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चीन में सबसे ज्यादा ‘बर्बाद होता है खाना, भारत भी सूची में आगे; जानिए किन देशों में होती है सबसे कम बर्बादी

चीन में सबसे ज्यादा ‘बर्बाद होता है खाना, भारत भी सूची में आगे; जानिए किन देशों में होती है सबसे कम बर्बादी

खाना इंसान की सबसे बुनियादी जरूरतों में से एक है, लेकिन दुनिया में हर साल बड़ी मात्रा में भोजन बिना इस्तेमाल किए फेंक दिया जाता है। एक ओर करोड़ों लोग पर्याप्त भोजन के लिए संघर्ष करते हैं, वहीं दूसरी ओर घरों, दुकानों, होटलों और दूसरे संस्थानों में खाने की बर्बादी जारी है। यह समस्या केवल खाद्य सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर भी असर पड़ता है। ऐसे में सवाल उठता है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खाना किस देश में बर्बाद होता है और किन देशों ने इस समस्या को कम करने में प्रगति की है।

चीन और भारत में खाने की बर्बादी की मात्रा काफी अधिक

उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक, कुल खाद्य बर्बादी की मात्रा के मामले में चीन और भारत दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल हैं। चीन में सालाना 10.8 करोड़ टन से अधिक और भारत में करीब 7.8 करोड़ टन भोजन बर्बाद होने का अनुमान बताया जाता है। अमेरिका में भी हर साल बड़ी मात्रा में खाना फेंका जाता है।

हालांकि, इन आंकड़ों को समझते समय देशों की आबादी पर ध्यान देना जरूरी है। चीन और भारत की विशाल आबादी के कारण यहां भोजन की कुल बर्बादी का आंकड़ा बड़ा दिखाई देता है। भारत में प्रति व्यक्ति सालाना घरेलू खाद्य बर्बादी का अनुमान करीब 54 किलोग्राम बताया जाता है। इसलिए कुल मात्रा और प्रति व्यक्ति बर्बादी के आधार पर देशों की तुलना करने पर अलग-अलग तस्वीर सामने आ सकती है।

दुनिया में हर साल एक अरब टन से ज्यादा खाना बर्बाद

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की खाद्य बर्बादी से संबंधित रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनिया भर में लगभग 1.05 अरब टन भोजन बर्बाद हुआ था। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा घरों से निकला।

रिपोर्ट के मुताबिक, कुल खाद्य बर्बादी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा घरेलू स्तर पर हुआ। खाद्य सेवाओं, जैसे होटल और रेस्तरां, का हिस्सा करीब 28 प्रतिशत था, जबकि खुदरा दुकानों से लगभग 12 प्रतिशत बर्बादी हुई। इन आंकड़ों से पता चलता है कि खाने की बर्बादी रोकने में आम लोगों और परिवारों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

घरों में किन कारणों से फेंका जाता है खाना?

घरों में भोजन बर्बाद होने के कई सामान्य कारण हैं। जरूरत से ज्यादा खाना बनाना, खरीदारी के दौरान जरूरत से अधिक सामान लेना, फल-सब्जियों को सही तरीके से स्टोर न करना और बचा हुआ भोजन समय पर इस्तेमाल नहीं करना इनमें शामिल हैं।

कई बार फ्रिज में रखे खाद्य पदार्थों की तारीख पर ध्यान नहीं दिया जाता या भोजन जरूरत से ज्यादा बन जाने के कारण इस्तेमाल नहीं हो पाता। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके इस बर्बादी को कम किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, सप्ताह भर के भोजन की योजना बनाना, जरूरत के अनुसार खरीदारी करना और सुरक्षित बचे हुए भोजन को समय रहते इस्तेमाल करना मददगार हो सकता है।

जापान और ब्रिटेन में खाद्य बर्बादी कम करने की दिशा में प्रगति

खाने की बर्बादी कम करने के मामले में जापान और ब्रिटेन जैसे देशों ने भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जापान ने वर्ष 2000 की तुलना में खाद्य हानि और बर्बादी में वर्ष 2022 तक लगभग 53 प्रतिशत की कमी हासिल की थी। ब्रिटेन में भी वर्ष 2007 के मुकाबले खाद्य बर्बादी में करीब 22 प्रतिशत कमी दर्ज की गई।

यूरोपीय संघ में भी खाद्य बर्बादी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उपलब्ध यूरोपीय आंकड़ों के अनुसार, यहां हर साल करोड़ों टन भोजन बर्बाद होता है। हालांकि, अलग-अलग देशों के आंकड़ों की तुलना करते समय यह देखना जरूरी है कि रिपोर्ट घरेलू बर्बादी माप रही है या उत्पादन से लेकर खुदरा बिक्री तक होने वाली कुल खाद्य हानि और बर्बादी को शामिल कर रही है।

सबसे कम खाना किस देश में बर्बाद होता है?

किसी एक देश को निश्चित रूप से दुनिया में सबसे कम खाना बर्बाद करने वाला देश बताना आसान नहीं है। इसकी वजह यह है कि सभी देशों में खाद्य बर्बादी का आकलन एक जैसे तरीकों और समान गुणवत्ता वाले आंकड़ों से नहीं किया जाता। कुछ रिपोर्ट केवल घरों में फेंके गए भोजन को मापती हैं, जबकि अन्य होटल, रेस्तरां और दुकानों को भी शामिल करती हैं।

इसलिए देशों की सही तुलना के लिए कुल बर्बादी के साथ-साथ प्रति व्यक्ति आंकड़े, मापन का तरीका और संबंधित वर्ष देखना जरूरी है। जापान और ब्रिटेन जैसे देशों में दर्ज कमी यह दिखाती है कि बेहतर योजना, जागरूकता और प्रभावी प्रबंधन के जरिए खाद्य बर्बादी को घटाया जा सकता है।

सत्‍य रिपोर्ट की अपील: भोजन की बर्बादी रोकना हम सभी की जिम्मेदारी है। जरूरत के अनुसार खाना बनाएं, खरीदारी सोच-समझकर करें और सुरक्षित बचे हुए भोजन का सही इस्तेमाल करें। प्रस्तुत आंकड़े उपलब्ध रिपोर्टों और अनुमानों पर आधारित हैं; अलग-अलग स्रोतों में मापन के तरीकों के कारण इनमें अंतर हो सकता है।

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