यों पड़ता है?
डेंगू के दौरान दिमाग और नर्वस सिस्टम प्रभावित होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कुछ मामलों में संक्रमण सीधे तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है, जबकि अन्य परिस्थितियों में बीमारी से पैदा होने वाली जटिलताएं इसकी वजह बनती हैं।
1. संक्रमण का तंत्रिका तंत्र पर असर: कुछ दुर्लभ मामलों में डेंगू संक्रमण दिमाग या उसके आसपास की संरचनाओं को प्रभावित कर सकता है। इससे चेतना में बदलाव और अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण सामने आ सकते हैं।
2. शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन: गंभीर बीमारी के दौरान सोडियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स का स्तर बिगड़ सकता है। इसका असर दिमाग के सामान्य कामकाज पर पड़ सकता है।
3. ब्लड शुगर का कम होना: बीमारी के दौरान पर्याप्त भोजन न मिलना या अन्य चिकित्सकीय कारणों से ब्लड शुगर कम हो सकती है। गंभीर स्थिति में इससे भ्रम, दौरे या बेहोशी हो सकती है।
4. लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होना: गंभीर डेंगू में लिवर को नुकसान पहुंच सकता है। लिवर के कामकाज में गंभीर गड़बड़ी होने पर मानसिक स्थिति में बदलाव भी हो सकता है।
5. गंभीर डेंगू में रक्तसंचार प्रभावित होना: यदि शरीर में तरल पदार्थों की कमी या रक्तस्राव के कारण ब्लड प्रेशर बहुत कम हो जाए, तो दिमाग तक पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन पहुंचने में परेशानी हो सकती है।
क्या प्लेटलेट्स कम होना ही डेंगू की गंभीरता का संकेत है?
नहीं। डेंगू की गंभीरता का आकलन केवल प्लेटलेट्स की संख्या से नहीं किया जा सकता। कुछ मरीजों में प्लेटलेट्स कम होने के बावजूद गंभीर जटिलताएं नहीं होतीं, जबकि कुछ लोगों की स्थिति अन्य कारणों से तेजी से बिगड़ सकती है।
इसलिए डॉक्टर मरीज के ब्लड प्रेशर, चेतना के स्तर, रक्तस्राव के लक्षण, पेशाब की मात्रा, ब्लड शुगर और अन्य जरूरी जांचों को ध्यान में रखकर स्थिति का आकलन करते हैं। प्लेटलेट्स की संख्या के साथ-साथ बीमारी के दूसरे संकेतों पर ध्यान देना भी जरूरी है।
डेंगू के मरीज को कब तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए?
यदि डेंगू से पीड़ित व्यक्ति में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें:
- भ्रम, असामान्य व्यवहार या बेहोशी।
- दौरे पड़ना या मरीज को जगाने में परेशानी होना।
- तेज या लगातार पेट दर्द।
- बार-बार उल्टी होना।
- नाक या मसूड़ों से खून आना अथवा अन्य असामान्य रक्तस्राव।
- सांस लेने में कठिनाई, ठंडी त्वचा या अत्यधिक कमजोरी।
ऐसे लक्षण गंभीर डेंगू या दूसरी आपातकालीन स्थिति का संकेत हो सकते हैं। मरीज को घर पर स्वयं उपचार देने के बजाय अस्पताल पहुंचाना जरूरी है।
डेंगू में सही निगरानी और समय पर इलाज जरूरी
डेंगू के मरीज को डॉक्टर की सलाह के अनुसार निगरानी और उपचार की जरूरत होती है। पर्याप्त तरल पदार्थ लेना, आराम करना और निर्धारित जांच कराना देखभाल का हिस्सा हैं। हालांकि, गंभीर लक्षण होने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
बुखार या दर्द के लिए दवा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। डेंगू में एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाएं रक्तस्राव का जोखिम बढ़ा सकती हैं, इसलिए इन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं लेना चाहिए।
सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। डेंगू के दौरान भ्रम, दौरे, बेहोशी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। सही जांच और उपचार के लिए डॉक्टर की सलाह का पालन करें।



